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आर्थिक सर्वेक्षण 2019: पांच वर्षों से लगातार नीचे आ रही है मुद्रास्फीति

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में पिछले पांच वर्ष से लगातार गिरावट आ रही है।

Bhasha Bhasha
Updated on: July 04, 2019 14:11 IST
Economic Survey 2019 में 2018-19 के लिए मुद्रास्फीति।- India TV Paisa
Photo:PIB

Economic Survey 2019 में 2018-19 के लिए मुद्रास्फीति।

नयी दिल्ली। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में पिछले पांच वर्ष से लगातार गिरावट आ रही है। संसद में गुरुवार को पेश 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान अर्थव्‍यवस्‍था अधिक एवं परिवर्तनीय मुद्रास्फीति के बजाय अपेक्षाकृत ज्‍यादा स्थिर एवं कम मुद्रास्फीति की ओर अग्रसर हो गई है। 

समीक्षा कहती है कि वित्त वर्ष 2018-19 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत पर आ गई है। सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति की दर वित्त वर्ष 2017-18 में 3.6 प्रतिशत, 2016-17 में 4.5 प्रतिशत, 2015-16 में 4.9 प्रतिशत और 2014-15 में 5.9 प्रतिशत के स्तर पर थी। 

समीक्षा में बताया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल 2018 में 4.6 प्रतिशत थी, जो अप्रैल, 2019 में 2.9 प्रतिशत पर आ गई है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, उपभोक्‍ता खाद्य मूल्‍य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित खाद्य महंगाई दर वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान घटकर 0.1 प्रतिशत के निम्‍न स्‍तर पर आ गई। 

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि थोक मूल्‍य सूचकांक (डब्‍ल्‍यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति दर 2018-19 में 4.3 प्रतिशत रही है। यह वर्ष 2016-17 में 1.7 प्रतिशत, 2015-16 में शून्य से 3.7 प्रतिशत नीचे और 2014-15 में 1.2 प्रतिशत के स्तर पर थी। 

आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में खाद्य मुद्रास्फीति निम्‍न स्‍तर पर बरकरार रही है। खाद्य महंगाई दर अप्रैल, 2019 में 1.1 प्रतिशत आंकी गई, जबकि यह मार्च, 2019 में 0.3 प्रतिशत और अप्रैल, 2018 में 2.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। 

समीक्षा में यह बात रेखांकित की गई है कि वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी छमाही के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति में भारी कमी मुख्‍यत: सब्जियों, फलों, दालों एवं उत्‍पादों, चीनी और अंडे की कीमतों में भारी गिरावट के कारण ही संभव हो पाई है। 

'शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा तेजी से घटी है मुद्रास्फीति'

देश में पिछले साल जुलाई से ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी इलाकों की तुलना में मुद्रास्फीति में कमी की दर अधिक रही है। संसद में गुरुवार को पेश 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि महंगाई दर के मौजूदा दौर की एक खास बात यह है कि ग्रामीण महंगाई के साथ-साथ शहरी महंगाई में भी कमी देखने को मिली है। 

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि जुलाई, 2018 से ही शहरी महंगाई की तुलना में ग्रामीण महंगाई में कमी की गति अपेक्षाकृत ज्‍यादा तेज रही है। इसकी बदौलत मुख्‍य महंगाई दर भी घट गई। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि ग्रामीण मुद्रास्फीति में कमी खाद्य महंगाई के घटने की वजह से आई है। पिछले छह माह (अक्‍टूबर, 2018 – मार्च, 2019) से खाद्य मुद्रास्फीति लगातार नीचे आ रही है। 

समीक्षा के मुताबिक एक और खास बात यह है कि ज्यादातर राज्यों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 23 राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों में मुद्रास्फीति की दर चार प्रतिशत से नीचे थी। वहीं वित्त वर्ष के दौरानइ 16 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों में मुद्रास्फीति की दर अखिल भारतीय औसत से कम आंकी गई। इस दौरान दमन एवं दीव में मुद्रास्फीति दर न्‍यूनतम रही और इस लिहाज से इसके बाद हिमाचल प्रदेश एवं आंध्र प्रदेश का नंबर आता है। 

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