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अमेरिका ने ईरान को हड़काते हुए कहा, हमारी मांगे मान लो या नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहो

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि उनका देश ईरानी सरकार के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाकर उनसे ‘निपटने से डरता’ नहीं है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: July 23, 2018 13:16 IST
Donald Trump and Hassan Rouhani | AP- India TV
Donald Trump and Hassan Rouhani | AP

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच रिश्ते अब बेहद ही तनावपूर्ण स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि उनका देश ईरानी सरकार के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाकर उनसे ‘निपटने से डरता’ नहीं है। ईरान के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अलग होने के बाद पोम्पिओ ने 21 मई को ‘नई रणनीति’ का खुलासा किया था जिसके तहत ईरान को कई सख्त मांगे मानने या ‘इतिहास में सबसे कड़े प्रतिबंधों’ का सामना करने को कहा गया।

‘हम ईरानी सरकार से निपटने से नहीं डरते’

पोम्पिओ ने ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख सादिक लर्जानी के खिलाफ जनवरी में लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कैलिफोर्निया में एक भाषण में कहा, ‘हम ईरानी सरकार के शीर्ष अधिकारियों से निपटने से नहीं डरते।’ उन्होंने यह भी पुष्टि की कि अमेरिका चाहता है कि सभी देश तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उसके प्रयासों का समर्थन करते हुए 4 नवंबर तक ईरान से तेल का आयात बंद कर दें। ट्रंप ने 8 मई को ईरान पर उन पुराने प्रतिबंधों को फिर से बहाल करने का फैसला किया जिन्हें परमाणु समझौते के बाद हटा लिया गया था। समझौते में ईरान ने अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम बंद करने का फैसला लिया था।

‘पाखंडी हैं ईरान के धार्मिक नेता’
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक ने ईरान के विशेष बलों और रेवोल्यूशनरी गार्ड्स का जिक्र करते हुए कहा, ‘सरकार में शामिल नेताओं को अपने बुरे फैसलों के लिए कठोर परिणाम भुगतने चाहिए।’ इससे पहले पोम्पिओ ने ईरान के धार्मिक नेताओं को ‘पाखंडी’ बताया जिन्होंने अपने लोगों को परेशान करने के लिए धन एकत्रित कर रखा है। पोम्पिओ ने यह टिप्पणी तब की जब ईरान अपनी इस्लामिक क्रांति की 40वीं वर्षगांठ मना रहा है और अमेरिका उस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार है।

‘ईरान के लोगों के साथ है अमेरिका’
पोम्पिओ ने कहा, ‘कई बार ऐसा लगता है कि दुनिया ईरानी सरकार की उसके ही देश में निरंकुशता और विदेश में उसके हिंसा के अभियानों को लेकर अंसवेदनशील हो गई है लेकिन स्वाभिमानी ईरानी लोग अपनी सरकार के अत्याचारों के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। और राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका भी चुप नहीं बैठेगा। इन प्रदर्शनों और सरकार के अत्याचारों के 40 वर्ष होने के मद्देनजर मेरे पास ईरान के लोगों के लिए संदेश है, अमेरिका आपको सुनता है। अमेरिका आपका समर्थन करता है। अमेरिका आपके साथ है।’ पोम्पिओ ने ईरान के राजनीतिक, न्यायिक और सैन्य नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार ने ‘अपने लोगों के मानवाधिकारों, सम्मान और मौलिक आजादी का बेरहमी से दमन किया है।’

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से कहा, सतर्क रहो
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह अमेरिका को धमकाता है तो उसे ऐसे अंजाम भुगतने पड़ेंगे जिनके उदाहरण इतिहास में विरले ही मिलते हैं। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी को दिए सीधे संदेश में टि्वटर पर कहा, ‘अमेरिका को दोबारा कभी भी ना धमकाएं अन्यथा आपको ऐसे अंजाम भुगतने पड़ेंगे जिसके उदाहरण इतिहास में बिरले ही मिलते हैं। हम ऐसे देश नहीं है जो आपके हिंसा और मौत के विक्षिप्त शब्दों को बर्दाश्त करेंगे। सतर्क रहो।’ गौरतलब है कि ट्रंप की इस टिप्पणी से पहले रूहानी ने अमेरिकी नेता को चेतावनी दी कि वह ‘सोते हुए शेर को ना छेड़ें।’ रूहानी ने कहा कि ईरान के साथ लड़ाई ‘सभी युद्धों की मां’ साबित होगी।

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