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आतंकवाद से निपटने के प्रयासों में अब भी पीछे है पाकिस्तान: अमेरिकी अधिकारी

भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की आतंकवादी समूहों को पालने-पोसने की नीति के मुद्दें को उठाता रहा है और अब इसका असर देखने को मिल भी रहा है.....

India TV News Desk India TV News Desk
Published on: June 30, 2018 13:34 IST
(File Picture: AP)- India TV
(File Picture: AP)

वाशिंगटन (अमेरिका): भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की आतंकवादी समूहों को पालने-पोसने की नीति के मुद्दें को उठाता रहा है और अब इसका असर देखने को मिल भी रहा है। हाल ही में ग्लोबल फाइनेन्शल वॉचडॉग ऑर्गनाइजेशन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकने में असफल होने के कारण 'ग्रे लिस्ट" में डाल दिया था। इसपर अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, आतंकवाद से निपटने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों में अब भी बहुत सी खामियां हैं जिन्हें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स लगातार उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि इन खामियों में संयुक्त राष्ट्र द्वारा चिह्नित आंतकवादी समूहों के लिए निधि जुटाने या उन्हें पैसा भेजे जाने पर रोक न लगा पाना भी शामिल है।

पाकिस्तान ने FATF के 'ग्रे लिस्ट' वाले फैसले को पलटने के लिए कूटनीतिक दबाव के 26 बिंदुओं वाली योजना भी पेश की गई पर FATA के फैसले को पलट नही पाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कल पीटीआई-भाषा को बताया, 'आतंकवादियों को आर्थिक मदद (सीएफटी) रोक पाने में पाकिस्तान के प्रयासों में अब भी कमियां हैं जिन्हें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा लगातार उठाया जा रहा है।'

FATF द्वारा पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाले जाने के सवाल पर प्रवक्ता ने कहा, 'पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र द्वारा चिह्नित आंतकवादी समूहों को धन पहुंचाना या धन जुटाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ ही सीएफटी पर कई व्यापक कदम उठाने होंगे। 'हालांकि प्रवक्ता ने पाकिस्तान के उस आश्वासन का स्वागत किया है जिसमें उसने इस क्षेत्र में कदम उठाने को कहा है। अधिकारी ने कहा, 'हमें खुशी है कि पाकिस्तान ने अपने सीएफटी क्षेत्र की कमियों को दूर करने के लिए एफएटीएफ के साथ काम करने के लिए उच्च स्तरीय राजनीतिक प्रतिबद्धता जाहिर की है।'

जानें क्या काम करती है FATF? 

FATF काले धन को वैध बनाने (मनी लान्डरिंग) को रोकने से सम्बन्धित नीतियाँ बनाने के लिए सन 1989 में स्थापित की गई थी। सन 2001 में इसका कार्यक्षेत्र विस्तारित किया गया और आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरुद्ध नीतियाँ बनाना भी इसके कार्यक्षेत्र में सम्मिलित कर लिया गया। इसका सचिवालय पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के मुख्यालय में है।

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