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मुस्लिम डेटाबेस को ट्रंप ने नहीं किया खारिज

वशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति पद की रिपब्लिकन उम्मीदवारी के लिए प्रमुख दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर एक विवाद पैदा कर दिया है कि वह देश को आतंकवाद से बचाने के लिए अमेरिका में मुस्लिमों के

Bhasha [Updated:20 Nov 2015, 12:44 PM IST]
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मुस्लिम डेटाबेस को ट्रंप ने नहीं किया खारिज

वशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति पद की रिपब्लिकन उम्मीदवारी के लिए प्रमुख दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर एक विवाद पैदा कर दिया है कि वह देश को आतंकवाद से बचाने के लिए अमेरिका में मुस्लिमों के डेटाबेस की व्यवस्था को निश्चित तौर पर लागू करेंगे। ट्रंप ने कल एक निजी न्यूज चैनल को बताया, ‘मैं निश्चित तौर पर उसे लागू करूंगा।’ वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता ने कहा, डेटाबेस से इतर भी बहुत सी व्यवस्थाएं होनी चाहिए।

ट्रंप ने बताया, हम बहुत सी चीजों पर बहुत करीब से निगाह रखने जा रहे हैं। हम मस्जिदों पर निगाह रखने जा रहे हैं। हम बहुत, बहुत सावधानी से देखना होगा। ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए अमेरिका के मुस्लिमों पर अभूतपूर्व निगरानी जरूरी होगी। वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता से जब पूछा गया कि क्या पहले से अधिक निगरानी में बिना वारंट के तलाशियां भी शामिल हो सकती हैं, तो उन्होंने कहा, हम ऐसी चीज करने जा रहे हैं, जो हमने पहले कभी नहीं की। कुछ लोग इसे लेकर नाराज होंगे, लेकिन मेरा मानना है कि अब हर कोई यही सोच रहा है सुरक्षा सर्वोच्च होनी चाहिए।

ट्रंप ने कहा, कुछ ऐसी भी चीजें की जाएंगी जो हमने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इस देश में होंगी। ये चीजें दुश्मन से जुड़ी सूचनाओं और जानकारी को लेकर होंगी। हम ऐसी चीजें करेंगे जो एक साल पहले तक सोची भी नहीं जा सकती थीं। ट्रंप की टिप्पणियों से सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है।

डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के प्रमुख डेबी वासेरमैन शुल्ट्ज ने एक बयान में कहा, डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मुस्लिम-अमेरिकी डेटाबेस और विशेष पहचानों को लेकर दिखाई गई उन्मुक्तता शर्मनाक हैं यह आज की रिपब्लिकन पार्टी की गैर समावेशी संस्कृति को दर्शाती है। यह एक ऐसी खतरनाक सोच है, जिससे हमारी महानतम पीढ़ी लड़ी थी और सात दशक पहले उसे हरा दिया था।

शुल्ट्ज ने कहा, श्रीमान ट्रंप को यह प्रस्ताव देने के लिए शर्मिंदा होना चाहिए कि अमेरिका एक ऐसी जगह हो सकती है, जहां जनसमूह को इकट्ठा किया जाता है और उनकी वर्गीकरण उनके धर्म के आधार पर किया जाता है। हम अपनी राजनीतिक प्रक्रिया को डर से संचालित नहीं होने दे सकते।

उन्होंने कहा, यह भाषा सिर्फ आक्रामक ही नहीं है- यह गैर-अमेरिकी, अहितकारी और खतरनाक है। इस तरह के बयान विश्वभर में अमेरिकी विश्वसनीयता को नष्ट करते हैं और आतंकी संगठनों के लिए नियुक्ति के औजारों के रूप में काम करते हैं। ये आतंकी संगठन इसे इस तरह से पेश करते हैं कि इस्लाम की पश्चिम के साथ एक धार्मिक लड़ाई चल रही है।

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