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श्रीलंका में चीन की मौजूदगी का भारत ने दिया करारा जवाब, हासिल किया हंबनटोटा एयरपोर्ट

श्रीलंका में रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर हंबनटोटा में हवाईअड्डे का परिचालन भारत करेगा......

India TV News Desk India TV News Desk
Updated on: July 06, 2018 15:01 IST
- India TV
मत्ताला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (Photo,PTI)

कोलंबो (श्रीलंका): श्रीलंका में रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर हंबनटोटा में हवाईअड्डे का परिचालन भारत करेगा। यह हवाई अड्डा घाटे में है पर हंबनटोटा बंदरगाह का पट्टा चीन के पास है और इसका बड़ा महत्व है। श्रीलंका के नागर विमानन मंत्री निमल श्रीपाल डी सिल्वा ने संसद में कहा कि घाटे में चल रहे मत्ताला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को भारत दोनों देशों के बीच एक संयुक्त उपक्रम के रुप में चलाएगा। साझा उपक्रम में भारत बड़ा भागीदार होगा।

इसे कहा जाता है विश्व का सबसे खाली हवाईअड्डा

यह हवाई अड्डा राजधानी  कोलंबो से 241 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। इसे 21 करोड़ डॉलर की लागत से बनाया गया है लेकिन वहां से ज्यादा उड़ान न होने के कारण यह घाटे में है। इसे विश्व का सबसे खाली हवाईअड्डा कहा जाता है। डी सिल्वा ने संसद में कहा, ‘‘हमें घाटे में चल रहे इस हवाईअड्डे को सही करना होगा जिसके कारण 20 अरब रुपये का भारी नुकसान हुआ है।’’ उन्होंने कहा कि अनुबंध की अंतिम शर्तें अभी तय की जानी हैं। विपक्षी सांसद कणक हेरत ने मंत्री से सवाल किया कि क्या इस हवाईअड्डे का परिचालन भारत को खुश करने के लिए दिया गया है? इसके जवाब में डी सिल्वा ने कहा कि सरकार ने इसके परिचालन के लिए 2016 में टेंडर मंगवाया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमें मदद की पेशकश सिर्फ भारत ने की। अब हम भारत के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने की बातचीत कर रहे हैं।’’

चीन से भारी-भरकम ब्याज वाले कर्ज से बनाया गया था

यह हवाईअड्डा पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के नाम पर बना है। उनके कार्यकाल के दौरान इसे चीन के भारी-भरकम ब्याज वाले कर्ज से बनाया गया था। इसका परिचालन मार्च 2013 में शुरू हुआ था। लगातार घाटे तथा सुरक्षा कारणों से यहां की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय उड़ान भी इस साल मई में बंद हो गई थी। उल्लेखनीय है कि हवाईअड्डे के पास में ही स्थित बंदरगाह का नियंत्रण चीन के पास है। चीन को यह अधिकार उसका कर्ज चुकाने के लिए दिया गया है।

श्रीलंका में चीन की मौजूदगी से भारत को क्यों चिंतित

​2005-17 के बीच 12 वर्षों की अवधि में बीजिंग ने श्रीलंका की परियोजनाओं में 15 अरब डॉलर का निवेश किया है। वहीं, चीन के एक राजदूत भारत को एक स्पष्ट संदेश दे चुके हैं, जो श्रीलंका में चीनी उपस्थिति को अपने प्रभाव क्षेत्र में घुसपैठ के रूप में देखता है। राजदूत ने भारत को स्पष्ट जवाब देते हुए कहा था, "कोई नकारात्मक ताकत श्रीलंका और चीन के बीच सहयोग को कमजोर नहीं कर सकती है।"

चीन केवल व्यवसायिक रुप से करेगा बंदरगाह का इस्तेमाल

श्रीलंका ने चीन को हम्बनटोटा बंदरगाह 99 साल के लीज पर दिया है इसके साथ ही 15,000 एकड़ जगह इंडस्ट्रियल जोन स्थापित करने के लिए भी दी है। पहले श्रीलंका की तरफ से ये चिंता जाहिर की गई थी कि कहीं चीनी सेना बंदरगाह का इस्तमाल ना करने लगे। बाद में चीन की तरफ से आश्वासन दिया गया की वह बंदरगाह का इस्तेमाल केवल व्यवसायिक रुप से करेगा, जिसके बाद बनी सहमती के बाद ही यह बंदरगाह उसे लीज पर दिया गया। हम्बनटोटा का रूट एशिया से यूरोप तक है। श्रीलंका का कहना है कि इस समझौते से मिलने वाली रकम से उसे विदेशी कर्ज चुकाने में उसे मदद मिलेगी।

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