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थाइलैंड में रहने वाले परेशान देशवासियों से मुलाकात करेंगी सू ची

म्यांमार की आंग सान सू ची गुरुवार को थाइलैंड पहुंच रही हैं और ऐसी उम्मीद की जा रही है यहां उनके प्रशंसक हमवतन उनका स्वागत करेंगे जिनमें हजारों वे लोग शामिल हैं जो सीमा के उस पार से जंग से बचने और रोटी-रोजी की तलाश में यहां आए हैं।

India TV News Desk [Published on:23 Jun 2016, 1:44 PM IST]
Aung San Suu Kyi - India TV
Aung San Suu Kyi

बैंकॉक: म्यांमार की आंग सान सू ची गुरुवार को थाइलैंड पहुंच रही हैं और ऐसी उम्मीद की जा रही है यहां उनके प्रशंसक हमवतन उनका स्वागत करेंगे जिनमें हजारों वे लोग शामिल हैं जो सीमा के उस पार से जंग से बचने और रोटी-रोजी की तलाश में यहां आए हैं। अप्रैल में सू ची की लोकतंत्रवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से यह उनकी उच्चस्तरीय विदेश यात्रा है। सू ची की पार्टी लगभग 50 साल तक देश में चली सैन्य तानाशाही के बाद सत्ता में आई है।

उनकी सरकार ने समृद्धि के एक नए दौर की उम्मीदें पैदा की हैं और ये उम्मीदें थाइलैंड में कम मजदूरी पर काम करने वाले म्यांमार के मजदूरों को अपने देश वापस लौटने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। दक्षिणपूर्व एशिया के ये दोनों पड़ोसी देश हाल के वर्षों में दो बिल्कुल विपरीत दिशाओं में बढ़े हैं। म्यांमार के सैन्य तानाशाहों ने जहां राजनीति पर पकड़ ढीली छोड़ते हुए पिछले साल वहां स्वतंत्र चुनाव होने दिए, वहीं थाइलैंड अब भी सेना के कब्जे में है। सेना ने वर्ष 2014 में सत्ता पर कब्जा किया था।

म्यांमा में लोकतंत्र की पुरोधा सू ची को गुरूवार को मछलीपालन से जुड़े सामुत साखोन के गांव के दौरे के दौरान रॉक स्टार सरीखा स्वागत मिलने की संभावना है। बैंकॉक के ठीक बाहर स्थित पत्तन थाइलैंड के व्यापक सीफूड उद्योग का गढ़ है जहां कम वेतन पर काम करने वाले म्यांमार के एक लाख मजदूर रहते हैं। म्यांमार के प्रवासी थोन बारामी (50) ने एएफपी से कहा कि यह दौरा मुझे उम्मीद से भरता है। उन्होंने कहा, हमें यहां थाइलैंड में समस्याएं हैं। वह श्रम अधिकारों के साथ हमारी मदद कर सकती हैं। पूरी दुनिया के लोग उनकी कही बातें सुनेंगे।

मत्स्य क्षेत्र में बंधुआ मजदूरी और कर्मचारियों के व्यापक शोषण से जुड़े खुलासे होते रहे हैं। अपने देश में गरीबी से बचने के लिए म्यांमा के लगभग 10 लाख लोगों ने खुद को प्रवासी कर्मचारियों के रूप में पंजीकृत कराया और थाइलैंड के श्रमबल की रीढ़ बन गए। इनमें से हजारों लोग थाइलैंड में अवैध रूप से काम करते हैं और कुछ आकलनों के मुताबिक थाइलैंड में म्यांमा के करीब 30 लाख लोग हैं।

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