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ईरानी अदालत में जलाया गया अमेरिकी झंडा, 'अमेरिका का खात्मा हो जाए' के नारे लगाए

बीते बुधवार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ ऐतिहासिक परमाणु हथियार समझौता खत्म करने के बाद ईरान की संसद में खूब हंगामा किया गया। संसद में ट्रंप के फैसले के विरोध में अमेरिकी झंडे को जलाया गया।

India TV News Desk India TV News Desk
Published on: May 10, 2018 14:36 IST
iran- India TV
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तेहरान: बीते बुधवार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ ऐतिहासिक परमाणु हथियार समझौता खत्म करने के बाद ईरान की संसद में खूब हंगामा किया गया। संसद में ट्रंप के फैसले के विरोध में अमेरिकी झंडे को जलाया गया। सभी नाराज सांसदों ने अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। इसके साथ ही ईरानी संसद में 'अमेरिका का खात्मा हो जाए' के नारे भी लगाए। ईरानी सांसदों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सभी सांसद पेपर से बने अमेरिकी झंडे को जलाते हुए दिख रहे हैं। सभी के चेहरे पर अमेरिका के फैसले के खिलाफ गुस्सा साफ देखा जा सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका के समझौते से अलग होने के फैसले के चलते यूरोपीय देशों द्वारा इसके लिए प्रतिबद्धता दिखाई गई है। अमेरिका के पारंपरिक एवं करीबी मित्र रहे फ्रांस , ब्रिटेन और जर्मनी ने इस पर चिंता जाहिर की जबकि ईरान के विरोधियों इस्रायल एवं सऊदी अरब ने इसका स्वागत किया। (पाकिस्तान में सूद देने पर हिंदू व्यापारी का सिर और भौंहें मुंडवाई )

ट्रंप ने संधि को खराब बताते हुए कल इसे रद्द करने की घोषणा की थी। इस संधि पर अमेरिका और ईरान के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य चार देशों ब्रिटेन , फ्रांस , चीन और रूस तथा जर्मनी ने हस्ताक्षर किये हैं। यूरोपीय नेताओं ने कहा कि ट्रंप ने भले ही सहयोगी देशों को प्रतिबद्धता तोड़ धोखा दिया हो , वे संधि के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे , जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल , फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटोरेस ने ट्रंप को संधि रद्द नहीं करने को चेताया था।

मे , मर्केल और मैक्रों ने ट्रंप की घोषणा के बाद एक संयुक्त बयान में कहा कि वे इस संधि से जुड़े रहेंगे क्योंकि इससे दुनिया में शांति स्थापित हुई। रूस और चीन ने भी ट्रंप के निर्णय पर निराशा जाहिर की। रूस ने कहा कि ट्रंप के संधि को रद्द करने का निर्णय बेहद निराशाजनक है। चीन ने भी ट्रंप के फैसले पर अफसोस जाहिर किया और इस संधि की सुरक्षा का निश्चय किया। वहीं ईरान ने चेतावनी दी कि यदि यूरोपीय देशों ने संधि की सुरक्षा का वादा नहीं दिया तो वह औद्योगिक स्तर पर यूरेनियम संवर्धन शुरू कर देगा। 

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