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World Cup 2019: बुमराह की यॉर्कर का सामना करने के लिए 'सेंसर' लगे बल्ले के साथ उतरेगा ये ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज

डेविड वार्नर विश्व कप के आगे के कड़े मुकाबलों की तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं और इसके लिये वह अपने बल्ले पर नये उपकरण का उपयोग कर रहे हैं।

Bhasha Bhasha
Published on: June 09, 2019 13:34 IST
World Cup 2019: बुमराह की...- India TV
Image Source : GETTY IMAGES World Cup 2019: बुमराह की यॉर्कर का सामना करने के लिए 'सेंसर' लगे बल्ले के साथ उतरेगा ये ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज

लंदन। आस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर विश्व कप के आगे के कड़े मुकाबलों की तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं और इसके लिये वह अपने बल्ले पर नये उपकरण का उपयोग कर रहे हैं जो कि एक सेंसर है जिसमें बैकलिफ्ट के कोण से लेकर बल्ले की अधिकतम गति जैसे आंकड़े दर्ज रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 2017 में बल्ले पर सेंसर लगाने के लिये मंजूरी प्रदान की थी लेकिन आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज को छोड़कर पिछले दो वर्षों में किसी ने इसका उपयोग नहीं किया। बेंगलुरू स्थित कंपनी ‘स्मार्ट क्रिकेट’ ने बल्ले के सेंसर के लिये एक खास चिप तैयार की है जिसका उपयोग वार्नर कर रहे हैं ताकि उन्हें जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों का सामना करने में मदद मिले।

सेंसर चिप बल्ले के हैंडल के ऊपर लगायी जाती है। बल्लेबाज जब तक बल्लेबाजी कर रहा होता है तब तक के चिप जो भी आंकड़े हासिल करती है वे ‘क्लाउड स्टोरेज’ के जरिये मोबाइल ऐप में संग्रहीत हो जाते हैं।

वार्नर को बल्ले के सेंसर से मिले आंकड़ों से बुमराह जैसे गेंदबाजों का सामना करने के लिये कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जैसे कि बुमराह की यार्कर का सामना करने के लिये बल्ले की अधिकतम गति कितनी होनी चाहिए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बल्ले की गति 70 से 75 किमी होनी चाहिए लेकिन वार्नर अपने बल्ले को 85 से 90 किमी की गति से उठाने का प्रयास कर रहे हैं।

बुमराह जैसे स्लिंगर के लिये बैकलिफ्ट का कोण लगभग 120-125 के आसपास होना चाहिए और बल्ला पहली स्लिप की तरफ से नीचे आना चाहिए लेकिन भुवनेश्वर कुमार के सामने बैकलिफ्ट विकेटकीपर की लाइन में होनी चाहिए। स्पिनरों के लिये बैकलिफ्ट का कोण न्यूनतम 160 डिग्री तथा अधिकतम 175 डिग्री होना चाहिए।

भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज दीप दासगुप्ता ने पीटीआई से कहा, ‘‘पहले कोच बैकलिफ्ट के कोण या बल्ले की गति या बल्ले और शरीर के बीच दूरी के लिये अपने नैसर्गिक कौशल का उपयोग करते थे। मेरा मानना है कि अगर सटीक आंकड़े कोच की मदद कर सकते हैं तो इनका उपयोग किया जाना चाहिए।’’ वर्तमान में भारत का कोई भी खिलाड़ी बल्ले पर सेंसर का उपयोग नहीं कर रहा है जो निकट भविष्य में बल्लेबाजों के लिये उपयोगी साबित हो सकता है। 

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