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मुझे नहीं लगता ज्यादा मैच खलेने से आपके पास ज्यादा ज्ञान होगा- एम. एस. के प्रसाद

अगर कोई हमारे कद और अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर सवाल उठा रहा तो उसे इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड की चयन समिति के अध्यक्ष एड स्मिथ को देखना चाहिए।

India TV Sports Desk India TV Sports Desk
Updated on: July 31, 2019 7:21 IST
MSK Prasad- India TV
Image Source : PTI MSK Prasad, Team India Selector

पहले आईसीसी विश्व कप 2019 और उसके बाद वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम चुने जाने के बाद चयनकर्ताओं को एक बार फिर आलोचना का शिकार होना पड़ा है। उनके द्वारा चुनी जाने वाली टीम से दिग्गज हमेशा नाखुश रहे हैं। जिसके पीछे का कारण चयनसमिति में बैठे सदस्यों के पास कम अंतराष्ट्रीय मैचों का अनुभव बताया जा रहा था। इस कड़ी में भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावसकर ने कमजोर चयनकर्ता होने का आरोप लगाया है। जिसका कारण चयन समिति में शामिल पांच सदस्यों को कुल 13 टेस्ट मैचों का अनुभव बताया है। 

ऐसे में मुख्य चयनकर्ता एम.एस के प्रसाद ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बेबाकी से जवाब देते हुए कहा मैच खेलना बस एक नंबर है, मुझे नहीं लगता कि ज्यादा मैच खेलने से आपके पास ज्यादा ज्ञान होगा। इस पर जब सवाल उठा कि चयनकर्ताओं पे ये आरोप लगाया जा रहा है, उनके पास कम मैच खेलने का अनुभव है जिससे वो एक अच्छी टीम नहीं चुन पा रहे हैं।

इस पर प्रसाद ने कहा, "मैं आपको बता दूं कि चयनसमिति में शामिल सभी सदस्यों ने विभिन्न प्रारूपों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है जो हमारी नियुक्ति के समय बुनियादी मानक था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा हमने प्रथम श्रेणी के 477 मैच खेले हैं। अपने कार्यकाल के दौरान हम सबने मिलकर 200 से ज्यादा प्रथम श्रेणी मैच देखे हैं।’ क्या ये आंकड़े देखने के बाद आपको नहीं लगता कि एक खिलाड़ी और चयनकर्ता के तौर पर हम सही कौशल को पहचानने की क्षमता रखते हैं?

कई क्रिकेट पंडितों और दिग्गजों का ये कहना है कि आप लोगो ने मिलकर सिर्फ 13 टेस्ट मैच खेलें हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

अगर कोई हमारे कद और अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर सवाल उठा रहा तो उसे इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड की चयन समिति के अध्यक्ष एड स्मिथ को देखना चाहिए जिन्होंने सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य चयनकर्ता ट्रेवोर होन्स ने सिर्फ सात टेस्ट मैच खेले हैं और वह बीच में दो साल को छोड़कर पिछले डेढ दशक से मुख्य चयनकर्ता है। हां, 128 टेस्ट और 244 एकदिवसीय मैच खेलने वाले मार्क वॉ उनके अधीन काम कर रहे हैं।

दिग्गज ग्रेग चैपल को 87 टेस्ट और 74 एकदिवसीय का अनुभव है और वह भी ट्रेवर के अधीन काम कर रहे हैं। जब उन देशों में कद और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मुद्दा नहीं है तो तो हमारे देश में यह कैसे होगा? मैं यहां पर बस यह कहने की कोशिश कर रहा हूं कि हर काम के लिए अलग जरूरत होती है। अगर अंतरराष्ट्रीय अनुभव का ही सवाल है तो हमारे चहेते राज सिंह डूंगरपुर कभी चयनसमिति के अध्यक्ष नहीं होते, क्योंकि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला ही नहीं था।

ऐसे में शायद सचिन तेंदुलकर जैसा हीरा 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलता ही नहीं। अगर अंतरराष्ट्रीय अनुभव की बात है तो कई क्रिकेटर जिन्होंने प्रथम श्रेणी में बहुत मैच खेले है वह चयनकर्ता बनने के बारे में सोच ही नहीं सकते। इस तरह चयन समिति के कद और अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर तर्क देना कहाँ तक सही है मुझे नहीं पता। ऐसे में प्रतिभा को तराशना और उसे हीरा बनाने के लिए सही मायने में एक अलग तरह की विशेषज्ञता की जरूरत होती है, उसका अंतराष्ट्रीय अनुभव से कोई लेना देना नहीं है।

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