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Sachin Tendulkar B’Day Special| सचिन तेंदुलकर के जीवन की पांच ऐसी वनडे पारियां जिन्हें फैंस कभी नहीं भूलना चाहेंगे

Happy Birthday Sachin Tendulkar: सचिन का आज 46वां जन्मदिन है। जिसे पूरा देश एक साथ मिलकर मना रहा है। सभी सचिन के लिए सोशल मीडिया पर अपने-अपने अंदाज में प्यार परोस रहे हैं।

India TV Sports Desk India TV Sports Desk
Updated on: April 24, 2019 10:55 IST
सचिन तेंदुलकर- India TV
Image Source : GETTY IMAGE सचिन तेंदुलकर, पूर्व भारतीय खिलाड़ी 

प्रकृति का एक नियम है लोग आते-जाते रहते है और काल चक्र का पहिया घूमता रहता है, अमर वही होता है जो इतिहास के पन्नो में अपना सुनहरा नाम दर्ज़ करवाता है। लोग उस इंसान को अपना आदर्श, भगवान या कहे सब कुछ मान बैठते हैं। उसकी मिशाल हजारों सालों तक कायम रहती है। कुछ ऐसी ही मिशाल कायम की है क्रिकेट के मंदिर में भगवान माने जाने वाले मास्टर ब्लास्टर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने जिनके पद चिन्हों पर चलकर देश को आज विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा समेत कई होनहार क्रिकेटर मिलें हैं।

हिंदुस्तानियों की नब्ज़ में बसने वाले क्रिकेट को लोगों ने कभी एक खेल की तरह नहीं बल्कि उसे जिंदगी का अहम हिस्सा बनाया है। जिसका प्रभाव सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पड़ा है। यही कारण है की क्रिकेट के मंदिर में सचिन को लोग भगवान मानते है और उसी भगवान का आज 46वां जन्मदिन है। जिसे पूरा देश एक साथ मिलकर मना रहा है। सभी सचिन के लिए सोशल मीडिया पर अपने-अपने अंदाज में प्यार परोस रहे हैं।
ऐसे में आज हम आपको बतायेंगे उनके करियर की पांच ऐसी वनडे पारियों के बारें में, जिनको देखकर वाकई यकीन होता है कि क्रिकेट के मैदान में इस तरह शायद भगवान ही खेल सकते हैं।

1. 143 बनाम ऑस्ट्रेलिया 1998, शारजाहा ( यू.ए.ई )

सचिन के 24 सालों के क्रिकेट करियर में शारजाहा में खेली गई पारी फैंस हमेशा अपने दिल में बसा कर रखना चाहेंगे। शारजाह के मैदान में सचिन की बल्लेबाजी को रेतीला तूफ़ान भी नहीं रोक पाया। ऑस्ट्रेलिया के 46 ओवरों में 276 रनों का पीछा करते हुए सचिन लय में नजर आ रहे थे। तभी मैदान में रेतीला तूफ़ान आने के कारण मैच रोकना पड़ जाता है। ऐसे में रेतीले तूफ़ान के थमने के बाद मैदान में सचिन की बल्लेबाजी का तूफ़ान शुरू हो जाता है और ऑस्ट्रेलियाई टीम के गेंदबाज हताश होते नजर आते है। सचिन मैदान के चारो कोनो में शॉट्स मारते हुए 143 रन जड़ते है। जिस पारी को देखतें ही बनता है। मैदान में मौजूद सभी दर्शक अपनी सीट पर खडें होकर सचिन का अभिवादन करते हैं। हालाँकि यह मैच भारत हार जाता है लेकिन फ़ाइनल मुकाबले में एक बार फिर सचिन शारजाह में 134 रनों की पारी खेलते है जिसमें टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत हासिल कर कोकाकोला कप पर कब्जा करती है।

2. 140* बनाम केन्या 1999, ब्रिस्टल ( इंग्लैंड )

सचिन ने इस पारी को अपने पिता को समर्पित किया था, जिसके कारण हर कोई क्रिकेट फैन मुश्किलों भरे हालत में उनकी ये पारी कभी नहीं भूल सकता है।
दरअसल, 1999 विश्वकप के दौरान सचिन टीम इंडिया के साथ मिशन विश्वकप पर थे, तभी घर पर उनके पिता का देहांत हो जाता है। सचिन की माँ उस समय उन्हें मजबूती देते हुए कहती है कि तुम्हारे पिता और मैं तुम्हे हमेशा से मैदान में देखते देखना चाहते है इसलिए तुम्हे मैदान में जाकर अपने देश के लिए खेलना चाहिए। जिससे तुम्हारे पिता खुश होंगे।
सचिन इस मुश्किल भरे समय में वापस आते है और दो मैच हार चुकी टीम इंडिया का सामना केन्या से होता है। टॉस जीतकर टीम इंडिया पहले बल्लेबाजी करने आती है और सचिन नम्बर तीन पर मैदान में बल्लेबाजी करने उतरते हैं। जिसके बाद शुरू होती है जीवन के सबसे कठिन हालातों में मास्टर के द्वारा खेली गयी ब्लास्टर पारी की कहानी और सचिन केन्या के गेंदबाजों को एक स्कूली बच्चों की तरह मारते नजर आते हैं। सचिन के 101 गेंदों में खेली गई 140 रनों की नाबाद पारी के चलते टीम इंडिया ये मैच 94 रनों से जीतती है। शतक मारने के बाद सचिन ने उपर आकाश में देखते हुए इस पारी को अपने पिता को समर्पित करते हैं।
इस घटना के कई सालों बाद सचिन इस पारी के बारें में बताते हैं कि वो सबसे मुश्किल हालातों में खेली हुई पारी थी। उस समय मेरी माँ ने मुझे कहा था तुम्हारे पिता जी तुम्हे देश के लिए हमेशा से खेलते हुए देखना चाहते थे। अगर तुम घर पर बैठे वो सबसे बुरा होगा इसलिए तुम्हे जाकर देश के लिए खेलना होगा वो सबसे जरूरी है।

3. 98 बनाम पाकिस्तान 2003, सेंचुरियन ( साउथ अफ्रीका )

एक दशक पहले हिंदुस्तान की बल्लेबाजी तो पाकिस्तान की  गेंदबाजी का गूरुर विश्व क्रिकेट पर कायम था। दोनों चिरप्रतिद्वंदी के बीच मैच हमेशा देखने लायक होता है। इस मैच में सचिन भलें ही शतक मारने से सिर्फ दो रन दूर रह गये हो मगर उनकी पारी को पवेलियन में बैठे दोनों देशो के दर्शकों ने सराहा था।
दरअसल, उस समय पाकिस्तान के पास एक से बढ़कर एक धाकड़ तेज़ गेंदबाज थे। जिनकी तेज़ी और स्विंग के आगे दुनिया के सभी बल्लेबाज चित्त नजर आते थे। इनमें वसीम अकरम, वक़ार युनिस, शोएब अख्तर और अब्दुल रज्जाक के नाम शामिल थे। ये सभी सोलह आने खरे गेंदबाज थे। तभी तेंदुलकर ने मैदान में उतरने के साथ जैसे ही बैकफूट पर जाकर एक्स्ट्रा कवर के रूप में शानदार ड्राइव मारा लोग मैदान में सचिन-सचिन के नारे लगाने लगे। उसके बाद रंग में आए सचिन ने दिग्गज पाकिस्तानी गेंदबाजों को हर कोने में शॉट्स मारे। 
इस तरह 75 गेंद में 98 रन बनाने के बाद शोएब अख्तर की बाउंसर गेंद पर सचिन अपना विकेट गंवा बैठते है। हालांकि तब तक मजबूत स्थिति में पहुँच चुकी टीम इंडिया इस मैच को आसानी से अपने नाम करती है।
अपनी इस पारी के बारें में बात करते हुए सचिन का मानना था कि उन्हें इस बात का कभी मलाल नहीं है कि वो इसमें शतक नहीं मार पाए बल्कि विश्वकप में खेली गई ये पारी उनके लिए हमेशा ये यादगार पारियों में से एक है।  

4. 175 बनाम ऑस्ट्रेलिया 2009, हैदराबाद ( भारत )

सचिन की इस पारी को सबसे जुझारू पारी के रूप में जाना जाता है। जिसमें उनके अंदर जीत का जज्बा अंत तक बरकरार रहा लेकिन दुर्भाग्यवश टीम इंडिया को जीत की दहलीज़ पर आकर हार का मुहं देखना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के पहली पारी में 351 रनों का पीछा करते हुए सचिन ने शुरू से शानदार बल्लेबाजी रखी मगर दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का उन्हें पर्याप्त साथ नहीं मिला। इसके बावजूद अकेले कंधो पर जीत का जिम्मा लेकर चलने वाले सचिन मैदान में 360 डिग्री अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे थे। जो कि इस खिलाड़ी के खेल के प्रति जुनून और जीत की भूख को दर्शाता है। 140 गेंदों में 175 रन के दौरान 19 चौके व 4 छक्के लगाने वाले मास्टर ब्लास्टर अचानक पैडल स्वीप शॉट के जरिये अपना विकेट गंवा बैठते हैं और टीम इंडिया 3 रनों से मैच हार जाती है। 
अपनी जिंदगी में इस पारी को खास अहमियत देते हुए सचिन का कहना है कि ये मेरे जीवन की सबसे शानदार पारी में से एक है जो मुझे इस खेल के प्रति प्रेरित करती है। मुझ अफसोस है की मेरी पारी जीत दिलाने में कामयाब नहीं रही। पिछले 20 साल से मेरा एक ही सपना है देश के लिए खेलना, जिसे मैं करता आ रहा हूं और जब तक फिट हूँ खेलता रहूँगा।

5. 200* बनाम साउथ अफ्रीका 2010, ग्वालियर ( भारत )

सचिन ने अपने 24 साल के करियर में कई मुकामों को हासिल किया है। जिसमें सबसे ख़ास वनडे क्रिकेट इतिहास में सबसे पहले दोहरा मारने वाला दुनिया का पहला पुरुष बल्लेबाज बनना। सचिन से पहले वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया की महिला खिलाड़ी बेलिंडा क्लार्क ने 1997 में डेनमार्क के खिलाफ दोहरा जड़ा था। जिसके बाद यह कारनामा सचिन तेंदुलकर के नाम हुआ। 
सचिन ने 2010 में साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 25 चौके और तीन छक्के मारते हुए वनडे क्रिकेट का दोहरा शतक जड़ा। उन्होंने अपनी इस पारी के साथ पिछले 13 सालों से कायम सईद अनवर के 194 रनों के रिकॉर्ड को भी ध्वस्त किया।
सचिन के दोहरे की सबसे ख़ास बात यह थी कि उसने आधुनिक क्रिकेट के खिलाड़ियों की मानसिकता बदल थी कि वो भी अब वनडे क्रिकेट में दोहरा जड़ सकते हैं।
जिसके बाद भारत के वीरेंद्र सहवाग, रोहित शर्मा, न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल ने भी इस मुकाम को हासिल किया। 
इस तरह क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन के 24 साल का लम्बा करियर हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणा दायक रहा है। इतना ही नहीं साफ़ सुथरी छवि होने के कारण वह कभी विवादों का हिस्सा भी नहीं बने। जिसके चलते लोग आज क्रिकेट के मैदान या स्टेडियम को अपना मंदिर तो भगवान सचिन को मानते हैं। 

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