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Be Sure: मोटर इंश्‍योरेंस होने के बाद भी बीमा कंपनी कर सकती है इंकार, क्‍लेम से पहले इन बातों का रखें ध्‍यान

कई बार हम भी ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिसके कारण मोटर इंश्‍योरेंस होने के बावजूद हमें क्‍लेम नहीं मिलता। जरूरी है कि आप ये सावधानियां बरतें।

Dharmender Chaudhary Dharmender Chaudhary
Updated on: February 12, 2016 13:08 IST
Be Sure: मोटर इंश्‍योरेंस होने के बाद भी बीमा कंपनी कर सकती है इंकार, क्‍लेम से पहले इन बातों का रखें ध्‍यान- India TV Paisa
Be Sure: मोटर इंश्‍योरेंस होने के बाद भी बीमा कंपनी कर सकती है इंकार, क्‍लेम से पहले इन बातों का रखें ध्‍यान

नई दिल्‍ली। लखनऊ में रहने वाले कार्तिक रोज अपने ऑफिस आने-जाने के लिए अपनी कार का इस्‍तेमाल करते हैं। पिछले महीने घर वापस आते वक्‍त उनकी कार एक्‍सीडेंट हो गया। कार्तिक को ज्‍यादा चोट नहीं आई लेकिन उनकी कार को काफी नुकसान हुआ। कार्तिक ने कार का इंश्‍योरेंस करवा रखा था। लेकिन जब उन्‍होंने इंश्‍योरेंस क्‍लेम किया तो कंपनी ने उनका क्‍लेम रिजेक्‍ट कर दिया। कंपनी के अनुसार कार्तिक ने दुर्घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी कंपनी का सूचित नहीं किया और बाहर किसी मैकेनिक से कार रिपेयर कर ली। जिसके कारण क्‍लेम रिजेक्‍ट हो गया। कई बार हम भी ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिसके कारण मोटर इंश्‍योरेंस होने के बावजूद हमें क्‍लेम नहीं मिलता। इंडिया टीवी पैसा की टीम आपको बताने जा रही है कुछ ऐसी सावधानियों के बारे में जिससे आप भी अपना क्‍लेम सही प्रकार पा सकते हैं।

जान लें आपके पास है कौन सा इंश्‍योरेंस

आपको इंश्‍योरेंस क्‍लेम मिलेगा कि नहीं यह आपकी पॉलिसी पर भी निर्भर करता है। सामान्‍यतया इंश्‍योरेंस दो प्रकार के होते हैं पहला कॉप्‍प्रिहेंसिव इंश्‍योरेंस और दूसरा थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस, वाहन पुराना होने पर थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस किया जाता है, यह कानूनन रूप से जरूरी है। लेकिन इसमें दुर्घटना होने पर गाड़ी की टूटफूट या चोरी होने पर कोई मुआवजा नहीं मिलता। कॉम्‍प्रिहेंसिव इंश्‍योरेंस में आपको प्‍लास्टिक, रबड़ पार्ट या एसेसरीज का भुगतान नहीं नहीं किया जाता है। कई पॉलिसियों में 100 फीसदी मुआवजा नहीं मिलता, इसके लिए आप जीरो डेब्‍ट इंश्‍योरेंस ले सकते हैं, ये कुछ महंगा पड़ता लेकिन आपको चिंतामुक्‍त भी रखता है।

दुर्घटना होने के बाद बीमा कंपनी को सूचित करें

कई बार लोग सड़क दुर्घटना में अपने वाहन को ठीक कराने के बाद बीमा कंपनी से खर्चे की मांग करते हैं। जबकि खर्च करने से पहले कंपनी को सूचित करना चाहिए। कंपनी आपकी सूचना मिलते ही कंपनी सर्वेयर की मदद से नुकसान की जांच करती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कंपनी पॉलिसी के तहत एक निश्चित अमाउंट की मंजूरी देती है।

फ्यूल किट होने पर कंपनी कर सकती है मना

अपनी गाड़ी में फ्यूल किट लगवाने से पहले जरूरी है कि बीमा कंपनी से अनुमति ली जाए। अक्सर लोग बढ़ते पैट्रोल और डीजल की कीमतों से परेशान होकर वैकल्पिक फ्यूल किट लगवा लेते हैं। ऐसे में कंपनी उन दावों को मंजूरी नहीं देती जिन्होंने बिना अनुमति के सीएनजी या एलपीजी किट लगावाया होता है।

प्राइवेट वाहनों का व्यवसायिक इस्तेमाल करना-

प्राइवेट और व्‍यवसायिक वाहनों का अलग अलग बीमा होता है। यदि आप अपने प्राइवेट वाहन को व्यवसायिक रूप से इस्तेमाल करते हैं। और इसी दौरान आपके वाहन की दुर्घटना हो जाती है तो बीमा कंपनी बीमा के दावे को नकार सकती है।

जरूरत से ज्यादा लोगों को बैठाना

हर वाहन की भार वहन क्षमता अलग अलग होती है। अगर आप अपनी गाड़ी या किसी अन्य वाहन में क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाते हैं। और इस अवस्‍था में दुर्घटना हो जाती है तो बीमा कंपनी दावे को स्वीकार नहीं करती हैं।

नशे में गाड़ी चलाना

बीमा के दावे निरस्‍त होने के पीछे सबसे अहम कारण नशे में गाड़ी चलाना भी है। अगर आपका नशे में गाड़ी चलाने के दौरान एक्सिडेंट हो जाता है और मेडिकल जांच में भी इस बात की पुष्टि हो जाती है। तो इस स्थिति में बीमा कंपनी दावे को स्वीकारती नहीं है।

गलत जानकारी देने पर

कई बार गाड़ी चालक को लगता है कि उसके वाहन को इंश्‍योरेंस कवर मिला हुआ है। लेकिन बीमा कंपनी उसी स्थिति में आपको बीमा कवर देती है, जब आपने बीमा कंपनी को अपने और वाहन के बारे में सही जानकारी उपलब्‍ध कराई है। इसके अलावा बीमा कंपनी को दुर्घटना या फिर चोरी होने की स्थिति में भी आप पर यदि शक होता है तो इस स्थिति में भी बीमा का दावा नहीं मिल सकता।

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