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इन 5 वजहों से आपको नियमित तौर पर चेक करना चाहिए अपना क्रेडिट स्कोर, कर्ज लेने में नहीं होगी दिक्‍कत

यहां वे पांच कारण बताए जा रहे हैं जिनके लिए आपको अपनी क्रेडिट हेल्‍थ की नियमित पड़ताल करते रहना चाहिए।

Edited by: India TV Paisa Desk [Updated:02 Sep 2018, 3:32 PM IST]
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नई दिल्‍ली। भारतीय अपने शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति अब पहले से ज्यादा जागरूक रहने लगे हैं। आज आप देख सकते हैं कि पहले के मुकाबले ज्यादा संख्या में लोग सुबह सैर, योग व कसरत के लिए निकलने लगे हैं और यहां तक की बीमा उद्योग के आंकड़े भी दर्शा रहे हैं कि अब ज्यादा संख्या में लोग सेहत की सुरक्षा के लिए बीमा पॉलिसी लेने लगे हैं। लेकिन एक और ‘हेल्थ कंडीशन’ है जिस पर देशवासियों का ध्यान नहीं गया है और उसे कहते हैं ‘क्रेडिट हैल्थ’ यानी वह संकेत जो वित्तीय संस्थानों को यह बताए कि फलां व्यक्ति कर्ज चुकाने योग्य है इसलिए यदि वह कर्ज मांगता है तो उसे कर्ज मुहैया कराया जाए।

क्रेडिट हेल्थ को तीन अंकों से जाहिर किया जाता है और उन अंकों को क्रेडिट स्कोर कहते हैं। यह स्कोर विभिन्न कारकों का परिणाम है, उन कारकों का स्वभाव गतिशील होता है और वक्त के साथ वे बदलते रहते हैं। इसीलिए यह अहम हो जाता है कि उन पर निगाह रखी जाए। यहां वे पांच कारण बताए जा रहे हैं जिनके लिए आपको अपनी क्रेडिट हेल्‍थ की नियमित पड़ताल करते रहना चाहिए।

अपने क्रेडिट प्रोफाइल की नियमित रूप से करें जांच

आपकी क्रेडिट हेल्‍थ उतनी ही अहम है जितनी आपकी शारीरिक सेहत - ये बात बिल्कुल सही है। हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहां कर्ज का उपलब्धता बेहद अहम है। ऋण और अन्य क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स तक पहुंच होने से हमें अपने वित्तीय उद्देश्यों को हासिल करने में मदद मिलती है चाहे वे दीर्घकालिक हों या अल्पकालिक। और चूंकि ऋण की उपलब्धता क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करती है इसलिए समझदारी इसी में है कि इस पर निगाह रखी जाए। अच्छी खबर यह है कि आज चारों ब्यूरो को अनिवार्य रूप से प्रति वर्ष एक क्रेडिट रिपोर्ट निशुल्क देनी होती है। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के आदेश का लाभ अवश्य प्राप्त करना चाहिए और क्रैडिट प्रोफाइल की समीक्षा हेतु इस रिपोर्ट को हासिल करना चाहिए।

ब्यूरो रिपोर्ट पर आंकड़ों की सटीकता

क्रेडिट सुधार द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक चार रिपोर्ट्स में से एक में त्रुटि पाई गई है। गलत आंकड़े की वजहें बहुत सी हो सकती हैं जिनमें व्यक्तिगत विवरण के गलत होने से लेकर कोई ट्रेड लाइन हो सकती है जो आपकी क्रैडिट रिपोर्ट से ताल्लुक नहीं रखती। फिर कुछ अन्य मुद्दे भी होते हैं जैसे पुनःभुगतान की सूचना अपडेट न होना या किसी लोन स्टेटस ठीक से कैप्चर नहीं किया जाना। ये त्रुटियां आपके क्रेडिट स्कोर पर विपरीत असर डाल सकती हैं, नतीजतन जरूरत पड़ने पर पैसे के लिए यहां-वहां दौड़-भाग करनी पड़ेगी, खास कर संकट की स्थिति में बहुत परेशानी होगी।

पहचान चोरी से सुरक्षा

हम भारतीयों को इसकी जानकारी नहीं है लेकिन यह एक तथ्य है कि हम सभी पर पहचान चोरी होने का खतरा है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें कोई धोखेबाज़ हमारे ब्यौरे का इस्तेमाल कर के ऋण व अन्य वित्तीय इंस्ट्रूमेंट तक पहुंच हासिल कर लेता है। हो सकता है कि आप सोचें कि आप इस के शिकार नहीं होंगे लेकिन आपकी यह धारणा यह जान कर बदल जाएगी की राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक एक मिनट के हर सेकेंड में भारत में एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार बनता है। नए युग का यह अपराध बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए हमारे लिए यह बहुत अहम हो जाता है कि हम उन आंकड़ों पर निगाह रखें जो हमारी ब्यूरो रिपोर्ट में दिखाई देते हैं। रिपोर्ट को नियमित रूप से जांचना ही एकमात्र तरीका है ताकि अगर हमें किसी ऐसे मसले से दोचार होना पड़े तो इससे हमें वक्त पर कार्यवाही करने में मदद मिलेगी।

धन की बचत

यदि उपरोक्त कारण आपको प्रेरित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं तो कृपया नोट करें कि अपने क्रेडिट स्कोर को नियमित रूप से चैक करने से आपको अपने धन की बचत करने में मदद मिलेगी। नियमित जांच से आप जान पाएंगे कि वर्तमान में आप किस स्थिति पर हैं और अगर आपको अपना क्रैडिट स्कोर ऊपर ले जाने की जरूरत है तो क्या कार्यवाही करनी होगी। किसी भी अन्य कारोबारी की तरह कर्ज़दाता संस्थान भी अच्छे ग्राहकों को सेवाएं देना चाहते हैं।

इसलिए उनके नजरिए से उच्च स्कोर वाला कर्जदार अच्छा ग्राहक होता है क्योंकि भविष्य में उसके द्वारा चूक करने की संभावना कम होती है। वे चाहेंगे की आपको एक प्रतिस्पर्धी ब्याज दर पर कर्ज़ दिया जाए और हो सकता है कि शुल्कों व फीस पर भी वे आपको डिस्काउंट दें। यदि 20 वर्ष की अवधि वाले 1 करोड़ के रुपए के कर्ज पर 1 प्रतिशत की छूट मिले तो कुल बचत 15 लाख रुपए की होगी।

कर्ज के आवेदन पर मनाही नहीं होगी

कर्ज के आवेदन को नकार दिया जाए तो व्यक्ति तनाव में आ जाता है। यदि आप व्यापार हेतु धन जुटाने की कोशिश में हैं तो कर्ज की मनाही से तरक्की का मौका और पैसा बनाने की संभावना की हानि होगी। और मान लीजिए अगर किसी को किसी आपात स्थिति के लिए धन की जरूरत थी तब तो वह व्यक्ति सदमें में आ जाएगा। सेहतमंद क्रेडिट स्कोर होने से बैंकों में आपके ऋण आवेदन प्रक्रिया निर्बाध व तीव्र हो जाएगी और जरूरत के वक्त धन की उपलब्धता सुगम हो जाएगी।

अपने क्रेडिट स्कोर को नियमित रूप से जांचना एक सही काम है और अब तो इसे मुफ्त में बस कुछ क्लिक पर प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए यह आपके रूटीन का हिस्सा बनना चाहिए और आपको इसकी नियमित समीक्षा करनी चाहिए।

- लेखक अरुण रामामूर्ति क्रेडिट सुधार के सह-संस्‍थापक और निदेशक हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।

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