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ट्राई की वेबसाइट पर देखिए सभी टेलीकॉम कंपनियों के प्‍लान, आसानी से कीजिए तुलना और फिर करवाएं रीचार्ज

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी ट्राई (TRAI) ने मोबाइल उपभोक्‍ताओं के लिए एक नया पोर्टल लॉन्‍च किया है। अब कोई भी ग्राहक इस ट्राई की वेबसाइट पर जाकर विभिन्‍न टेलीकॉम कंपनियों के प्‍लान्‍स की तुलना कर सकते हैं।

Manish Mishra Manish Mishra
Updated on: April 17, 2018 13:50 IST
TRAI - India TV Paisa

TRAI unveils beta site for comparison of telcos’ tariffs

नई दिल्‍ली। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी ट्राई (TRAI) ने मोबाइल उपभोक्‍ताओं के लिए एक नया पोर्टल लॉन्‍च किया है। अब कोई भी ग्राहक इस ट्राई की वेबसाइट पर जाकर विभिन्‍न टेलीकॉम कंपनियों के प्‍लान्‍स की तुलना कर सकते हैं। आपको बता दें कि पहली बार सरकार की तरह से मोबाइ ग्राहकों को इस तरह का प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराया गया है। दरअसल, सरकार चाहती है कि टेलीकॉम कंपनियों के प्‍लान्‍स की पारदर्शिता बढ़े। यहां क्लिक कर आप TRAI की उस वेबसाइट पर जा सकते हैं।

ट्राई की इस वेबसाइट पर मिलेंगी ये सुविधाएं

ट्राई की इस वेबसाइट पर कोई भी ग्राहक बीटा वर्जन रेगुलर टैरिफ, स्पेशल टैरिफ वाउचर्स, प्रमोशनल टैरिफ्स और वैल्यू ऐडेड सर्विस (VAS) पैक्स सहित अन्‍य जानकारियां प्राप्‍त कर सकता है। आपको बता दें कि फिलहाल यह सुविधा केवल दिल्‍ली-एनसीआर के ग्राहकों के लिए उपलब्‍ध है। इसे आप बीटा वर्जन भी कह सकते हैं क्‍योंकि इस वेबसाइट के संदर्भ में ट्राई ने आम जनता और टेलीकॉम कंपनियों से फीडबैक लेगी। बाद में, इस वेबसाइट पर सभी सर्कलों के टैरिफ प्लान की जानकारी दी जाएगी।

ट्राई ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा है कि ट्राई एक्ट 1997 के अनुसार, पारदर्शिता ट्राई की अहम जिम्‍मेदारी है। अभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स अपनी वेबसाइट्स पर टैरिफ्स की जानकारी देती हैं। विभिन्न टैरिफ प्लांस और दूसरे टैरिफ इंस्ट्रूमेंट्स की जानकारी ट्राई की वेबसाइट पर दी गई है। इन्हें वहां से डाउनलोड किया जा सकता है। इस प्लेटफॉर्म से न केवल कंज्यूमर्स को फायदा होगा, बल्कि इससे दूसरे संबंधित पक्षों को भी तुलनात्मक अध्ययन करने में मदद मिलेगी।

ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों को इंडिविजुअल सब्सक्राइबर्स को प्राइसिंग पैकेज देने से रोक दिया था। कंपनियां सभी कस्टमर्स को ऐसे पैकेज नहीं दे रही थीं। ट्राई ने पिछले सालभर में दो अलग-अलग आदेशों के जरिए इन पर रोक लगाई थी। इनमें से एक प्रिडेटरी प्राइसिंग से जुड़ा था। यह आदेश 16 फरवरी को दिया गया था।

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