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LPG consumer: ले सकते हैं 40 लाख का क्लेम, खुद लाएंगे सिलेंडर तो एजेंसी देगी इतने रुपए समेत पढ़िए गैस कनेक्शन से जुड़े ये खास नियम

अगर कोई गैस एजेंसी आपको सिलेंडर की होम डिलिवरी नहीं देती और सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी गोडाउन जाना पड़े। तो ऐसे में आप उस गैस एजेंसी से एक तय राशि ले सकते हैं।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Updated on: May 25, 2019 18:47 IST
gas connection- India TV Paisa

gas connection

नई दिल्ली। लगभग हर घर में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। सरकार की उज्जवला योजना के अंतर्गत अधिकतर घरों में गैस कनेक्शन उपलब्ध हुए हैं। लेकिन, ज्यादातर एलपीजी उपभोक्ताओं (Lpg consumers) को गैस कनेक्शन से जुड़ा ये नियम नहीं पता होगा। अगर कोई गैस एजेंसी आपको सिलेंडर की होम डिलिवरी देने में कभी भी आनाकानी करती है और आपको सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी गोडाउन जाना पड़ेगा। कई बार ऐसा होता है जिस चीज का उपयोग हम लोग करते हैं उसके फायदे के बारे में हमें कम ही पता होता है। आज हम भारत के गैस उपभोक्ताओं को गैस कनेक्शन से संबंधित कई ऐसी जानकारी बता रहे हैं जो उपभोक्ताओं को पता ही नहीं होती हैं।

ये है नियम

दरअसल, आपके पास किसी भी गैस एजेंसी का कनेक्शन है और उसके गोडाउन से आप सिलेंडर खुद लाते हैं तो आप एजेंसी से 19 रुपए 50 पैसा वापस ले सकते हैं। कोई भी एजेंसी यह राशि देने से इनकार नहीं करेगी। बता दें कि, यह राशि बतौर डिलिवरी चार्ज आपसे ली जाती है। सभी कंपनियों के सिलिंडर के लिए यह राशि तय है। हालांकि, कुछ समय पहले ही इस राशि को बढ़ाया गया है। पहले डिलिवरी चार्ज 15 रुपए था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 19 रुपए 50 पैसा किया गया है।

मना करने पर यहां करें शिकायत

कोई भी एजेंसी संचालक आपको यह राशि देने से मना करता है तो आप टोल फ्री नंबर 18002333555 पर शिकायत कर सकते हैं। अभी ग्राहकों को सब्सिडी वाले 12 सिलिंडर दिए जाते हैं। यह कोटा पूरा होने के बाद मार्केट रेट पर सिलिंडर खरीदना होता है।

फ्री में चेंज होता है रेगुलेटर

अगर आपके सिलेंडर का रेगुलेटर खराब हो गया है तो आप इसे फ्री में एजेंसी से बदल सकते हैं। इसके लिए आपके पास एजेंसी का सब्सिक्रिप्शन वाउचर होना चाहिए। आपको लीक रेगुलेटर को अपने साथ लेकर एजेंसी जाना होगा। सब्सक्रिप्शन वाउचर व रेगुलेटर के नंबर को मिलाया जाएगा। दोनों का नंबर मैच होने पर रेगुलेटर बदल दिया जाएगा। इसके लिए आपको कोई शुल्क नहीं देना होगा।

डैमेज होने पर भी बदल जाता है रेगुलेटर

अगर आपका रेगुलेटर किसी कारण से डैमेज हो जाता है तो भी एजेंसी इसे बदलकर देगी। लेकिन, इसके लिए एजेंसी कंपनी टैरिफ के हिसाब से आप से राशि जमा करवाएगी। यह राशि 150 रुपए तक होती है।

चोरी होने पर मिलता है नया रेगुलेटर

अगर आपका रेगुलेटर चोरी हो जाए तो एजेंसी से नया रेगुलेटर चाहते हैं तो इसके लिए आपको पहले पुलिस में FIR दर्ज करवानी होगी। FIR रिपोर्ट की कॉपी जमा करने पर ही एजेंसी रेगुलेटर बदलकर देगी।

रेगुलेटर बताता है कितनी बची है गैस

रेगुलेटर खो जाए तो आप 250 रुपए की राशि जमा करके एजेंसी से अपना रेगुलेटर ले सकते हैं। ग्राहकों की सुविधा के लिए अब मल्टीफंक्शनल रेगुलेटर भी आ चुके हैं। इसमें रेगुलेटर यह बताता है कि आपकी टंकी में कितनी गैस बची है। रेगुलेटर की लाइफ टाइम वारंटी होती है लेकिन मैन्युफैक्चरिंग प्रॉब्लम होने पर ही रेगुलेटर फ्री में चेंज किया जाता है। अन्य में शुल्क वसूला जाता है।

हर LPG उपभोक्ता का होता है 50 लाख का इंश्योरेंस

आपको बता दें कि संबंधित कंपनी की तरफ से हर LPG उपभोक्ता का 50 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस होता है। इस इंश्योरेंस की दो स्थिति होती हैं। आपको यह भी बता दें कि इसके लिए किसी भी उपभोक्ता को कोई अतिरिक्त मासिक प्रीमियम नहीं भरना होता। यदि गैस सिलेंडर से कोई हादसा होता है तो पहली कंडीशन के तहत 40 लाख और दूसरी कंडीशन के तहत 50 लाख रुपए संबंधित एजेंसी को देने होते हैं।

40 लाख का क्लेम

LPG सिलेंडर से यदि आपके घर या प्रतिष्ठान में कोई हादसा होता है तो आप 40 लाख तक का इंश्योरेंस क्लेम कर सकते हैं। वहीं सिलिंडर फटने से यदि किसी व्यक्ति की मौत होती है तो 50 लाख रुपए तक का क्लेम किया जा सकता है। इस तरह के एक्सीडेंट में प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को 10 लाख रुपए तक की क्षतिपूर्ति राशि का नियम है।

कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं

ऊपर बताए गए इंश्योरेंस के लिए उपभोक्ता को कोई प्रीमियम नहीं भरना होता। जब आप कोई नया कनेक्शन लेते हैं तो यह इंश्योरेंस ऑटोमेटिक आपको मिल जाता है। कनेक्शन के समय ली जाने वाली धनराशि में यह इंश्योरेंस प्रीमियम निहित होता है। पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के वितरकों को यह बीमा करवाना होता है।

हादसा हो तो यह करें

यदि आपके साथ किसी तरह का कोई हादसा होता है तो सबसे पहले पुलिस और इंश्योरेंस कंपनी को जानकारी दें। कई बार पुलिस ऐसे मामलों की एफआईआर दर्ज नहीं करती, इसलिए जरूरी है कि आप एफआईआर कराएं और इंश्योरेंस की रकम का दावा करने के लिए एफआईआर की कॉपी सुरक्षित रखें। कोई घायल हुआ है तो उससे संबंधित बिल भी संभालकर रखें।

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