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  5. कायम है हैदराबाद के निजाम की ‘फायर इंजन’ और गोडसे की ‘किलर’ कार का जलवा, दिल्ली की सड़कों पर इन कारों ने भरा फर्राटा

कायम है हैदराबाद के निजाम की ‘फायर इंजन’ और गोडसे की ‘किलर’ कार का जलवा, दिल्ली की सड़कों पर इन कारों ने भरा फर्राटा

India TV Paisa Photo Desk [Updated: 11 Feb 2018, 6:36 PM IST]
  • आजादी से पहले देश में 500 से ज्यादा रजवाड़े थे जिनकी शानोशौकत के नजारे विरासती महलों-किलों के रूप में आज भी मौजूद हैं। केवल महल ही नहीं उस दौर की कारें भी उनकी विलासिता दिखाती थीं, जिन्हें अब ‘विंटेज कार’ कहा जाता है। सोचिए कितना अद्भुत होगा वह दृश्य जिसमें आप दिल्ली की सड़कों पर ऐसी ही करीब 70 कारों को दौड़ते देखें। हैदराबाद के निजाम की सौ साल से ज्यादा पुरानी कार ‘फायर इंजन’ और महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथुराम गोडसे द्वारा इस्तेमाल में लाई गई कार ‘किलर’ कार इनमें शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित स्टेट्समैन विंटेज एंड क्लासिक कार रैली के 52वें संस्करण में 68 विंटेज एवं क्लासिक कारों ने भाग लिया। हरे रंग की 1930 मॉडल की स्टूडबेकर कार भी लोगों के आकर्षण के केंद्र में रही। ‘किलर’ नाम से मशहूर इस कार का इस्तेमाल नाथुराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या के दौरान किया था। पहले यह कार मूलत: जौनपुर के महाराजा की थी। गांधी की हत्या के बाद दिल्ली पुलिस ने इसे जब्त कर लिया था। बाद में यह कई मालिकों के पास से होती हुई फिलहाल दिल्ली रहवासी कार शौकीन मुजीबरहमान के पास है।
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    आजादी से पहले देश में 500 से ज्यादा रजवाड़े थे जिनकी शानोशौकत के नजारे विरासती महलों-किलों के रूप में आज भी मौजूद हैं। केवल महल ही नहीं उस दौर की कारें भी उनकी विलासिता दिखाती थीं, जिन्हें अब ‘विंटेज कार’ कहा जाता है। सोचिए कितना अद्भुत होगा वह दृश्य जिसमें आप दिल्ली की सड़कों पर ऐसी ही करीब 70 कारों को दौड़ते देखें। हैदराबाद के निजाम की सौ साल से ज्यादा पुरानी कार ‘फायर इंजन’ और महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथुराम गोडसे द्वारा इस्तेमाल में लाई गई कार ‘किलर’ कार इनमें शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित स्टेट्समैन विंटेज एंड क्लासिक कार रैली के 52वें संस्करण में 68 विंटेज एवं क्लासिक कारों ने भाग लिया। हरे रंग की 1930 मॉडल की स्टूडबेकर कार भी लोगों के आकर्षण के केंद्र में रही। ‘किलर’ नाम से मशहूर इस कार का इस्तेमाल नाथुराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या के दौरान किया था। पहले यह कार मूलत: जौनपुर के महाराजा की थी। गांधी की हत्या के बाद दिल्ली पुलिस ने इसे जब्त कर लिया था। बाद में यह कई मालिकों के पास से होती हुई फिलहाल दिल्ली रहवासी कार शौकीन मुजीबरहमान के पास है।

  • हैदराबाद के निजाम की फायर इंजन ‘जॉन मॉरिस’ इस रैली में भाग लेने वाली सबसे पुरानी कार रही। जॉन मॉरिस एंड संस द्वारा निर्मित यह कार 1914 की है। ‘फायर इंजन’ को निजाम ने अग्निशमन दस्ते के लिए खरीदा था। यह निजाम स्टेट रेलवे के पास थी जो रेलवे के राष्ट्रीयकरण के बाद दक्षिण मध्य रेल के पास आ गई। इसे 1960 में सक्रिय सेवा से बाहर कर दिया गया। सन् 1975 में इसे दिल्ली के राष्ट्रीय रेल संग्रहालय को सौंप दिया गया जो अब कभी-कभी विंटेज कार रैलियों में हिस्सा लेने के लिए बाहर आती है। इस रैली में लगातार 20 साल से यह भाग ले रही है। दुनियाभर में इस तरह के दो ही वाहन मौजूद हैं। इसके अलावा दूसरा वाहन लंदन के संग्रहालय में है। यह विश्व का एकमात्र जॉन मॉरिस वाहन है जिसमें मूल श्र्यूजबरी और शैलिनर सॉलिड टायर है।
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    हैदराबाद के निजाम की फायर इंजन ‘जॉन मॉरिस’ इस रैली में भाग लेने वाली सबसे पुरानी कार रही। जॉन मॉरिस एंड संस द्वारा निर्मित यह कार 1914 की है। ‘फायर इंजन’ को निजाम ने अग्निशमन दस्ते के लिए खरीदा था। यह निजाम स्टेट रेलवे के पास थी जो रेलवे के राष्ट्रीयकरण के बाद दक्षिण मध्य रेल के पास आ गई। इसे 1960 में सक्रिय सेवा से बाहर कर दिया गया। सन् 1975 में इसे दिल्ली के राष्ट्रीय रेल संग्रहालय को सौंप दिया गया जो अब कभी-कभी विंटेज कार रैलियों में हिस्सा लेने के लिए बाहर आती है। इस रैली में लगातार 20 साल से यह भाग ले रही है। दुनियाभर में इस तरह के दो ही वाहन मौजूद हैं। इसके अलावा दूसरा वाहन लंदन के संग्रहालय में है। यह विश्व का एकमात्र जॉन मॉरिस वाहन है जिसमें मूल श्र्यूजबरी और शैलिनर सॉलिड टायर है।

  • करीब 350 विंटेज कारों के मालिक तथा 21 गन सैल्यूट हेरिटेज एंड कल्चर ट्रस्ट के चेयरमैन मदन मोहन भी इस रैली में हिस्सा ले रहे थे। वह 1938 की आर्मस्ट्रांग सिडली की सात सीटों वाली लिमोजिन चला रहे थे। यह कार मूलत कपूरथला के महाराजा की थी। इसमें सिंक्रोनाइज्ड गियर हैं। यह अपने समय की सबसे छोटी गियरबॉक्स वाली कार थी। इसके अलावा उनकी ही 1949 की ब्यूक रोडमास्टर ने भी इस रैली में हिस्सा लिया। मदन मोहन ने कहा कि विंटेज गाड़ियों को चलाना एक अलग अहसास देता है। इन वाहनों को देखकर जब लोगों की आंखें चमक उठती हैं तो वह बेमिसाल अनुभव होता है। हम विंटेज कारों की रैलियों के जरिए लोगों को उन कारों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक कर पाते हैं जिनका उत्पादन बंद किया जा चुका है।
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    करीब 350 विंटेज कारों के मालिक तथा 21 गन सैल्यूट हेरिटेज एंड कल्चर ट्रस्ट के चेयरमैन मदन मोहन भी इस रैली में हिस्सा ले रहे थे। वह 1938 की आर्मस्ट्रांग सिडली की सात सीटों वाली लिमोजिन चला रहे थे। यह कार मूलत कपूरथला के महाराजा की थी। इसमें सिंक्रोनाइज्ड गियर हैं। यह अपने समय की सबसे छोटी गियरबॉक्स वाली कार थी। इसके अलावा उनकी ही 1949 की ब्यूक रोडमास्टर ने भी इस रैली में हिस्सा लिया। मदन मोहन ने कहा कि विंटेज गाड़ियों को चलाना एक अलग अहसास देता है। इन वाहनों को देखकर जब लोगों की आंखें चमक उठती हैं तो वह बेमिसाल अनुभव होता है। हम विंटेज कारों की रैलियों के जरिए लोगों को उन कारों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक कर पाते हैं जिनका उत्पादन बंद किया जा चुका है।

  • मदन मोहन ने कहा कि विंटेज गाड़ियों को चलाना एक अलग अहसास देता है। इन वाहनों को देखकर जब लोगों की आंखें चमक उठती हैं तो वह बेमिसाल अनुभव होता है। हम विंटेज कारों की रैलियों के जरिए लोगों को उन कारों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक कर पाते हैं जिनका उत्पादन बंद किया जा चुका है।
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    मदन मोहन ने कहा कि विंटेज गाड़ियों को चलाना एक अलग अहसास देता है। इन वाहनों को देखकर जब लोगों की आंखें चमक उठती हैं तो वह बेमिसाल अनुभव होता है। हम विंटेज कारों की रैलियों के जरिए लोगों को उन कारों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक कर पाते हैं जिनका उत्पादन बंद किया जा चुका है।

  •  रैली में शामिल 1962 की स्टैंडर्ड हेराल्ड सबसे कम पुरानी कार रही। रैली में कुल 68 कारों ने हिस्सा लिया जिनमें से 65 कारें रैली को पूरा करने में सफल रहीं। इसमें करीब 20 विंटेज मोटरबाइकों ने भी रैली का आकर्षण बढ़ाया।
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    रैली में शामिल 1962 की स्टैंडर्ड हेराल्ड सबसे कम पुरानी कार रही। रैली में कुल 68 कारों ने हिस्सा लिया जिनमें से 65 कारें रैली को पूरा करने में सफल रहीं। इसमें करीब 20 विंटेज मोटरबाइकों ने भी रैली का आकर्षण बढ़ाया।

  • सबसे पुरानी मोटरबाइक दिलजीत साइकल्स की 1911 मॉडल की स्विफ्ट रही। इसके साथ ही 1914 मॉडल की ट्रायंफ और 1947 मॉडल की इंडियन चीफ ने भी लोगों को आकर्षित किया।
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    सबसे पुरानी मोटरबाइक दिलजीत साइकल्स की 1911 मॉडल की स्विफ्ट रही। इसके साथ ही 1914 मॉडल की ट्रायंफ और 1947 मॉडल की इंडियन चीफ ने भी लोगों को आकर्षित किया।

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