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Year Ender 2018: ई-कॉमर्स क्षेत्र में हुआ सबसे बड़ा सौदा, उद्योग जगत के चर्चित चेहरे देश छोड़कर भागे

2018 जहां एक ओर भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर में सबसे बड़े अधिग्रहण सौदे के तौर पर देखा जाएगा, वहीं उद्योग जगत के चर्चित चेहरों का देश छोड़कर भाग जाना भी याद दिलाएगा।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: December 28, 2018 19:45 IST
year 2018- India TV Paisa
Photo:YEAR 2018

year 2018

साल 2018 खत्‍म होने वाला है। इसे अब कुछ अच्‍छी और कुछ बुरी यादों के साथ याद रखा जाएगा। 2018 जहां एक ओर भारतीय ई-कॉमर्स सेक्‍टर में सबसे बड़े अधिग्रहण सौदे के तौर पर देखा जाएगा, वहीं उद्योग जगत के चर्चित चेहरों का देश छोड़कर भाग जाना भी याद दिलाएगा। इतना ही उद्योग जगत के लिए यह साल सरकार और आरबीआई के बीच एक ऐसी तनाव भरी कहानी के लिए भी याद रहेगा, जिसका सस्‍पेंश गवर्नर उर्जित पटेल के इस्‍तीफे के रूप में सामने आया।   

बड़े सौदों के लिए किया जाएगा याद

अमेरिका की सबसे बड़ी खुदरा कंपनी वॉलमार्ट ने मई 2018 में भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण कर इस क्षेत्र में प्रवेश किया। वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी  16 अरब डॉलर (करीब 1.05 लाख करोड़ रुपए) में खरीदी है। अनुमान के मुताबिक अगले 10 सालों में ई-कॉमर्स बाजार का आकार बढ़कर 200 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। वॉलमार्ट का सीधा मुकाबला अब अमेरिका की ही कंपनी अमेजन से होगा। हिंदुस्तान यूनिलीवर का ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन (जीएसके) के साथ विलय भी इसी साल हुआ।

उद्योग जगत के चर्चित चेहरे बन ग'ठग'

कहावत है कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है। भारतीय उद्योग जगत में नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, नितिन एवं चेतन संदेसरा जैसे कुछ व्यापारियों ने इस कहावत को सच साबित कर दिया। उनकी कारगुजारियों ने 2018 में पूरे भारतीय उद्योग जगत के सामने प्रश्न चिह्न खड़ा किया। साल 2018 देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी के साथ शुरू हुआ। हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके पंजाब नेशनल बैंक के साथ 14,000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी की। अभी ये दोनों देश से फरार हैं। गुजरात की दवा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक समूह के प्रवर्तक नितिन और चेतन संदेसरा का नाम भी सामने आया। ये दोनों 5,000 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी और धन-शोधन अक्षमता मामले में आरोपी हैं। फिलहाल दोनों देश से फरार है। 

विजय माल्‍या के प्रत्‍यर्पण को मिली मंजूरी

इसी साल लंदन की एक अदालत ने शराब कारोबारी विजय माल्‍या के प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है। हालांकि माल्या अभी इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं। आने वाले साल में देखना होगा कि कितने कॉर्पोरेट दिग्गज भगोड़ा घोषित होते हैं और क्या कानून का सामना करने के लिए वास्तव में उन्हें भारत लाया जा पाएगा।

फोर्टिस के सिंह बंधुओं में हुई मारपीट

2018 में फोर्टिस और रेनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तक सिंह बंधु भी खूब सुर्खियों में रहे। दोनों भाइयों के बीच मतभेद अब मारपीट तक पहुंच गया। दोनों ने एक-दूसरे पर मारपीट और कारोबार को डुबाने का आरोप लगाया है। 

आरबीआई गवर्नर को देना पड़ा इस्‍तीफा

इस साल का सबसे बड़ा इस्तीफा खुद आरबीआई गवर्नर ऊर्जित पटेल का रहा। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए 10 दिसंबर को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक रहीं चंदा कोचर के खिलाफ शिकायत सामने आई। कोचर पर वीडियोकॉन समूह को दिए गए कर्ज में एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने तथा हितों के टकराव के आरोप लगे। अक्टूबर में चंदा कोचर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, इस मामले में आंतरिक और नियामकीय जांच अभी चल रही है। एक्सिस बैंक की प्रबंध निदेशक पद पर आरबीआई से कार्यकाल विस्‍तार को मंजूरी न मिलने के कारण शिखा शर्मा को अपना पद छोड़ना पड़ा। यस बैंक के साथ भी ऐसा ही हुआ, आरबीआई ने बैंक के सीईओ राणा कपूर का कार्यकाल घटाकर 31 जनवरी, 2019 कर दिया।

जीएसटी की दरों में हुई कटौती 

भारत में जीएसटी को जुलाई 2017 में लागू किया गया था। वर्ष 2018 के मध्य तक देश में कर संग्रह में भी वृद्धि देखने को मिली। वर्ष भर कर की दरों को तार्किक बनाए जाने पर भी काम चलता रहा। पिछले सप्ताह ही 28 प्रतिशत के शीर्ष कर दायरे से करीब दो दर्जन वस्तुओं को अपेक्षाकृत कम करों वाले स्लैब में लाया गया। जीएसटी की मासिक वसूली अप्रैल-नवंबर 2018 के दौरान औसतन 97,100 करोड़ रुपए रही। पिछले वित्त वर्ष में मासिक वसूली का औसत 89,100 करोड़ रुपए था।

विलय एवं अधिग्रहण ने पार किया 100 अरब डॉलर का आंकड़ा

भारतीय उद्योग जगत के लिए साल 2018 अधिग्रहण एवं विलय के हिसाब से बेहद शानदार रहा। पूरे साल के दौरान घरेलू उद्योग जगत में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर से अधिक के सौदों की घोषणा की गई। साल के दौरान विलय एवं अधिग्रहण सौदों में ई-कॉमर्स 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी रहा।

एनसीएलटी से 80,000 करोड़ की हुई वसूली

कर्ज वसूलने का जिम्मा संभाल रहे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता प्रक्रिया से 2018 में 80,000 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली करने में मदद की। कॉर्पोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने बताया कि 2018 में आईबीसी के तहत एनसीएलटी और एनसीएलएटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण) के माध्यम से विभिन्न कॉर्पोरेट कर्जदारों से 80,000 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की गई है। अनुमान के मुताबिक, आईबीसी ने दिसंबर 2016 में प्रभावी होने के बाद से करीब 3 लाख करोड़ रुपए की फंसी संपत्तियों का समाधान करने में मदद की है।

161 आईपीओ आए

देश के शेयर बाजारों में 2018 में 161 प्रारम्भिक  सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये 5.52 अरब डॉलर (करीब 38,640 करोड़ रुपए) जुटाए गए। आईपीओ संख्या के लिहाज से भारतीय शेयर बाजार दुनियाभर में दूसरे स्थान पर रहे। आईपीओ लाने के मामले में निर्माण तथा इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनियां सबसे आगे रहीं, वहीं निर्गम से जुटाई गई राशि के मामले में वित्तीय सेवा क्षेत्र सबसे आगे रहा।

रीयल एस्टेट की सुधरी हालत

जमीन जायदाद क्षेत्र में साल 2018 में सुधार का संकेत दिखा और किफायती फ्लैटों की मांग और कीमतों के स्थिर रहने से सभी प्रमुख शहरों में मकानों की बिक्री में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। नोटबंदी, जीएसटी और सख्त नियमों (रेरा कानून) की तिहरी मार के बाद भी रीयल एस्टेट में आया सुधार काफी मायने रखता है। किफायती घर रीयल एस्टेट के लिये मूलमंत्र बन गया है, इसने 2017 में निम्नतम स्तर पर पहुंच चुके रीयल एस्टेट क्षेत्र को धीरे-धीरे सुधरने में मदद की।

म्‍यूचुअल फंडों में जमकर हुआ निवेश

खुदरा निवेशकों को म्‍यूचुअल फंड में निवेश बहुत रास आ रहा है। 2018 के दौरान म्‍यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री के एयूएम में 3 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। म्यूचुअल फंड उद्योग की प्रबंधन के तहत परिसंपत्ति (एयूएम) नवंबर 2018 अंत तक 13 प्रतिशत बढ़कर 24 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई थी। दिसंबर 2017 के अंत में एयूएम 21.26 लाख करोड़ रुपए थी। साल के दौरान निवेशकों की संख्या में भी 1.3 करोड़ से अधिक की वृद्धि हुई।

समस्‍याओं के भंवर में रहा स्‍टील उद्योग

स्‍टील उद्योग के लिए साल 2018 उथल-पुथल भरा रहा। इस क्षेत्र में वित्तीय संकट की स्थिति और बिगड़ने से कर्ज अदा नहीं कर पाने के मामले सामने आए और कुछ कंपनियां दिवालिया भी हुईं। सरकार ने मार्च, 2018 के अंत तक सालाना 13.8 करोड़ टन कच्चा इस्पात उत्पादन को बढ़ाकर 2030 तक 30 करोड़ टन करने का लक्ष्य तय किया है। प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत के लिए भी 2030 तक 160 किलोग्राम का लक्ष्य रखा गया है। 

 

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