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G-20 समिट के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, अमेरिकी कंपनियां हुआवेई को बेच सकती हैं प्रौद्योगिकी

चीनी कंपनी हुआवेई को बड़ी राहत प्रदान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी कंपनियां चीन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी (हुआवेई) को प्रौद्योगिकी बेचना शुरू कर सकती हैं।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Published on: June 30, 2019 11:15 IST
Trump says U S companies allowed to sell products to Huawei - India TV Paisa
Photo:TWITTER

Trump says U S companies allowed to sell products to Huawei 

ओसाका। चीनी कंपनी हुआवेई को बड़ी राहत प्रदान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी कंपनियां चीन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी (हुआवेई) को प्रौद्योगिकी बेचना शुरू कर सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी की यह बिक्री ऐसे उपकरण के लिए न हो जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो। 

अमेरिकी प्रतिबंध के कारण हुआवेई को दो साल में तकरीबन 30 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। ​साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि वाणिज्य विभाग की कंपनियों की सूची से हुआवेई को हटाने पर फैसला बाद में लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर अगले सप्ताह बैठक करेंगे। 

ट्रंप ने ओसाका में जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि हम हुआवेई पर फैसला आखिर के लिए छोड़ रहे हैं। हम देख रहे हैं कि व्यापार करार में क्या होता है। उन्होंने कहा कि हुआवेई पर पूर्ण प्रतिबंध हटाने का फैसला व्यापार युद्ध समाप्त करने की दिशा में करार पर निर्भर करेगा। 

प्रेसवार्ता में कथिततौर पर ट्रंप ने कहा कि चीन और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हो सकते हैं। इससे पहले ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन के मौके पर व्यापार वार्ता दोबारा शुरू करने पर सहमति जताई। साथ ही, ट्रंप ने चीनी वस्तुओं पर आगे अमेरिका द्वारा नया शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया। 

ट्रंप और जिनपिंग के बीच बनी सहमति के अनुसार, चीन से आयातित 300 अरब मूल्य की वस्तुओं पर अमेरिका फिलवक्त नया शुल्क नहीं लगाएगा। ट्रंप ने 15 मई को हुआवेई को राष्ट्रीय सुरक्षा आदेश के जरिए काली सूची में डाल दी थी। अमेरिका ने सार्वजनिक तौर पर अपने सहयोगी देशों से सुरक्षा को लेकर हुआवेई के उत्पाद का इस्तेमाल से बचने को कहा था। अमेरिका ने चिंता जाहिर की थी कि कंपनी के उपकरण का इस्तेमाल चीन की सरकार निजी सूचना प्राप्त करने के लिए कर सकती है। 

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