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BofAML ने मोदी सरकार को दी खुशखबरी, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नीचे आएगी खुदरा महंगाई दर

वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों मसलन बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच (BofAML), डॉयचे बैंक और यूबीएस के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में और अभी होने वाली वृद्धि तुलनात्मक आधार के विपरीत प्रभाव की वजह से होगी। यह प्रभाव खत्म हो ही यह यह नीचे आएगी।

Edited by: Manish Mishra [Published on:17 Jun 2018, 2:37 PM IST]
CPI Inlation- India TV Paisa

CPI Inlation

नई दिल्ली खुदरा महंगाई दर अभी कुछ और बढ़ेगी, लेकिन 2018-19 की दूसरी (अक्‍टूबर-मार्च) छमाही में यह रिजर्व बैंक के अनुमानों से भी नीचे आएगी। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है। वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों मसलन बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच (BofAML), डॉयचे बैंक और यूबीएस के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में और अभी होने वाली वृद्धि तुलनात्मक आधार के विपरीत प्रभाव की वजह से होगी। यह प्रभाव खत्म हो ही यह यह नीचे आएगी।

BofAML ने एक शोध नोट में कहा कि आधार प्रभाव का असर हटने के बाद दूसरी छमाही में यह घटकर 4.2 प्रतिशत पर आ जाएगी। रिजर्व बैंक ने इसके 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

वहीं डॉयचे बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर 5.1 से 5.3 प्रतिशत रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार प्रभाव प्रतिकूल रहने पर जून में यह ऊंची रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकारात्मक आधार प्रभाव समाप्त होने के बाद महंगाई धीरे-धीरे नीचे आएगी। दिसंबर तक यह चार प्रतिशत पर आ जाएगी और उसके बाद मार्च, 2019 के अंत तक यह 4.5 से 4.6 प्रतिशत पर होगी।

स्विस ब्रोकरेज यूबीएस के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 2018-19 में औसतन पांच प्रतिशत रहेगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मई में खुदरा महंगाई दर चार महीने के उच्चस्तर 4.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक खुदरा महंगाई दर के आधार पर ही ब्याज दरों पर फैसला करता है।

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