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RBI vs Gov: इन 18 व्‍यक्तियों पर टिकी हैं निगाहें, 19 नवंबर को होने वाली बैठक होगी हंगामेदार

भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के बीच जारी अप्रत्याशित खींचतान के बीच लोगों की निगाहें केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल के 18 सदस्यों के ऊपर टिकी हुई हैं।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: November 11, 2018 18:08 IST
RBI- India TV Paisa
Photo:RBI

RBI

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के बीच जारी अप्रत्याशित खींचतान के बीच लोगों की निगाहें केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल के 18 सदस्यों के ऊपर टिकी हुई हैं। रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की 19 नवंबर को बैठक होने वाली है, जिसमें आगे की दिशा तय होगी। निदेशक मंडल के सदस्यों में न केवल रिजर्व बैंक के शीर्ष अधिकारी और सरकारी अधिकारी शामिल हैं बल्कि इनमें अग्रणी उद्यमी, अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

सदस्यों में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और चार अन्य डिप्टी गवर्नर पूर्णकालिक आधिकारिक निदेशक हैं। इनके अलावा अन्य शेष 13 सदस्य सरकार द्वारा नामित हैं। सरकार द्वारा नामित सदस्यों में वित्त मंत्रालय के दो अधिकारी आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार शामिल हैं। सरकार द्वारा नामित अंशकालिक गैर-आधिकारिक निदेशकों में स्वदेशी विचारक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति और सहकारी बैंक के अधिकारी सतीश मराठे भी शामिल हैं। 

पटेल के अलावा आधिकारिक निदेशकों में एन.एस.विश्वनाथन, विरल आचार्य, बी.पी.कानुनगो और एम.के.जैन हैं। इनमें से विश्वनाथन और आचार्य रिजर्व बैंक की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को लेकर सरकार की सार्वजनिक तौर पर अप्रत्यक्ष आलोचना कर चुके हैं। पटेल जनवरी 2013 से डिप्टी गवर्नर पद पर रहने के बाद सितंबर 2016 में गवर्नर बनाए गए थे।  

उद्योग जगत के प्रतिनिधि सदस्यों में टाटा समूह के प्रमुख नटराजन चंद्रशेखरन, महिंद्रा समूह के पूर्व वरिष्ठ भरत नरोत्तम दोषी, टीमलीज सर्विसेज के सह-संस्थापक मनीष सभरवाल और सन फार्मा के प्रमुख दिलीप संघवी शामिल हैं। अन्य सदस्यों में पूर्व आईएएस अधिकारी एवं गुजरात सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सुधीर मांकड़, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, पूर्व आईएएस अधिकारी एवं अर्थशास्त्री प्रसन्न मोहंती, रिसर्च एंड इंफोर्मेशन सिस्टम फोर डेवलपिंग कंट्रीज के सचिन चर्तुवेदी और पूर्व डिप्टी कैग रेवती अय्यर शामिल हैं।

19 नवंबर की बैठक रह सकती है हंगामेदार

19 नवंबर को केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल की होने जा रही बैठक के हंगामेदार होने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार कुछ सदस्य बैठक में पूंजी रूपरेखा ढांचे, अधिशेष का प्रबंधन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) के लिये तरलता आदि से जुड़े मुद्दे उठा सकते हैं। 

वित्त मंत्रालय द्वारा रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा सात के तहत चर्चा शुरू करने के बाद रिजर्व बैंक और सरकार के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस धारा का इस्तेमाल आज तक कभी नहीं किया गया है। इस धारा के तहत सरकार को इस बात का विशेषाधिकार मिलता है कि वह किसी मुद्दे पर रिजर्व बैंक के गवर्नर को निर्देश दे सके। 

सूत्रों के अनुसार, निदेशक मंडल की बैठक पूर्वनिर्धारित होती है तथा बैठक का एजेंडा भी काफी पहले तय कर लिया जाता है। हालांकि, निदेशक मंडल के सदस्य तय एजेंडे से इतर वाले मुद्दे भी उठा सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार के नामित निदेशक तथा कुछ स्वतंत्र निदेशक रिजर्व बैंक के पूंजी ढांचे तथा अंतरिम लाभांश के मुद्दे उठा सकते हैं। 

हालांकि, रिजर्व बैंक की पूंजी रूपरेखा ढांचे में कोई भी बदलाव तभी संभव हो सकेगा जब रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 में संशोधन किया जाए। इसके अलावा अन्य संभावित मुद्दों में पूंजी पर्याप्तता नियमों को विकसित देशों के समतुल्य किया जाना तथा बैंकों की त्वरित सुधारात्मक कारवाई रूपरेखा (पीसीए) में कुछ ढील देना भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार एमएसएमई और एनबीएफसी को कर्ज वितरण बढ़ाने के उपायों के बारे में चर्चा हो सकती है। 

माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक पूंजी पर्याप्तता नियमों के मामले में पुराने और कड़े नियमों का पालन कर रहा है। ये नियम विकसित देशों के मुकाबले अधिक सख्त रखे गए हैं। परिणामस्वरूप बैंक दिए गए कर्ज के समक्ष ज्यादा जोखिम पूंजी कोष रख रहे हैं। सरकार का मानना है कि यदि रिजर्व बैंक नियमों को वैश्विक नियमों के अनुरूप रखते हैं तो बैंकों में ज्यादा पूंजी उपलब्ध होगी और उत्पादक क्षेत्रों को अधिक कर्ज दिया जा सकेगा। 

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