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RBI के निर्देश से आपका होगा फायदा, 1 अक्टूबर से सभी लोन पर ब्याज को रेपो दर से जोड़ें बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक इस बात को लेकर काफी नाराज है कि बैंक रेपो रेट में काफी कटौती किए जाने के बाद भी ब्याज दर कम नहीं कर रहे हैं। रिजर्व बैंक 2019 में चार बार रेपो रेट में कुल मिलाकर 1.10 प्रतिशत की कटौती कर चुका है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Published on: September 05, 2019 6:47 IST
reserve bank of india- India TV Paisa

reserve bank of india

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों से कहा है कि वह एक अक्टूबर से आवास, वाहन और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को फ्लोटिंग दर पर दिये जाने वाले सभी नये कर्जों को रेपो दर जैसे बाहरी मानकों से जोड़ने का निर्देश दिया है। बैंकों को इन ऋणों की ब्याज दर को रेपो दर जैसे बाहरी मानकों से एक अक्टूबर से जोड़ने को कहा गया है। इससे नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का लाभ कर्ज लेने वाले उपभोक्ताओं तक अपेक्षाकृत तेजी से पहुंचने की उम्मीद है।

उद्योग और खुदरा कर्ज लेने वाले लगातार यह शिकायत करते रहे हैं कि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कटौती के बावजूद उसका पूरा लाभ बैंक उपभोक्ताओं को नहीं दे रहे हैं। रिजर्व बैंक ने बुधवार को बयान में कहा कि ऐसा देखने को मिला है कि बैंकों की मौजूदा सीमान्त लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) व्यवस्था में रिजर्व बैंक की नीतिगत दरों में बदलाव का लाभ बैंकों की ऋण दर तक पहुंचाने का काम संतोषजनक नहीं रहा है। इसी के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने बुधवार को सर्कुलर जारी कर बैंकों के लिए सभी नए फ्लोटिंग दर वाले व्यक्तिगत या खुदरा ऋण और एमएसएमई को फ्लोटिंग दर वाले कर्ज को 1 अक्टूबर, 2019 से बाहरी मानक से जोड़ने को अनिवार्य कर दिया है। 

रिजर्व बैंक इस बात को लेकर काफी नाराज है कि बैंक रेपो रेट में काफी कटौती किए जाने के बाद भी ब्याज दर कम नहीं कर रहे हैं। रिजर्व बैंक 2019 में चार बार रेपो रेट में कुल मिलाकर 1.10 प्रतिशत की कटौती कर चुका है, लेकिन बैंकों द्वारा इसमें से सिर्फ 0.40 प्रतिशत का ही लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया है।  इस वित्त वर्ष में अप्रैल के बाद से अब तक केंद्रीय बैंक 0.85 प्रतिाश्त तक की कटौती कर चुका है। बैंकों को जिन बाहरी मानकों से अपने ऋण की ब्याज दरों को जोड़ना होगा उनमें रेपो, तीन या छह महीने के ट्रेजरी बिल पर प्रतिफल या फाइनेंशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लि. (एफबीआईएल) द्वारा प्रकाशित कोई अन्य मानक हो सकता है। हालांकि बैंकों का कहना है कि उसकी देनदारियों की लागत कम होने में समय लगता है जिसकी वजह से रिजर्व बैंक की कटौती का लाभ तुरंत ग्राहकों को देने में समय लगता है। 

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बाहरी मानक आधारित ब्याज दर को तीन महीने में कम से कम एक बार नए सिरे से तय किया जाना जरूरी होगा। भारतीय स्टेट बैंक अपने कुछ ऋणों को रेपो से जोड़ने वाला पहला बैंक है। बाद में कई और बैंकों ने भी अपने ऋण को रेपो या किसी अन्य बाहरी मानक से जोड़ा है। अगस्त, 2017 में रिजर्व बैंक ने एमसीएलआर प्रणाली की समीक्षा को आंतरिक अध्ययन समूह (आईएसजी) का गठन किया था। आईएसजी ने ऋणों को बाहरी मानक से जोड़ने की सिफारिश की थी। 

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