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अनिल अंबानी ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिख बताई राफेल डील की पूरी कहानी, कहा प्रतिस्‍पर्धी कॉरपोरेट कर रहे हैं कांग्रेस को गुमराह Read In English

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राफेल डील को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब देते हुए रिलायंस धीरूभाई अंबानी ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने एक चिट्ठी लिखी है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: August 20, 2018 20:06 IST
anil ambani- India TV Paisa
Photo:ANIL AMBANI

anil ambani

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राफेल डील को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब देते हुए रिलायंस धीरूभाई अंबानी ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में राहुल को संबोधित करते हुए अनिल ने लिखा है कि कुछ कॉर्पोरेट प्रतिद्वंदियों ने इस मुद्दे पर अपने दुर्भावनापूर्ण निहित स्वार्थों के चलते कांग्रेस को गुमराह किया है और उसे इस डील के बारे में गलत जानकारी दी है। अनिल अंबानी ने फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक और पत्र लिख कर कहा है कि उनके प्रति दुर्भावना रखने वाले कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्वियों द्वारा इस सौदे पर कांग्रेस पार्टी को गलत, भ्रामक और भटकाने वाली जानकारी दी जा रही है।  

अंबानी ने इससे पहले दिसंबर में इस मुद्दे पर गांधी को पहली बार पत्र लिखा था। समूह की ओर से आज जारी एक बयान के अनुसार अंबानी ने ताजा पत्र में कहा है कि भारत जो 36 राफेल जेट विमान फ्रांस से खरीद रहा है उन विमानों के एक रुपए  मूल्य के एक भी कलपुर्जे का विनिर्माण उनके समूह द्वारा नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रहे हैं। गांधी का कहना है कि मौजूदा सरकार राफेल विमानों के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में तय कीमत से कहीं अधिक मूल्य चुका रही हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार ने इस सौदे में बदलाव सिर्फ एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए किया है। 

करोड़ों का फायदा मात्र एक कोरी कल्‍पना

कंपनी ने अंबानी के पत्र के हवाले से कहा है कि रिलायंस को इस सौदे से जो हजारों करोड़ रुपए का फायदा होने की बात की जा रही है वह कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा प्रचारित कोरी कल्पना मात्र है। उन्होंने लिखा है कि सीधे शब्दों में कहें तो भारत सरकार के साथ कोई अनुबंध है ही नहीं। पत्र में कहा गया है कि लड़ाकू जेट की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने रिलायंस समूह से करार अनुबंध के तहत अपनी ऑफसेट अनिवार्यता को पूरा करने के लिए किया है। रक्षा ऑफसेट के तहत विदेशी आपूर्तिकर्ता को उत्पाद के एक निश्चित प्रतिशत का विनिर्माण खरीद करने वाले देश में करना होता है। कई बार यह कार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिये किया जाता है। 

अनिल अंबानी है राहुल गांधी से नाराज

बयान के अनुसार अनिल अंबानी ने राहुल गांधी की ओर से अपने ऊपर लगातार किए जा रहे आक्षेपों पर गहरी खिन्नता प्रकट की है और इन आक्षेपों को निराधार बताया है। उन्होने डसॉल्ट कंपनी के साथ ऑफसेट निर्यात/ वर्क शेयर में रिलायंस की भूमिका पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि दुर्भावाना रखने वाले निहित स्वार्थी लोगों और कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्वियों की ओर से कांग्रेस को इस बारे में गलत, भ्रामक और भटकाने वाली जानकारी दी गई है।  

उन्होंने कहा है कि रिलायंस डसॉल्ट संयुक्त उपक्रम कोई राफेल जेट विमानों का विनिर्माण नहीं करने जा रहा है। सभी 36 के 36 विमान शत प्रतिशत फ्रांस में ही तैयार किए जाएंगे और उन्हें वहीं से भारत को निर्यात किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि भारत के रक्षा मंत्रालय से रिलायंस समूह को इन विमानों के संबंध में कोई भी ठेका नहीं मिला है। 

रिलायंस डिफेंस की भूमिका है सीमित

अंबानी ने कहा है कि उनकी कंपनी की भूमिका केवल ऑफसेट/निर्यात दायित्व तक सीमित है। इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन जैसे सरकरी संगठनों से लेकर 100 से अधिक की संख्या में छोटी मझोली कंपनियां शामिल होंगी। इससे भारत की विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा। उन्होंने याद दिलाया है कि ऑफसेट नीति कांग्रेस के नेतृत्ववाली संप्रग सरकार ने ही 2005 में लागू की थी। अंबानी ने स्पष्ट किया है कि उनके समूह ने राफेल विमानों की खरीददारी की इच्छा जताए जाने से महिनों पहले ही रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा दिसंबर 2014 से जनवरी 2015 के बीच ही कर दी थी। 

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