1. You Are At:
  2. India TV
  3. पैसा
  4. बिज़नेस
  5. PNB Fraud Case पर एसोचैम का बयान, बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम कर दी जानी चाहिए

PNB Fraud Case पर एसोचैम का बयान, बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम कर दी जानी चाहिए

PNB में लेनदेन में 11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का ताजा मामला सामने आने के बाद देश के एक प्रमुख उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि सरकार को बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम कर देनी चाहिए।

Manish Mishra Manish Mishra
Updated on: February 18, 2018 16:36 IST
PNB FRAUD CASE- India TV Paisa
PNB FRAUD CASE

नई दिल्ली सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में लेनदेन में 11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का ताजा मामला सामने आने के बाद देश के एक प्रमुख उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि सरकार को बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम कर देनी चाहिए ताकि सभी सरकारी बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों की तरह जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित रखते हुए अपने शेयरधारकों के प्रति पूर्ण जवाबदेही बरतते हुए काम कर सकें। एसोचैम ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एक के बाद दूसरे संकट में फंसते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार के लिये करदाताओं के पैसे से इन बैंकों को संकट से उबारते रहने की एक सीमा है। उल्लेखनीय है कि सरकार खुद इन बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है।

उद्योग मंडल ने कहा है कि इन बैंकों में शीर्ष पदों पर सरकारी नौकरी के बाद सेवा विस्तार के तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों को बिठाया जाता है। ऐसे में वरिष्ठ प्रबंधन का काफी समय सरकारी शीर्ष पदों पर बैठे नौकरशाहों के निर्देशों पर अमल करने में ही बीत जाता है फिर चाहे ये मुद्दे सामान्य ही क्यों न हों।

एसोचैम ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक प्रबंधन का ध्यान उसके मूल बैंकिंग कार्यों की तरफ नहीं जा पाता है। समस्या तब और बढ़ गई है जब इन बैंकों में आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ा है। यह प्रौद्योगिकी बैंकों के लिए वरदान या फिर विनाश दोनों ही हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि बैंक इस प्रौद्योगिकी का कितने सक्षम तरीके से इस्तेमाल करते हैं।

एसोचैम ने कहा है कि जैसे ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे आएगी वैसे ही बैंकों के शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही और जिम्मेदारी दोनों ही बढ़ जाएगी और उनकी स्वायत्ता भी बढ़ेगी। उसके बाद बैंकों का निदेशक मंडल सही मायनों में नीतिगत निर्णय लेगा और बैंक के सीईओ निर्देश के लिए नौकरशाहों की तरफ देखने के बजाय पूरे अधिकारों के साथ बैंक को चलायेंगे।

एसोचैम के महासिचव डी.एस. रावत ने कहा कि भारतीय उद्योग जगत पर भी इसकी जिम्मेदारी है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। एक पहलू बैंक प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करता है तो दूसरा पहलू कर्ज लेने वाली कंपनियों, खासतौर से बड़ी कंपनियों का है। कोई भी खराब घटना से दोनों पक्षों को धब्बा लगता है। समय है कि उद्योगों को भी अपने भीतर झांकना चाहिये। एक तरफ जब हम बैंकों के लिए अधिक स्वायत्ता की बात कर रहे हैं वहीं हम उद्योगों से भी साफ सुथरा बैंकिंग और व्यावसायिक व्यवहार चाहते हैं।

एसोचैम ने निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र सहित समूचे वित्तीय क्षेत्र में साफ सुथरा कारोबार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का आह्वान किया है कि वह आगे आकर इस मामले में अग्रणी भूमिका निभाए। उद्योग मंडल ने कहा है कि वह भी सभी पक्षों तक पहुंचने में सक्रिय भूमिका निभायेगा और सरकार के साथ काम करने में उसने प्रसन्नता जाहिर की है।

Write a comment