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11 दिन में 1.93 रुपए प्रति लीटर सस्ता हुआ पेट्रोल, डीजल के दाम 96 पैसे घटे, अब आगे क्या

16 जून से शुरू हुए ईंधन के मूल्य की रोजाना समीक्षा के बाद पेट्रोल के दाम में 1.93 रुपए की कटौती हुई है। वहीं, डीजल की कीमत 96 पैसे प्रति लीटर घटी है।

Ankit Tyagi Ankit Tyagi
Updated on: June 27, 2017 12:35 IST
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11 दिन में 1.93 रुपए प्रति लीटर सस्ता हुआ पेट्रोल, डीजल के दाम 96 पैसे घटे, अब आगे क्या

नई दिल्ली। 16 जून से शुरू हुए ईंधन के मूल्य की रोजाना समीक्षा के बाद पेट्रोल के दाम में जहां 1.93 रुपए प्रति लीटर की कटौती हुई है। वहीं, डीजल की कीमत 96 पैसे प्रति लीटर घटी है। माना जा रहा है कि इंटरनेशनल मार्केट में लगातार क्रूड की कीमतें गिरने से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल सस्ता हुआ है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 43 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ सकती है, क्योंकि क्रूड उत्पादक देशों की ओर से सप्लाई बढ़ रही है, लेकिन डिमांड में कमी आ रही है। इसीलिए घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल आगे चलकर और सस्ता हो सकते है। यह भी पढ़े: BP के साथ मिलकर रिलायंस देशभर में खोलेगी पेट्रोल पंप, करेगी 40,000 करोड़ रुपए का निवेश

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रोजाना इतने रुपए सस्ता हुआ पेट्रोल

तेल कंपनी के आंकड़े के अनुसार पेट्रोल के दाम में हर दिन 11 पैसे से लेकर 32 पैसे प्रति लीटर की गिरावट आयी है। वहीं डीजल के मामले में 2 पैसे से 18 पैसे प्रति लीटर की कमी आयी है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद ईंधन के दाम में लगातार कमी आ रही है।यह भी पढ़ें : ये हैं देश के टॉप-4 डीजल ऑटोमैटिक सेडान, माइलेज के मामले में हैं सबसे आगे

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क्यों कम हो रहे है पेट्रोल और डीजल के दाम
कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 43 अरब डॉलर प्रति बैरल के करीब है। अप्रैल मध्य के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 22 फीसदी की गिरावट आ गई है। इसका बड़ा कारण यह है कि ओपेक देशों की ओर से प्रॉडक्शन में कमी करने की कोशिशों के बाद भी सप्लाइ में कमी नहीं आई है और कच्चे तेल के रेट में गिरावट जारी है। ओपेक देशों की ओर से उत्पादन में कमी के फैसले को अमेरिकी शेल ऑइल के प्रॉडक्शन ने लगातार कमजोर किया है।

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16 जून को खत्म हो गई थी 15 साल पुरानी व्यवस्था
हर महीने की एक और 16 तारीख को ईंधन के दाम की समीक्षा की पुरानी व्यवस्था एक अप्रैल 2002 को शुरू हुई। यह उससे पिछले पखवाड़े में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल तथा विदेशी विनिमय दर के औसत आधार पर आधारित थी। सरकार ने पेट्रोल और डीजल को नियंत्रण मुक्त कर एक अप्रैल 2002 से हर पखवाड़े कीमत की समीक्षा की व्यवस्था शुरू की थी। अधिकारी ने कहा, कई बार ऐसा होता था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दरों में एक सप्ताह गिरावट होती और उसके बाद उसमें वृद्धि होती। ऐसे में पिछली व्यवस्था में कीमत स्थिर होती या उसमें मामूली बदलाव होता। लेकिन अब कीमतों में गिरावट का लाभ तुरंत ग्राहकों को दिया जा रहा है। दूसरी तरफ अगर कीमतें में बढ़ेंगी तो भी वृद्धि भी तुरंत लागू होगी।

एक्सपर्ट की राय
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने बताया कि क्रूड कीमतों में गिरावट का बड़ा कारण ओवर सप्लाई है। इसके अलावा क्रूड डिप्लोमेसी काफी गंभीर है क्योंकि सारी लड़ाई मार्केट शेयर को लेकर है। आने वाले दिनों में क्रूड के दाम 40 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकते है। इसका फायदा पेट्रोल और डीजल की कीमतों के सस्त होने से मिल सकता है। इंडिया इंफोलाइन के एनर्जी एक्सपर्ट हितेश जैन बताते है कि अगले साल भी क्रूड कीमतों में गिरावट थमने के आसार नहीं है, क्योंकि अमेरिका और ईरान से भी सप्लाई बढ़ना कीमतों पर और दबाव बढ़ाने का काम कर रहा है लेकिन इसका अब घरेलू मार्केट को फायदा कम ही मिलेगा। क्योंकि कीमतों में और गिरावट बढ़ने ग्लोबल आर्थिक मंदी की चिंताएं बढ़ जाएंगी

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