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Happy B’day: अपनी सालगिराह पर पीएम मोदी देंगे राष्‍ट्र को उपहार, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बांध का करेंगे उद्घाटन

रविवार यानी 17 सितंबर को पीएम मोदी अपनी 67वीं सालगिराह मनाएंगे। इस दिन वह किसी से उपहार नहीं लेंगे, बल्कि देश को अपनी ओर से तोहफा देंगे।

Abhishek Shrivastava Abhishek Shrivastava
Updated on: September 16, 2017 17:36 IST
Happy B’day: अपनी सालगिराह पर पीएम मोदी देंगे राष्‍ट्र को उपहार, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बांध का करेंगे उद्घाटन- India TV Paisa
Happy B’day: अपनी सालगिराह पर पीएम मोदी देंगे राष्‍ट्र को उपहार, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बांध का करेंगे उद्घाटन

अहमदाबाद। रविवार यानी 17 सितंबर को पीएम मोदी अपनी 67वीं सालगिराह मनाएंगे। इस दिन वह किसी से उपहार नहीं लेंगे, बल्कि देश को अपनी ओर से तोहफा देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार सरोवर बांध को रविवार को राष्‍ट्र को समर्पित करेंगे। इस बांध से तीन राज्‍यों- गुजरात, मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र- के लोगों को सबसे ज्‍यादा फायदा होगा। 56 साल पहले तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा 5 अप्रैल 1961 को नर्मदा जिले के केवादिया में इस बांध की आधारशिला रखी गई थी। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।

इस बांध को तैयार करने में लगभग 65,000 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस बांध की मदद से गुजरात में 18 लाख हेक्‍टेयर और राजस्‍थान में 2.46 लाख हेक्‍टेयर जमीन पर सिंचाई की जा सकेगी। इस बांध का लक्ष्‍य 10 लाख किसानों को फायदा पहुंचाना है। बांध में स्‍थापित की गई टर्बाइन के माध्‍यम से पैदा होने वाली बिजली मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र और गुजरात को दी जाएगी।

गुजरात के मुख्‍यमंत्री विजय रूपानी ने बताया कि प्रधानमंत्री सरदार सरोवर परियोजना को इसके 30 दरवाजों को खोलने के बाद राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिसे नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा इस साल 17 जून को बंद कर दिया गया था। नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने 16 जून को देश के सबसे बड़े बांध के दरवाजों को बंद करने का आदेश दिया था। इसके दरवाजे बंद करने के बाद बांध की ऊंचाई बढा़कर 138 मीटर की गई, जिससे इसकी भंडारण क्षमता 12.7 लाख क्यूबिक मीटर से बढ़कर 47.3 लाख क्यूबिक मीटर (एमसीएम) हो गई। पहले इस बांध की ऊंचाई 121.92 मीटर थी।

देर से हुई शुरुआत

सरदार सरोवर बांध की अवधारणा सरदार वल्‍लभभाई पटेल ने तैयार की थी, इसलिए इस परियोजना को उनका नाम दिया गया है। इसका नाम बदलने से पहले इसे नवागम बांध के नाम से जाना जाता था। पंडित नेहरू द्वारा 1961 में इस परियोजना की आधारशिला रखी गई लेकिन फरवरी 1980 तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका। इसका कारण पर्यावरण और खाली कराए गए गांवों के पुर्नस्‍थापना से जुड़े मुद्दे थे।

विभिन्‍न प्राधिकारों से मंजूरियां मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन मई 2014 तक 121.92 मीटर की ऊंचाई पर आकर इसका काम फि‍र रुक गया। जून 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने राज्‍य सरकार की आठ साल पुरानी उस याचिका को मंजूरी दे दी, जिसमें सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ाने की मंजूरी मांगी गई थी।

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