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नैसकॉम ने टीसीएस और इंफोसिस का किया बचाव, कहा- कुल एच-1बी वीजा में दोनों की हिस्सेदारी सिर्फ 8.8 फीसदी

नैसकॉम ने अपने सदस्यों टीसीएस और इंफोसिस का बचाव किया है। संगठन ने कहा कि दोनों की 2014-15 में मंजूर एच-1बी वीजा में हिस्सेदारी केवल 8.8 प्रतिशत थी।

Dharmender Chaudhary [Published on:24 Apr 2017, 8:46 PM IST]
नैसकॉम ने टीसीएस और इंफोसिस का किया बचाव, कहा- कुल एच-1बी वीजा में दोनों की हिस्सेदारी सिर्फ 8.8 फीसदी- India TV Paisa
नैसकॉम ने टीसीएस और इंफोसिस का किया बचाव, कहा- कुल एच-1बी वीजा में दोनों की हिस्सेदारी सिर्फ 8.8 फीसदी

नई दिल्ली। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों का संगठन नैसकॉम ने अपने सदस्यों टीसीएस और इंफोसिस का बचाव किया है। संगठन ने कहा कि दोनों की 2014-15 में मंजूर एच-1बी वीजा में हिस्सेदारी केवल 8.8 प्रतिशत (7,504) थी। अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों टीसीएस और इंफोसिस पर लॉटरी प्रणाली में ज्यादा टिकट भरकर अनुचित तरीके से एच-1बी वीजा में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने का आरोप लगाया।

भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां एच-1बी वीजा का उपयोग अपने कर्मचारियों को अमेरिका में अपने ग्राहकों के लिए काम करने हेतु भेजती हैं। कुल 110 अरब डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। पिछले कुछ सप्ताह से संरक्षणवाद को लेकर अमेरिका समेत विभिन्न बाजारों में धारणा मजबूत हो रही है। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार बढ़ाने तथा विदेशी कर्मचारियों के लिये नियम कड़ा किये जाने की मांग जोर पकड़ रही है।

नैसकॉम ने एक बयान में कहा, संगठन व्हाइट हाउस के भारतीय कंपनियों पर एच-1बी वीजा में अधिक हिस्सेदारी लिए जाने के संबंध में किए गए बयान को लेकर स्पष्ट करना चाहेगा कि 2014-15 में शीर्ष 20 एच-1बी वीजा प्राप्तकर्ताओं में केवल छह भारतीय कंपनियां थी। बयान के मुताबिक टीसीएस और इंफोसिस ने 2014-15 में 7,504 वीजा प्राप्त किए जो कुल मंजूरी एच-1बी वीजा का केवल 8.8 प्रतिशत है।

हालांकि, दोनों सॉफ्टवेयर निर्यातकों ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है लेकिन उनका कहना है कि वे जहां काम करती हैं, वहां के नियमों का पूरी तरह पालन करती हैं। अमेरिका हर साल 65,000 एच-1बी वीजा जारी करता है। वहीं 20,000 अतिरिक्त वीजा उन लोगों के लिए होता है जिन्होंने अमेरिका में उच्च डिग्री हासिल की है।

Web Title: नैसकॉम ने टीसीएस और इंफोसिस का किया बचाव
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