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बैंकों में जमा 100 लाख करोड़ में से 11300 करोड़ का नहीं कोई दावेदार, RBI की रिपोर्ट से मिली जानकारी

रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक कुल 11302 करोड़ रुपए में से इस रकम में सबसे ज्यादा स्टेट बैंक (SBI) में 1262 करोड़ और पंजाब नैशनल बैंक (PNB) में 1250 करोड़ पड़े हैं

Written by: Manoj Kumar [Updated:18 Mar 2018, 1:14 PM IST]
11300 crore- IndiaTV Paisa
More than Rs 11300 crore are unclaimed in accounts with banks says RBI Report

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से हाल में जाही हुए आंकड़ों के मुताबिक देश के देशभर में 3 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते ऐसे हैं जिनमें जमा 11302 करोड़ रुपए के लिए कोई दावेदार नहीं है। यह बैंक खाते देश के 64 बैंकों में हैं। आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा रकम उन बैंकों में ही है जिनमें खाते सबसे ज्यादा हैं, यानि भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के पास इस तरह की सबसे ज्यादा रकम पड़ी है जिसके लिए कोई दावा नहीं कर रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक कुल 11302 करोड़ रुपए में से इस रकम में सबसे ज्यादा स्टेट बैंक (SBI) में 1262 करोड़, पंजाब नैशनल बैंक (PNB) में 1250 करोड़ और बाकी सभी सरकारी बैंकों में 7040 करोड़ रुपए पड़े हैं जिनपर कोई अपना दावा नहीं कर रहा है। गौरतलब है कि देश के बैंकों में लगभग 100 करोड़ रुपए रकम जमा है, ऐसे में बिना दावे वाले 11302 करोड़ रुपए कुल जमा रकम का बहुत कम हिस्सा है।

आंकड़ों के मुताबिक प्राइवेट बैंकों के पास इस तरह की बिना दावे वाली रकम का हिस्सा बहुत कम है, 7 प्रमुख प्राइवेट बैंकों यानि ऐक्सिस, DCB, HDFC, ICICI, IndusInd, Kotak Mahindra और Yes Bank के पास इस तरह की कुल 824 करोड़ रुपए की धनराशि जमा है जिनका कोई भी दावेदार नहीं है। अन्य 12 निजी बैंकों के पास 592 करोड़ रुपए जमा हैं।

भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरू में पूर्व रिजर्व बैंक चेयर प्रोफेसर चरण सिंह के मुताबिक इस राशि में ज्यादातर ऐसे खाताधारकों की है जिनकी मौत हो चुकी है या जिनके पास कई बैंकों में अकाउंट हैं। इस तरह की रकम के बेनामी होने की संभावना बहुत कम है। बैंकिंग रेग्युलेशन ऐक्ट 1949 के सेक्शन 26 के मुताबिक हर कैलेंडर इयर के समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर भारत के सभी बैंकों अपने ऐसे अकाउंट्स की जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को देनी होती है जिन्हें 10 साल से इस्तेमाल नहीं किया गया है।

हालांकि बैंकिंग रेग्युलेशन ऐक्ट 1949 के सेक्शन 26ए कहता है कि 10 साल के बाद भी रकम जमा करने वाले व्यक्ति इस रकम पर दावा कर सकते हैं और बैंकिंग कंपनी इस रकम को वापस करने के लिए बाध्य है। बैंकिंग लॉ (संशोधित) ऐक्ट, 2012 के नियम मुताबिक बनाए गए डिपॉजिटर ऐजुकेशन ऐंज अवेयरनेस फंड में इन निष्क्रिय खातों की रकम को जमा कर दिया जाता है।

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