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IDBI बैंक के शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लाएगी LIC, बैंक के अधिग्रहण के पक्ष में नहीं हैं यूनियन

सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण को लेकर आईडीबीआई बैंक के छोटे शेयरधारकों से शेयर खरीदने के लिए खुली पेशकश लाएगी।

Edited by: India TV Paisa Desk [Published on:10 Jul 2018, 8:50 PM IST]
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Photo:IDBI BANK

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नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण को लेकर आईडीबीआई बैंक के छोटे शेयरधारकों से शेयर खरीदने के लिए खुली पेशकश लाएगी। सूत्रों ने यह बात कही। एलआईसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में हिस्सेदारी खरीदने को लेकर अपने निदेशक मंडल से मंजूरी प्राप्त करने के बाद बाजार नियामक सेबी से संपर्क करेगी। बीमा नियामक इरडा पहले ही हिस्सेदारी खरीदने को लेकर एलआईसी को मंजूरी दे चुका है। इससे समस्याओं में फंसे बैंक को 10,000 से 13,000 करोड़ रुपए मिलेंगे। 

सूत्रों के अनुसार एलआईसी- आईडीबीआई बैंक सौदे से छोटे शेयरधाकों के हितों के संरक्षण को लेकर खुली पेशकश लाई जाएगी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के अधिग्रहण संहिता के तहत अधिग्रहणकर्ता को लक्षित कंपनी के छोटे शेयरधारकों के लिए 25 प्रतिशत या उससे अधिक खुली पेशकश करनी होती है। 

सूत्रों के मुताबिक बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने पिछले महीने हैदराबाद में हुई बैठक में एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी 10.82 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत करने की अनुमति दे दी। मौजूदा नियमन के तहत बीमा कंपनी किसी भी सूचीबद्ध वित्तीय कंपनियों में 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं खरीद सकती। 

 

आईडीबीआई बैंक के अधिग्रहण के पक्ष में नहीं हैं एलआईसी यूनियन 

एलआईसी की कर्मचारी यूनियनें बीमा कंपनी द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं। यूनियनों का कहना है कि इससे पॉलिसीधारकों और उनके प्रीमियम के धन के हित पर असर पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ एलआईसी क्लास वन ऑफिसर्स एसोसिएशन ने पूर्व में सार्वजनिक बैंकों में किए गए निवेश प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन बैंकों के शेयर मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट आई है जिससे हमारा मुनाफा प्रभावित हो सकता है। 

एलआईसी के चेयरमैन को लिखे पत्र में फेडरेशन ने कहा कि एक तरीके से हमें बैंकों के पुनर्पूंजीकरण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दबाव डाला जा रहा है। आईडीबीआई में बहुलांश हिस्सेदारी के अधिग्रहण को इसी परिप्रेक्ष्य से देखा जाना चाहिए। मार्च तिमाही के अंत तक बैंक की सकल गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 55,588 करोड़ रुपए थीं। ऑल इंडिया एम्पलाइज फेडरेशन के महासचिव राजेश कुमार ने कहा कि इसका मतलब है कि बैंक को अपने बही खाते को साफ सुथरा करने और नियामकीय पूंजी के न्यूनतम स्तर को कायम रखने के लिए काफी पूंजी की जरूरत होगी। 

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