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बैंककर्मियों के संगठन ने PNB घोटाला मामले में की सरकार से हस्तक्षेप की मांग, अन्‍य बैंकों के अधिकारी भी जांच के घेरे में

बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाला मामले में सरकार से दखल की मांग करते हुए सोमवार को कहा कि जांच पूरी होने और जिम्मेदारी तय किए जाने तक शीर्ष प्रबंधन तथा अधिकारियों को सेवा से बाहर किया जाना चाहिए।

Edited by: Manish Mishra [Published on:19 Feb 2018, 2:26 PM IST]
PNB Fraud- India TV Paisa
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नई दिल्ली बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाला मामले में सरकार से दखल की मांग करते हुए सोमवार को कहा कि जांच पूरी होने और जिम्मेदारी तय किए जाने तक शीर्ष प्रबंधन तथा अधिकारियों को सेवा से बाहर किया जाना चाहिए। संगठन ऑल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन ने पत्र लिखकर कहा कि ऐसा संदेश जा रहा है कि इसमें सिर्फ नीचे के पदों के अधिकारी शामिल थे।

संगठन ने कहा है कि जो कार्रवाई निचले अधिकारियों के ऊपर हुई है वही शीर्ष अधिकारियों के ऊपर भी होनी चाहिए। हालांकि, हम निचले स्तर पर हो रहे गलत काम का भी समर्थन नहीं करते हैं लेकिन इस मामले में ऐसा संदेश जा रहा है जैसे सारी गड़बड़ी निचले स्तर पर की गई हो। निचले अधिकारियों को निलंबित करने में इतनी जल्दीबाजी क्यों?

आपको बता दें कि PNB के 11,400 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि अन्य बैंकों के अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं। जिन बैंकों की विदेशी शाखाओं से PNB के धोखाधड़ी वाले साख पत्रों (LoU) के जरिए कर्ज दिया गया उनके अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय बैंकों इलाहाबाद बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, यूको बैंक और एक्सिस बैंक की हांगकांग शाखाओं के अधिकारी इस पूरे घोटाले में शामिल हैं। यह घोटाला पिछले सात साल से चल रहा था।

सूत्रों ने बताया कि दिशानिर्देशों के अनुसार रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के एलओयू को भुनाने की समयसीमा 90 दिन है, 365 दिन नहीं, जैसा कि पीएनबी घोटाले से जुड़े ज्यादातर LoU में दिखाया गया है।

सूत्रों ने कहा कि आम परंपरा से अलग हटकर जारी LoU के मद्देनजर हांगकांग में अन्य बैंकों की शाखाओं के अधिकारियों को सचेत होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह मामला तभी सामने आया जबकि PNB ने पिछले महीने उसकी मुंबई की ब्रैडी हाउस शाखा की ओर से जारी एलओयू को मानने से इनकार कर दिया।

सूत्रों ने बताया कि यदि किसी ने सतर्कता दिखाई होती तो घोटाले की राशि इतनी अधिक नहीं पहुंचती। हांगकांग में 11 भारतीय बैंकों का परिचालन हैं। वहां इलाहाबाद बैंक, यूको बैंक, यूनियन बैंक आफ इंडिया, एक्सिस बैंक, एसबीआई, बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा, केनरा बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखाएं हैं।

इनमें से एसबीआई ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उसने PNB घोटाले में शामिल नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों को 21.2 करोड़ डॉलर का ऋण दिया है।

इसी तरह यूनियन बैंक आफ इंडिया ने 30 करोड़ डॉलर और यूको बैंक ने 41.18 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। समझा जाता है कि इलाहाबाद बैंक का इस मामले में करीब 2,000 करोड़ रुपए फंसा है। पिछले सप्ताह PNB ने कहा है कि वह उसकी शाखा की ओर से जारी सभी LoU का भुगतान करेगा। हालांकि, इस मामले में उसकी पूरी देनदारी कितनी बनती है यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

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