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Jet Airways को NCLT में भेजने का हुआ फैसला, बैंकों ने एयरलाइन को फ‍िर से खड़ा करने से हाथ पीछे खींचे

बैकों को अब तक के प्रयास में कर्ज में डूबी इस एयरलाइन के पुनरोद्धार के लिए किसी इकाई से कोई पुख्ता प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: June 17, 2019 21:23 IST
Jet Airways lands in NCLT as banks give up revival bid- India TV Paisa
Photo:JET AIRWAYS LANDS IN NCLT

Jet Airways lands in NCLT as banks give up revival bid

मुंबई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई में बैंकों के गठजोड़ ने निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एयरवेज को फिर खड़ा करने की अपनी ओर से की जा रही कोशिश छोड़ दी है। बैंकों के गठजोड़ ने ठप पड़ी इस एयरलाइन में फंसे अपने कर्ज के समाधान का मामला दिवाला संहिता के तहत कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में भेजने का फैसला किया है। बैंकों को एयरलाइन से 8,000 करोड़ रुपए की वसूली करनी है। 

कभी जेट एयरवेज देश की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी एयरलाइन होती थी। 25 साल पहले इस एयरलाइन को टिकटिंग एजेंट से उद्यमी बने नरेश गोयल ने शुरू किया था। बैकों को अब तक के प्रयास में कर्ज में डूबी इस एयरलाइन के पुनरोद्धार के लिए किसी इकाई से कोई पुख्ता प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। एतिहाद-हिंदुजा गठजोड़ ने हालांकि एयरलाइन में रुचि दिखाई है लेकिन उसकी ओर से कोई पुख्ता प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। इसी वजह से बैंकों की सोमवार को हुई बैठक में एयरलाइन के मामले को एनसीएलटी में भेजने का फैसला किया गया। 

गोयल को रखा निगरानी नोटिस में

यह फैसला इन खबरों के बाद लिया गया है कि संघीय विधि प्रवर्तन एजेंसियों ने गोयल को निगरानी नोटिस में रखा है। साथ ही वे उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग जांच शुरू करने जा रही हैं। जेट एयरवेज का परिचालन 17 अप्रैल से बंद है। इससे एयरलाइन के 23,000 कर्मचारियों का कई महीनों के वेतन का भुगतान नहीं किया जा सका है। साथ ही इससे हवाई किराये में औसतन 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। 

जेट एयरवेज के स्‍लॉट दूसरी कंपनियों को दिए

घरेलू हवाई अड्डों पर एयरलाइन के स्लॉट सरकार ने अन्य विमानन कंपनियो को दे दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भी उसके कुछ स्लॉट अन्य एयरलाइन को दिए गए हैं। एसबीआई ने बयान में कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद ऋणदाताओं ने फैसला किया है कि दिवाला संहिता के तहत जेट एयरवेज के मामले का निपटान किया जाए। बयान में कहा गया है कि यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि संभावित निवेशक सौदे के तहत सेबी के कुछ छूट चाहता है। इस तरह का सौदा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत बेहतर तरीके से हो सकता है। 

दो कंपनियों ने 10 जून को की थी अपील

बैंक ने कहा कि ऋणदाता ठप खड़ी विमानन कंपनी का समधान दिवाला संहिता (आईबीसी) से बाहर निपटाना चाहते थे, लेकिन अब आईबीसी के तहत ही निपटान का फैसला किया गया है। उल्लेखनीय है कि जेट एयरवेज के साथ व्यवसायिक सौदों में उधार देने वाली दो फर्मों शैमन व्हील्स और गग्गर एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के लिए 10 जून को एनसीएलटी में अपील की थी। न्यायाधिकरण ने अभी तक इन याचिकाओं को सुनवाई के लिए दाखिल नहीं किया है। न्यायाधिकरण ने 13 जून को कहा कि वह इस मामले पर 20 जून को गौर करेगा। एनसीएलटी ने संबंधित पक्षों से जेट एयरवेज को कानूनी नोटिस भेजने को कहा है। एयरलाइन पर शैमन व्हील्स का 8.74 करोड़ रुपए और गग्गर का 53 करोड़ रुपए का बकाया है। 

जेट एयरवेज का कुल नुकसान 13 हजार करोड़ पर पहुंचा

जेट एयरवेज पर एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के गठजोड़ का 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। अभी एयरलाइन का परिचालन बैंकों द्वारा ही किया जा रहा है। यही जेट एयरवेज का कुल नुकसान 13,000 करोड़ रुपए पर पहुंच चुका है। एयरलाइन पर उसे माल और सेवाएं देने वालों का 10,000 करोड़ रुपए और कर्मचारियों के वेतन का 3,000 करोड़ रुपए बकाया है। 

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