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किसानों की आय ऐसे तो दोगुनी होने से रही, रिकॉर्ड तिलहन पैदा होने के बावजूद विदेशों से खाद्य तेल का भी रिकॉर्ड आयात

अक्टूबर में खत्म हुए ऑयल वर्ष 2016-17 के दौरान देश में 150.77 लाख टन खाने के तेल का आयात हुआ है जो अबतक का सबसे अधिक वार्षिक आयात है

Manoj Kumar Manoj Kumar
Published on: November 14, 2017 13:53 IST
किसानों की आय ऐसे तो दोगुनी होने से रही, रिकॉर्ड तिलहन पैदा होने के बावजूद विदेशों से खाद्य तेल का भी रिकॉर्ड आयात- India TV Paisa
किसानों की आय ऐसे तो दोगुनी होने से रही, रिकॉर्ड तिलहन पैदा होने के बावजूद विदेशों से खाद्य तेल का भी रिकॉर्ड आयात

नई दिल्ली। केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है, लेकिन देश में देश में किसानों के द्वारा फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद हम जिस रफ्तार से विदेशों से उन्हीं फसलों से जुड़े उत्पाद आयात कर रहे हैं उसे देखते हुए लग नहीं रहा है कि 5 साल में किसानों की आय दोगुनी हो पाएगी। पिछले साल देश में तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था और इस साल भी खरीफ सीजन में अच्छी पैदावार हुई है लेकिन इसके बावजूद विदेशों से हम खाने के तेल का आयात लगातार बढ़ाते जा रहे हैं और हालात यह हैं कि इस साल खाने के तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है।

150 लाख टन से ज्यादा खाने के तेल का आयात

देश में तेल और तिलहन इंडस्ट्री के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में खत्म हुए ऑयल वर्ष 2016-17 के दौरान देश में 150.77 लाख टन खाने के तेल का आयात हुआ है जो अबतक का सबसे अधिक वार्षिक आयात है, पिछल साल इस दौरान देश में 145.71 लाख टन खाने के तेल का आयात हुआ था।

सोयाबीन तेल सहित सरसों के तेल का आयात

जो भी तेल आयात हुआ है उसमें 92.94 लाख टन पाम ऑयल है जिसका भारत में बहुत कम उत्पादन होता है। लेकिन इसके साथ 33.16 लाख टन सोयाबीन तेल, 21.69 लाख टन सूरजमुखी तेल और 2.92 लाख टन सरसों तेल का आयात हुआ है। सोयाबीन और सरसों का भारत में अच्छा उत्पादन होता है और अभी हालात ऐसे हैं कि इनकी खेती करने वाले किसानों को सरकार का तय किया हुआ समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद सोयाबीन तेल और सरसों तेल का दबाकर आयात हो रहा है।

किसानों को नहीं मिल रहा है तिलहन का समर्थन मूल्य

सरकार ने इस साल सोयाबीन के लिए 3050 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया हुआ है और इसके सबसे बड़े उत्पादक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों में किसानों को 2500 रुपए प्रति क्विंटल या इससे भी कम भाव मिल रहा है। इसी तरह पिछले सीजन में पैदा हुई सरसों के लिए 3700 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया गया है लेकिन इसके सबसे बड़े उत्पादक राजस्थान की ज्यादातर मंडियों में किसानों को 3500-3600 रुपए या इससे भी नीचे का भाव मिल रहा है।

खाने के लिए के लिए आयात पर निर्भरता

देश में खाने के तेल की जरूरत को पूरा करने के लिए अगर सरकार इसी तरह से आयात पर निर्भरता बढ़ाती रही तो किसानों के पैदा किए हुए तिलहन के लिए ज्यादा भाव नहीं मिल सकेगा और हालात ऐसे ही रहेंगे जैसे अभी बने हुए हैं। देश में खपत होने वाले कुल खाने के तेल का करीब 60-65  फीसदी हिस्सा हमें आयात करना पड़ता है और बाकी 35-40 फीसदी का उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है।

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