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दूरसंचार विभाग की सांविधिक प्रक्रिया को पूरा करने पर ही मिलेगी आइडिया-वोडाफोन विलय को मंजूरी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि दूरसंचार विभाग द्वारा सभी सांविधिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही आइडिया-वोडाफोन के विलय सौदे को मंजूरी दी जाएगी।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: July 03, 2018 16:35 IST
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Photo:IDEA VODA

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नई दिल्‍ली। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दूरसंचार विभाग द्वारा सभी सांविधिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही आइडिया-वोडाफोन के विलय सौदे को मंजूरी दी जाएगी। 

दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने आज आईआईटी दिल्ली में एरिक्सन की 5जी परीक्षण लैब के उद्घाटन के मौके पर अलग से बातचीत में कहा कि दूरसंचार विभाग ने विलय एवं अधिग्रहण के नियम तय किए हैं। विभाग की सभी सांविधिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एक दिन की देरी के बिना आइडिया-वोडाफोन विलय को मंजूरी दे दी जाएगी।  

आइडिया और वोडाफोन दोनों इस विलय सौदे के 30 जून, 2018 तक पूरा होने की उम्मीद कर रही थीं। इससे देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी अस्तित्व में आएगी। इस सौदे को पहले जून के मध्य तक मंजूरी दी जानी थी, लेकिन दूरसंचार विभाग वोडाफोन से नए सिरे से 4,700 करोड़ रुपए की कर मांग पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि विभाग इसके बाद ही सौदे को मंजूरी देगा। 

वर्ष 2015 में वोडाफोन ने अपनी चार अनुषंगियों वोडाफोन ईस्ट, वोडाफोन साउथ, वोडाफोन सेल्युलर और वोडाफोन मोबाइल सर्विसेज का विलय किया था, जिसे अब वोडाफोन इंडिया कहा जाता है। दूरसंचार विभाग ने उस समय वोडाफोन से 6,678 करोड़ रुपए का ओटीएससी का बकाया चुकाने को कहा था, जिसे कंपनी ने अदालत में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वोडाफोन ने 2,000 करोड़ रुपए जमा किए थे। दूरसंचार विभाग चाहता है कि आइडिया में विलय से पहले वोडाफोन शेष बकाया राशि भी चुकाये। 

यह मांग 2,100 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी के अतिरिक्त है, जो दूरसंचार विभाग आइडिया से एकबारगी स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में वसूलना चाहता है। विलय के बाद बनने वाली प्रस्तावित इकाई का नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड होगा। इसके लिए आइडिया के शेयरधारकों से मंजूरी ली जाएगी। पहले दिन से इस इकाई के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 40 करोड़ होगी। कंपनी के पास बाजार के कुल राजस्व में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। 

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