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GST Council : मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण का कार्यकाल दो साल बढ़ाया, जानिए इन 8 बड़े फैसलों के बारे में

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण (एनएए) का कार्यकाल दो साल के लिए नवंबर, 2021 तक बढ़ा दिया है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Updated on: June 22, 2019 12:36 IST
GST Council Meeting- India TV Paisa

GST Council Meeting

नयी दिल्ली। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण (एनएए) का कार्यकाल दो साल के लिए नवंबर, 2021 तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही परिषद ने जीएसटी पंजीकरण हासिल करने के लिए आधार के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल की अनुमति दी हैं बिजली चालित वाहनों और उनके चार्जरों पर जीएसटी दर में कटौती का मामला अधिकारियों की एक समिति को भेजा गया है।   

पहली बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 35वीं बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। इस बैठक में कारोबारियों के साथ-साथ आम जनता को बड़ी राहत दी गई। अब कोई भी नया कारोबारी आधार के जरिए अपना जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कर सकेगा। इसके अलावा 1 जनवरी 2020 से कारोबारियों को केवल एक पेज का रिटर्न फॉर्म भरना होगा। वहीं मल्टीप्लेक्स में ई-टिकट को अनिवार्य किया जाएगा। इस बैठक में आठ बड़े फैसले लिए गए। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में शुक्रवार को यहां हुई जीएसटी परिषद की बैठक में दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं देने वाली कंपनियों पर 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने की भी मंजूरी दी गई है। अभी तक इसमें 25,000 रुपये तक का अधिकतम जुर्माना लगाया जा सकता है। जीएसटी परिषद की 35वीं बैठक के बाद राजस्व सचिव अजय भूषण पाण्‍डेय ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था के तहत वार्षिक रिटर्न जमा कराने की तारीख दो महीने बढ़ाकर 30 अगस्त कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि इसके साथ जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों के लिए माल के परिवहन को दो लगातार महीने तक ई-वे बिल निकालने की रोक को दो माह के लिए बढ़ाकर 21 अगस्त, 2019 कर दिया गया है। पांडेय ने यह भी बताया कि नई जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की प्रणाली एक जनवरी, 2020 से लागू हो जाएगी। परिषद ने एक जनवरी, 2020 से इलेक्ट्रानिक इनवॉयस प्रणाली को पायलट आधार पर शुरू करने की भी मंजूरी दी है। पांडेय ने कहा कि परिषद ने इसके साथ ही जीएसटी पंजीकरण वाले मल्टीप्लेक्सों के लिए ई-टिकट जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि लॉटरियों पर जीएसटी दर के बारे में अटार्नी जनरल की राय मांगी गई है। 

पांडेय ने कहा कि केंद्र ने बोगस इनवॉयस से संबंधित ब्योरा राज्यों के साथ साझा किया है। परिषद ने ई-इनवॉयस पर एक जनवरी से पायलट परियोजना शुरू करने की सैद्धान्तिक मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को बी2बी बिक्री के लिए सरकारी पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस निकालना होगा। लॉटरियों पर कर को लेकर अटॉर्नी जनरल की राय मांग जाने के बारे में सीतारमण ने कहा कि जीएसटी के तहत कराधान का सिद्धान्त यह है कि देशभर में कर की एक दर होनी चाहिए जबकि लॉटरियों के मामले में कर की दो दरें हैं। ऐसे में अनुच्छेद 340 पर स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सलाह मांगने का फैसला किया गया है। अभी राज्य प्रायोजित लॉटरी पर 12 प्रतिशत और राज्य अधिकृत लॉटरी पर 28 प्रतिशत का कर लगता है। यह पूछे जाने पर कि क्या दरों को और तर्कसंगत बनाने पर चर्चा हुई तो सीतारमण ने कहा कि इस पर कुछ विशेष नहीं है... हम पूरी तरह स्पष्ट कर चुके हैं कि सभी राज्य इस बात पर सहमत हैं कि सरलीकरण के जरिये हमें इस पर आगे बढ़ना चाहिए। लक्ष्य सरलीकरण का होना चाहिए।  

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली परिषद में सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। पांडेय ने बताया कि बिजली चालित यानी इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दर को 12 से घटाकर पांच प्रतिशत और इलेक्ट्रिक चार्जर पर 18 से घटाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव फिटमेंट समिति को भेजा गया है। इसके राजस्व पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर पांडेय ने कहा कि अभी देश में ई-वाहनों का बहुत अधिक विनिर्माण नहीं हो रहा है। सरकार ई-वाहनों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देना चाहती है। 

वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया कि सीतारमण ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि जीएसटी परिषद को जीएसटी नियमों के सरलीकरण, जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने और जीएसटी के दायरे में और उत्पादों को लाने को लेकर अभी काफी काम करने की जरूरत है। परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की जीएसटी में भूमिका की सराहना की और उनका आभार जताया। परिषद ने कहा कि जेटली ने जीएसटी परिषद को सहकारिता के संघवाद का चमकता उदाहरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

ऐसे बना था राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण (एनएए)

राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण (एनएए) का कार्यकाल दो साल बढ़ाकर 30 नवंबर, 2021 कर दिया गया है। जीएसटी को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। उसके तत्काल बाद सरकार ने दो साल के लिए एनएए की स्थापना को मंजूरी दी थी। एनएए 30 नवंबर, 2017 को इसके चेयरमैन बी एन शर्मा के कार्यभार संभालने के बाद अस्तित्व में आया था। अभी तक एनएए विभिन्न मामलों में 67 आदेश पारित कर चुका है। उसके बाद भी आने वाली शिकायतों का सिलसिला अभी थमा नहीं है।

ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन 

राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने बताया कि कारोबारी ऑनलाइन आधार नंबर के जरिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए उनके पास ओटीपी आएगा और बाद में जीएसटीएन पोर्टल में रजिस्ट्रेशन होने के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाएगा। इसके साथ ही पहले ही सरकार जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर चुकी है। 

लिए गए ये आठ बड़े फैसले

  • जीएसटी काउंसिल ने ई-इनवॉयस के प्रस्ताव को सिद्धांतिक तौर पर  मंजूरी दे दी है।
  • काउंसिल ने राज्य और क्षेत्र आधारित जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल को मंजूरी दे दी हैस जिसके तहत कुछ राज्यों में एक से ज्यादा ट्रिब्यूनल होंगे। 
  • नेशनल एंटी-प्रॉफिटीयरिंग अथॉरिटी को दो साल के एक्सटेंशन को मंजूरी दे दी गई।
  • ई-व्हीकल पर टैक्स घटाने संबंधित मामले को काउंसिल ने फिटमेंट कमेटी के पास भेजा है जो जल्द ही इस पर फैसला लेगी।
  • यदि कोई कारोबारी दो महीने तक रिटर्न फाइल नहीं करता है तो उसे ई-वे बिल जनरेट करने की सुविधा नहीं दी जाएगी।
  • जीएसटी रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। 
  • मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल में अब इलेक्ट्रोनिक टिकट जारी होगा।
  • इलेक्ट्रिक चार्जर पर लगने वाली कर की दर को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने का फैसला लिया गया है।
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