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  5. सरकार की दूरसंचार क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने की इच्छा: निर्मला सीतारमण

'दूरसंचार क्षेत्र की चिंताओं को दूर करना चाहती है सरकार, 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा भारत'

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार दूरसंचार क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने की इच्छा रखती है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Published on: November 16, 2019 12:15 IST
Finance Minister Nirmala Sitharaman । File Photo- India TV Paisa

Finance Minister Nirmala Sitharaman । File Photo

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार दूरसंचार क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने की इच्छा रखती है। इस क्षेत्र में समायोजित सकल आय (एजीआर) पर उच्चतम न्यायालय के हाल के निर्णय के बाद कंपनियों पर पुराने सांविधिक बकाये के भुगतान का दबाव पैदा हो गया है। सीतारमण ने कहा, 'हम नहीं चाहते कोई कंपनी अपना परिचालन बंद करे। हम चाहते हैं कि कोई भी कंपनी हो, वह आगे बढ़े।' 

निर्मला सीतारमण ने कहा, 'सिर्फ दूरसंचार क्षेत्र ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में सभी कंपनियां कारोबार करने में सक्षम हों। अपने बाजार में ग्राहकों को सेवाएं दें और कारोबार में बनी रहें। इसी धारणा के साथ वित्त मंत्रालय हमेशा बातचीत करता रहता है और दूरसंचार उद्योग के लिए भी हमारा यही दृष्टिकोण है।' बीते गुरुवार को दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों वोडाफोन आइडिया और एयरटेल ने अपने दूसरी तिमाही के परिणामों में भारी घाटा दिखाया है। पिछले महीने न्यायालय ने एडजस्टेड ग्रास रेवेन्यू (एजीआर) की सरकार द्वारा तय परिभाषा को सही माना था। इसके तहत कंपनियों की दूरसंचार सेवाओं के इतर कारोबार से प्राप्त आय को भी उनकी समायोजित सकल आय का हिस्सा मान लिया गया है। एजीआर पर न्यायालय के फैसले के बाद वोडाफोन-आइडिया, एयरटेल और अन्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर सरकार की कुल 1.4 लाख करोड़ रुपए की पुरानी सांविधिक देनदारी बनती है। न्यायालय का निर्णय आने के कुछ दिन के भीतर ही सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक सचिवों की समिति गठित कर दी। इसे दूरसंचार उद्योग पर वित्तीय दबाव से निपटने के उपाय सुझाने के लिए कहा गया है। 

सीतारमण ने कहा कि सरकार का इरादा उन सभी लोगों की चिंताओं का समाधान करने का है जो न्यायालय के निर्णय के बाद भारी संकट से गुजर रहे हैं और जिन्होंने सरकार से संपर्क किया है। उन्होंने कहा, 'हम इस बात को लेकर भी सचेत हैं कि उच्चतम न्यायालय ने हमारे पक्ष में आदेश दिया है और ऐसे में दूरसंचार विभाग की चिंताओं पर भी विचार किया जाना है। इसलिए इस संबंध में सरकार की वित्तीय स्थिति और फैसले के दूरसंचार उद्योग के लिए निहितार्थों को समझकर निर्णय लेना होगा।' सचिवों की समिति के बारे में सीतारमण ने कहा, 'अभी उसका फैसला लेना बाकी है।' उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र पर बकाया को लेकर किसी भी बैंक ने वित्त मंत्रालय को अपनी चिंता जाहिर नहीं की है। 

उल्लेखनीय है कि वोडाफोन ने जहां दूसरी तिमाही में 50 हजार करोड़ रुपए से कॉरपोरेट इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा दिखाया है, वहीं एयरटेल ने इस दौरान 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक का तिमाही घाटा बताया है। दोनों कंपनियों को कुल मिलाकर दूसरी तिमाही में 74,000 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ है। 

'पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है भारत'

नयी दिल्ली। देश दुनिया में आर्थिक मोर्चे पर जारी सुस्ती के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे कदम बढ़ रही है और इस लक्ष्य को हासिल करने का पूरा प्रयास है।  सीतारमण ने यहां संवाददाताओं द्वारा अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर पूछे गये सवालों के जवाब में कहा, 'स्थितियां सुधर रही हैं, इस समय केवल इतना कह सकती हूं कि हम आगे बढ़ रहे हैं। कुछ समय बाद आपको और बेहतर जानकारी मिल सकेगी। स्पष्ट रूप से कुछ समय बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकेगा।' सरकार ने हाल ही में कॉरपोरेट कर में भारी कटौती की है जिससे उसके खजाने को 1.45 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का अनुमान है। इसके अलावा सरकार ने आवासीय क्षेत्र और दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों बीएसएनएल, एमटीएनएल को भी करोड़ों रुपये के राहत पैकेज दिए हैं। इससे सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। 

सीतारमण ने कहा 2024-25 तक भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। चीजों की समीक्षा कर रहे हैं, कुछ सप्ताह में स्पष्ट तौर पर बता सकेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नवंबर में माल एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह बढ़ेगा। कॉरपोरेट कर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत किये जाने के सरकार के निर्णय के बाद निवेश गतिविधियां बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि उद्योग जगत से इस बारे में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। वह भविष्य के लिये निवेश योजनायें बना रहे हैं। कई उद्योग नये निवेश की योजना पर काम कर रहे हें। विनिवेश के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। कुछ समय बाद चीजें अधिक स्पष्ट हो जाएंगी। फिलहाल इस समय यही कहा जा सकता है कि आगे बढ़ रहे हैं। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये 1.05 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। एचपीसीएल में पूरी सरकारी हिस्सेदारी ओएनजीसी को बेचन के बाद अब बीपीसीएल में भी सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी है। इसके अलावा टीएचडीसी, नीप्को और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का नाम भी विनिवेश सूची में है।

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