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EESL शुरू कर रही है नया कार्यक्रम, बिजली उत्‍पादन के साथ कमरे की कूलिंग और पानी गर्म करने के लिए मिलेगी उष्‍मा

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईईएसएल ऊर्जा संरक्षण का एक नया कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है जिसमें बिजली उत्पादन के साथ कमरों को ठंडा रखने के लिये ‘कूलिंग’ और पानी गर्म करने के लिये जरूरी ऊष्मा भी प्राप्त की जा सकती है।

Manish Mishra Manish Mishra
Updated on: March 18, 2018 14:37 IST
EESL- India TV Paisa
EESL

नई दिल्ली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईईएसएल ऊर्जा संरक्षण का एक नया कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है जिसमें बिजली उत्पादन के साथ कमरों को ठंडा रखने के लिये ‘कूलिंग’ और पानी गर्म करने के लिये जरूरी ऊष्मा भी प्राप्त की जा सकती है। ‘ट्राइजनरेशन’ नाम के इस कार्यक्रम से जहां एक तरफ ऊर्जा खपत में कमी आएगी वहीं 20,000 मेगावाट अतिरक्त स्वच्छ बिजली पैदा की जा सकती है। जलवायु परिवर्तन की चिंता के बीच सरकार ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिये ‘नेशनल कूलिंग एक्शन प्लान’ पर काम कर रही है जिसके तहत इस प्रकार के कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा।

बिजली मंत्रालय के अधीन आने वाली एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लि. (ईईएसएल) के मुख्य महाप्रबंधक (प्रौद्योगिकी) एस पी गढ़नायक ने कहा कि हम ट्राइजनरेशन कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं। इसमें बिजली के साथ-साथ कूलिंग प्राप्त की जा सकती है। साथ ही पानी आदि गर्म करने के लिये जरूरी ऊष्मा भी प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तकनीक के लिए प्राक्रतिक गैस की जरूरत होती है। इसमें गैस इंजन के साथ जनरेटर लगाते हैं। इससे बिजली पैदा होगी। इंजन की कुछ गैस ऊपर चली जाती है जिसका तापमान काफी अधिक 400 से 600 डिग्री तक होता है जो पर्यावरण के लिहाज से नुकसानदायक होता है।

इस तकनीक में ऊपर जाने वाली गर्म गैस से ‘कूलिंग’ प्राप्त करने के लिये मशीन में ‘वैपोर एब्जार्प्शन मशीन’ (वीएएम) लगाया जाता है। इसके अलावा जो तापमान बच जाता है, उसका उपयोग पानी गर्म करने, खाना बनाने आदि बनाने में किया जा सकता है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ईईएसएल के पास इसके लिए जरूरी तकनीक है। कंपनी ने इसके लिये एक कंपनी का भी अधिग्रहण किया है। इस कंपनी से जरूरी मशीन मिलेगी। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया।

एक अन्य सवाल के जवाब में गढ़नायक ने बताया कि यह ईईएसएल का एक अलग कार्यक्रम होगा। होटल, अस्पताल और उद्योग के लिए उपयोगी इस तकनीक के जरिए बिजली की मौजूदा खपत के मुकाबले 30 से 35 प्रतिशत की बचत की जा सकती है। साथ ही इस परियोजना से करीब 20,000 मेगावाट स्वच्छ बिजली पैदा होने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि एम्स के ट्रॉमा सेंटर में पायलट आधार पर परियोजना चलायी जा रही है। इस परियोजना के उपयोग को लेकर कंपनी की ताज ग्रुप आफ होटल्स, महिंद्रा, एसीसी सीमेंट समेत अन्य कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। गढ़नायक के अनुसार अगले वित्त वर्ष में ऐसी कम से कम 10 परियोजनाएं लगाने की योजना है।

इसकी लागत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि एक मशीन लगाने में 5 से 6 करोड़ रुपये का निवेश होगा। पूरा पैसा ईईएसएल लगाएगी। ईईएसएल लीजिंग माडल या सर्विस माडल पर काम करेगी। यानी हर महीने संबंधित इकाई से कुछ समय तक निश्चित राशि लेगी।

इसमें चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गैस को लेकर थोड़ी समस्या है जिसके बारे में हमारी गेल के साथ बातचीत हुई है। सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी लि., पीएफसी, आरईसी और पावर ग्रिड की संयुक्त उद्यम ईईएसएल फिलहाल उजाला, स्मार्ट मीटर, इलेक्ट्रिक वाहन समेत ऊर्जा संरक्षण के लगभग 12 कार्यक्रम चला रही है।

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