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घर खरीदारों का पैसा बिल्‍डरों द्वारा कहीं और लगाना है गलत, हम इस बेतुकी हरकत को समाप्त करना चाहते हैं: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जमीन-जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों का निवेशकों से प्राप्त फंड का दूसरी जगह उपयोग एक ‘बुराई’ है और वह इस ‘बकवास’ को हमेशा के लिये रोकना चाहता है।

Edited by: Manish Mishra [Published on:02 Aug 2018, 1:05 PM IST]
Diversion of Funds by Builders- India TV Paisa

Diversion of Funds by Builders

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जमीन-जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों का निवेशकों से प्राप्त फंड का दूसरी जगह उपयोग एक ‘बुराई’ है और वह इस ‘बकवास’ को हमेशा के लिये रोकना चाहता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर रियल एस्टेट कंपनियां या बिल्डर किसी आवासीय परियोजना या वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए निवेशकों से प्राप्त धन का दूसरी परियोजनाओं को पूरा करने में उपयोग करते हैं, तो यह प्रथम दृष्ट्या गबन और आपराधिक विश्वासघात का मामला बनता है।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने संकटग्रस्त रीयल एस्टेट कंपनी आम्रपाली समूह से संबद्ध मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। पीठ ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कैसे आम्रपाली समूह ने 2,765 करोड़ रुपये का फंड कथित रूप से अन्य परियोजनाओं में किया।

न्यायालय ने कहा, ‘कैसे वे (चार्टर्ड एकाउंटेंट) इस प्रकार धन की हेराफेरी की अनुमति दे सकते हैं।’ पीठ ने कहा कि निवेशक ने किसी परियोजना को पूरा करने के लिये जो पैसा दिया है, उसका दूसरी परियोजनाओं में उपयोग नहीं हो सकता क्योंकि यह आपराधिक गबन है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह (फंड का दूसरी जगह उपयोग) एक समस्या है जो सभी बिल्डरों को प्रभावित कर रहा है। हम इस बेतुकी हरकत को हमेशा के लिये समाप्त करना चाहते हैं।

Web Title: घर खरीदारों का पैसा बिल्‍डरों द्वारा कहीं और लगाना है गलत, हम इस बेतुकी हरकत को समाप्त करना चाहते हैं: सुप्रीम कोर्ट
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