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फ्लिपकार्ट-अमेजन की त्योहारी सेल रोक लगाने की मांग, सीएआईटी ने सरकार को लिखा खत

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने सरकार को पत्र लिखकर ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा त्योहार के सीजन में भारी छूट देने पर रोक लगाने की मांग की है। ट्रेडर्स की यह प्रतिक्रिया फ्लिपकार्ट द्वारा 'दि बिग बिलियन डेज' सेल की तारीखों की घोषणा करने के कुछ दिनों बाद ही आई है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Updated on: September 15, 2019 11:38 IST
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नई दिल्ली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने सरकार को पत्र लिखकर ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा त्योहार के सीजन में भारी छूट देने पर रोक लगाने की मांग की है। ट्रेडर्स की यह प्रतिक्रिया फ्लिपकार्ट द्वारा 'दि बिग बिलियन डेज' सेल की तारीखों की घोषणा करने के कुछ दिनों बाद ही आई है। ट्रेडर्स ने फ्लिपकार्ट के अलावा इसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी अमेजन और इस तरह की अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों की त्योहारी सीजन की सेल पर नियंत्रण लगाने की मांग की है।

हाल ही में फ्लिपकार्ट ने घोषणा की थी कि दिवाली और दशहरा से पहले उसकी हर साल होने वाली छह दिवसीय सेल 29 सितंबर से शुरू होगी। अमेजन द्वारा उसकी वार्षिक बंपर सेल की तारीखों की घोषणा होना अभी बाकी है। त्योहार के इन दिनों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी छूट की पेशकश करते हैं। क्योंकि भारतीय त्योहारी सीजन के दौरान बड़े स्तर पर खरीदारी करते हैं।

सीएआईटी ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को लिखे एक पत्र में कहा, "ये कंपनियां अपने ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर 10 से लेकर 80 फीसदी तक की बड़ी छूट पेश करके स्पष्ट रूप से कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। कंपनियों द्वारा पेश की जा रही यह असमानता नीतियों का उल्लंघन है।" सीएआईटी ने कहा कि त्योहारी सीजन के दौरान विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफार्मो द्वारा दी जाने वाली बड़ी छूट का प्रचलन विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नियमों के खिलाफ है।

व्यापारियों के निकाय ने तर्क देते हुए कहा, "ये ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म खुले तौर पर एफडीआई मानदंडों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। त्योहार के समय लगाने वाली इन सेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए आदेश दिया जाना चाहिए। इस बात की भी जांच की जानी चाहिए कि ये कंपनियां किस तरह से एफडीआई मानदंडों का पालन कर रही हैं। इसके अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। एफडीआई नीति के अनुसार, ई-कॉमर्स कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री मूल्य को प्रभावित नहीं करेंगी और मूल्य के स्तर को बनाए रखेंगी।

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