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अच्छी बारिश से घटे दालों के दाम तो प्रमुख ब्‍याज दरों में हो सकती है 0.25% कटौती : बोफा-एमएल

अच्छी बारिश से यदि दालों की कीमत घटती है तो रिजर्व बैंक नौ अगस्त को होने वाली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्‍याज दर में 0.25 फीसदी कटौती कर सकता है।

Abhishek Shrivastava Abhishek Shrivastava
Updated on: July 21, 2016 13:59 IST
अच्छी बारिश से घटे दालों के दाम तो बैंक लोन होंगे सस्‍ते, RBI घटा सकता है 0.25 फीसदी ब्‍याज दर- India TV Paisa
अच्छी बारिश से घटे दालों के दाम तो बैंक लोन होंगे सस्‍ते, RBI घटा सकता है 0.25 फीसदी ब्‍याज दर

नई दिल्‍ली। अच्छी बारिश से यदि दालों की कीमत घटती है तो रिजर्व बैंक नौ अगस्त को होने वाली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्‍याज दर में 0.25 फीसदी कटौती कर सकता है। यह बात बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफा-एमएल) की रिपोर्ट  में कही गई है। इस बार रबी मौसम में कमजोर फसल की वजह से दालों की मंहगाई दर 27 फीसदी तक पहुंच गई है।

बोफा-एमएल ने एक अनुसंधान पत्र में कहा, अच्छी बारिश से खरीफ सत्र के दौरान पिछले साल के मुकाबले दलहन बुवाई 39 फीसदी अधिक हुई है। इससे दाल की कीमत 20 फीसदी घटनी चाहिए और खुदरा मुद्रास्फीति मार्च तक 5.1 फीसदी  पर आ जानी चाहिए।

वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक रिजर्व बैंक तीन वजहों -पहली, अच्छे मानसून से कृषि मुद्रास्फीति कम हो, दूसरी, जून की मुख्य खुदरा मुद्रास्फीति कम हो और आखिर में, ऊंची ब्याज दर लगातार मई की औद्योगिक वृद्धि के आड़े आए – यदि ये तीन वजह हुई तो रिजर्व बैंक नीतिगत दर में कटौती कर सकता है।

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रिपोर्ट में कहा गया है, यदि अच्छी बारिश से दाल की मुद्रास्फीति कम होती है, जैसी कि हमें उम्मीद है तो खुदरा मुद्रास्फीति मार्च 2017 तक रिजर्व बैंक के तय लक्ष्य पांच फीसदी के दायरे में बनी रह सकती है। बोफा-एमएल ने मार्च की अपनी खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान पहले के 5.7 फीसदी से घटाकर 5.1 फीसदी कर दिया है। यह रिजर्व बैंक के वर्ष के लिए तय लक्ष्य के अनुरूप है। उसका मानना है कि वर्षा से दाल-दलहन के दाम कम होंगे। वर्तमान में वर्षा सामान्य के मुकाबले 102 फीसदी पर चल रही है। बहरहाल, विनिर्मित और महंगे खाद्य उत्पादों की वजह से जून माह में थोक मुद्रास्फीति लगातार तीसरे माह बढ़ती हुई 1.62 फीसदी पर पहुंच गई। थोक मुद्रास्फीति में मजबूती का रुख खुदरा मुद्रास्फीति के बढ़ने से बना है। जून में खुदरा मुद्रास्फीति पिछले 22 माह के सर्वोच्च स्तर 5.77 फीसदी पर पहुंच गई।

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