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मध्य प्रदेश में समाने आया ई-टेंडरिंग घोटाला, वेबसाइट से छेड़छाड़ कर करोड़ों की हेराफेरी, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश में अभी इनकम टैक्स की रेड का मामला ठंडा भी नहीं पडा था कि राज्य सरकार की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने ई-टेंडरिंग घोटाले में FIR दर्ज की है।

Anurag Amitabh Anurag Amitabh
Updated on: April 10, 2019 21:47 IST
Representational Image- India TV
Representational Image

भोपाल: मध्य प्रदेश में अभी इनकम टैक्स की रेड का मामला ठंडा भी नहीं पडा था कि राज्य सरकार की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने ई-टेंडरिंग घोटाले में FIR दर्ज की है। इकोनॉमिक ऑफेंस विंग के डीजी के एन तिवारी ने बताया कि राज्य सरकार के 5 विभागों- मध्य प्रदेश जल निगम, पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन विभाग, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम और पीडब्ल्यूडी के पीआईयू विभाग के कुल 9 टेंडरों के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर कंपनी विशेष को फायदा पहुंचाया गया है। 

EOW के डीजी के मुताबिक करीब 3 हज़ार करोड़ के ई-टेंडरिंग घोटाले में नई दिल्ली की कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम के आधार पर FIR दर्ज की गई है। इसमें पाया गया है कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर कुछ कम्पनियों को लाभ पहुंचाया गया। EOW के डीजी के मुताबिक, इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा 7 कम्पनियों के डायरेक्टर्स, अज्ञात राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ आईपीसी की धारा 120(बी), 420, 468, 471 के अलावा आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 और भ्र्ष्टाचार निवारण (संशोधन) 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कांग्रेस के वचन पत्र में था ई-टेंडरिंग घोटाला

दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल समेत देश की राजधानी दिल्ली और गोवा में इनकम टैक्स की रेड पड़ने के ठीक बाद ई-टेंडरिंग घोटाले में FIR को कमलनाथ सरकार का बीजेपी को जवाब माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने इसका खंडन किया है। कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओज़ा का कहना है कि 'देखिए, ये तो सरकार में आने से पहले चाहे ई-टेंडरिंग हो, व्यापम हो, तमाम घोटालों के लिए, जिसने प्रदेश को दीमक की तरह चाट डाला था इसके लिए हमने अपने वचन पत्र में लिख था।’

शोभा ओज़ा ने कहा कि ‘हमने कहा था कि हम तमाम घोटालों की जांच करेंगे और उसमें कोई बच नहीं पाएगा। सरकार बनने के बाद तमाम कागजात इकट्ठे किए जा रहे थे और आज EOW ने FIR दर्ज की है। बड़ी खुशी की बात है कि प्रदेश की जनता की मांग थी और आज हमने अपना वचन पूरा किया।' 

क्या है ई-टेंडरिंग घोटाला?

दरअसल, मध्य प्रदेश के अलग-अलग विभागों में टेंडर प्रक्रिया में भ्र्ष्टाचार रोकने के लिए ई-टेंडर व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल बनाया गया था लेकिन आरोप है कि इसमे छेड़छाड़ कर के करोड़ों के घोटाले को अंजाम दिया गया।

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