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Sawan Month 2018: जानिए बेलपत्र तोड़ने और शिवलिंग में चढ़ाने का सही तरीका

हमारे धर्मशास्त्रों में ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिससे धर्म का पालन करते हुए पूरी तरह प्रकृति की रक्षा भी हो सके। यही वजह है कि देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल और पत्र को तोड़ने से जुड़े कुछ नियम बनाए गए हैं। साथ ही जानें कि भगवान शिव को कैसे अर्पित करें।

Written by: India TV Lifestyle Desk [Updated:03 Aug 2018, 6:47 PM IST]
sawan 2018- India TV
sawan 2018

धर्म डेस्क: सावन का महीना आते ही श्रद्धालु महादेव शंकर को प्रसन्न करने की कोशिश में जुट जाते हैं. शिवलिंग पर गंगाजल के साथ-साथ बेलपत्र भी चढ़ाने का विधान है. शि‍व को बेलपत्र अर्पित करते वक्त और इसे तोड़ते समय कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है.

बेलपत्र को संस्कृत में 'बिल्वपत्र' कहा जाता है। जो कि भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है। पूजा में इनका प्रयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। (Sawan 2018: भूलकर भी सावन में Veg समझकर न खाएं ये चीजें, पूरी तरह से हैं ये NonVeg )

हमारे धर्मशास्त्रों में ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिससे धर्म का पालन करते हुए पूरी तरह प्रकृति की रक्षा भी हो सके। यही वजह है कि देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल और पत्र को तोड़ने से जुड़े कुछ नियम बनाए गए हैं। साथ ही जानें कि भगवान शिव को कैसे अर्पित करें।

बेलपत्र तोड़ने के नियम:

भूलकर भी चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों के साथ-साथ सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़नी चाहिए।

शास्त्रों में कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र न मिल सके, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसी भी तरह का पाप नहीं लगेगा। जो स्कंदपुराम में बताया गया है। (Sawan 2018: सावन में भूलकर भी न करें ये 10 काम, होगा नुकसान ही नुकसान )

अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:।
शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि क्वचित्।। (स्कंदपुराण)

कभी भी बेलपत्र को टहनी सहित नहीं तोड़ना चाहिए। बल्कि बेलपत्र चुन-चुनकर तोड़ना चाहिए। जिससे कि वृक्ष को नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए।

ऐसे चढ़ाएं शिवलिंग पर बेलपत्र

  • शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए, यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए।
  • बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए। कोशिश करें तो बेलपत्र कटा-भटा न हो।
  • बेलपत्र 3 से लेकर 11 दलों तक के होते हैं। ये जितने अधिक पत्र के हों, उतने ही उत्तम माने जाते हैं।
  • शिवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए।

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