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Karva Chauth 2019: जानें कब निकलेगा आपके शहर में चांद, साथ ही जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

Karwa Chauth 2019 के दिन माता पार्वती और गणेश जी की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: October 17, 2019 17:16 IST

Karwa Chauth 2019: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस बार करवा चौथ का त्योहार 17 अक्टूबर, गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इस त्योहार को देशभर की सुहागिन महिलाएं बहूत ही धूमधाम से मनाती है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चांद का अर्ध्य कर व्रत का पारण किया जाता है। करवा चौथ के दिन माता पार्वती और गणेश जी की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। जानें  आचार्य इंदु प्रकाश से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा।

करवा चौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त (Karva Chauth Date and Time)

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 17 अक्‍टूबर की शाम 06 बजकर 48 मिनट।
चतुर्थी तिथि समाप्‍त: 18 अक्‍टूबर की सुबह  सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक।
करवा चौथ व्रत का समय: 17 अक्‍टूबर की सुबह 06 बजकर 27 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक.
कुल अवधि: 13 घंटे  50 मिनट।
पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक।
अवधि- 1 घंटे 16 मिनट

चन्द्रोदय का समय

आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय 06 बजकर 41 मिनट पर होगा।

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करवा चौथ में सरगी
करवा चौथ के दिन सरगी का बहुत अधिक महत्‍व है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्‍नान करने के बाद सरगी खाती हैं। सरगी सास तैयार करती हैं। इस सरगी में सूखे मेवे, नारियल, फल और मिठाई खाई जाती है। अगर सास नहीं है तो घर का कोई बड़ा भी अपनी बहू के लिए सरगी बना सकता है। सरगी सुबह सूरज उगने से पहले खाई जाती है ताकि दिन भर ऊर्जा बनी रहे।

करवा चौथ में सरगी खाने का शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि 17 अक्टूबर सुबह 06 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी। जिसके कारण इससे पहले महिलाओं को सरगी खानी होगी।

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करवा चौथ पूजा विधि

  • करवाचौथ पर महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं। इस दिन महिलाएं  चंद्रोदय पर चंद्रमा की पूजा संपन्न कर अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। कहा जाता है कि चांद देखे बिना व्रत अधूरा रहता है। चांद की पूजा से पहले कोई महिला न कुछ भी खा सकती हैं और न पानी पी सकती है।
  • इस दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान करती है। इसके बाद इस मंत्र का उच्चारण करके संकल्प लें-''मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये''।

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आज के दिन भगवान शिव, माता गौरी और गणेश जी की पूजा का विधान है। आज के दिन पूजा के लिये घर के उत्तर-पूर्व दिशा के कोने को अच्छे से साफ करके, लकड़ी का पाटा बिछाकर उस पर शिवजी, मां गौरी और गणेश जी की प्रतिमा, तस्वीर या चित्र रखने चाहिए। बाजार में करवाचौथ की पूजा के लिये कैलेण्डर भी मिलते हैं, जिस पर सभी देवी-देवताओं के चित्र बने होते हैं। इस प्रकार देवी-देवताओं की स्थापना करके पाटे की उत्तर दिशा में एक जल से भरा लोटा या कलश स्थापित करना चाहिए और उसमें थोड़े-से चावल डालने चाहिए। अब उस पर रोली, चावल का टीका लगाना चाहिए और लोटे की गर्दन पर मौली बांधनी चाहिए। कुछ लोग कलश के आगे मिट्टी से बनी गौरी जी या सुपारी पर मौली लपेटकर भी रखते हैं।

इस प्रकार कलश की स्थापना के बाद मां गौरी की पूजा करनी चाहिए और उन्हें सिंदूर चढ़ाना चाहिए।

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इस दिन चीनी से बने करवे का भी पूजा में बहुत महत्व होता है। कुछ लोग मिट्टी से बना करवा भी रख लेते हैं। आज के दिन चार पूड़ी और चार लड्डू तीन अलग-अलग जगह लेकर, एक हिस्से को पानी वाले कलश के ऊपर रख दें, दूसरे हिस्से को मिट्टी या चीनी के करवे पर रखें और तीसरे हिस्से को पूजा के समय महिलाएं अपने साड़ी या चुनरी के पल्ले में बांध लें। कुछ जगहों पर पूड़ी और लड्डू के स्थान पर मीठे पुड़े भी चढ़ाये जाते हैं। आप अपनी परंपरा के अनुसार चुनाव कर सकते हैं। अब देवी मां के सामने घी का दीपक जलाएं और उनकी कथा पढ़ें। इस प्रकार पूजा के बाद अपनी साड़ी के पल्ले में रखे प्रसाद और करवे पर रखे प्रसाद को अपने बेटे या अपने पति को खिला दें और कलश पर रखे प्रसाद को गाय को खिला दें। बाकी पानी से भरे कलश को पूजा स्थल पर ही रखा रहने दें। रात को चन्द्रोदय होने पर इसी लोटे के जल से चन्द्रमा को अर्घ्य दें और घर में जो कुछ भी बना हो, उसका भोग लगाएं। इसके बाद व्रत का पारण करें।

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