1. You Are At:
  2. Hindi News
  3. लाइफस्टाइल
  4. जीवन मंत्र
  5. Chhath Puja 2017: इस समय छठ पूजा करना होगा शुभ, ये है महत्व, पूजा विधि और कथा

Chhath Puja 2017: आज शाम को इस समय करें अर्ध्य, ये है महत्व, पूजा विधि और कथा

धर्म शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस छठ पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। छठ पूजा कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी तक होता है। जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा के बारें में..

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: October 26, 2017 12:14 IST

chhat puja

chhat puja

ऐसे करें पूजा
स्नान करने के बाद नदी के तट पर जाएं और आचमन करें इसके बाद सूर्योदय के समय अपने शरीर पर मिट्टी लगाकर नदी पर स्नान करें। इसके बाद दुबारा आचमन कर कपड़े पहने और इस सप्ताक्षर मंत्र को बोलते हुए ऊं खखोल्काय स्वाहा सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान सूर्य देव को लाल फूल, लाल रंग का कपड़ा और रक्त चंदन अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर आरती करें इसके बाद पीले रंग की मिठाई से भोग लगाएं। फिर हाथ जोड़कर इस शिव प्रोक्त सूर्याष्टक का पाठ करें

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर मनोस्तु ते।।
सप्ताश्चरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्ममज्म।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यम्।।
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यम्।।
बृंहितं तेज:पुजं च वायु माकाशमेव च।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।
बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम्।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज: प्रदीपनम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।
तं सूर्य जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणामाम्यहम्।।

इसके बाद अपनी भूल-चूक की माफी मांगे। इससे सूर्य देव जल्द ही प्रसन्न होगे और आपको मनवांछित फलों की प्राप्ति होगी।

जानिए छठ व्रत कथा
राम और सीता ने भी छठ पूजा की थी। शास्त्रों के अनुसार जब भगवान श्री राम वनवास से वापस आए तब राम और सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन व्रत रख कर रखकर भगवान सूर्य की आराधना की और सप्तमी के दिन यह व्रत पूरा किया। इसके बाद राम और सीता ने पवित्र सरयू के तट पर भगवान सूर्य का अनुष्ठान कर उन्हें प्रसन्न किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था।

अन्य कथा
महाभारत की द्रोपदी ने भी इस व्रत को रखा था। शास्त्रों के अनुसार जब पांडव अपना पूरा राजपाठ कौरवों से जुए में हार गए थे और वह जंगल-जंगल भटक रहे थे। यह सब द्रौपदी से देखा न गया और उसने छठ पूजा की और व्रत रखा। जिसके प्रभाव के कारण पांडवों को अपना खोया हुआ राज वापस मिल गया था।

अगली स्लाइड में पढ़े और कथा के बारें में

India TV पर देश-विदेश की ताजा Hindi News और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ते हुए अपने आप को रखिए अप-टू-डेट। Religion News in Hindi के लिए क्लिक करें लाइफस्टाइल सेक्‍शन
Write a comment