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स्वस्थ जीवनशैली के लिए 'डीटॉक्सीफिकेशन' है सबसे मददगार

स्वस्थ जीवनशैली प्राप्त करने के लिए डीटॉक्सीफिकेशन एक अच्छा विकल्प है। यह शरीर का वजन घटाने में, उपवास के दौरान अंगों को आराम पहुंचाने, रक्त संचार सुधारने में और पसीना व मूत्र के माध्यम से शरीर से दूषित पदार्थो को बाहर करने में मदद करता है तथा शरीर को स्वस्थ पोषण प्रदान करता है।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Published on: January 20, 2019 10:48 IST
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हेल्थ डेस्क: स्वस्थ जीवनशैली प्राप्त करने के लिए डीटॉक्सीफिकेशन एक अच्छा विकल्प है। यह शरीर का वजन घटाने में, उपवास के दौरान अंगों को आराम पहुंचाने, रक्त संचार सुधारने में और पसीना व मूत्र के माध्यम से शरीर से दूषित पदार्थो को बाहर करने में मदद करता है तथा शरीर को स्वस्थ पोषण प्रदान करता है। डीटॉक्सीफिकेशन के दौरान कुछ बातों को ध्यान में रखना अत्यधिक जरूरी है। केवल विशेषज्ञ की मदद से डीटॉक्सीफिकेशन करें। अपने आहार में केवल हर्बल (प्राकृतिक) पदार्थो को ही शामिल करें, क्योंकि इसका साइड इफेक्ट नहीं होता।

आयुर्वेदिक परामर्श लें और प्राकृतिक उपचार अपनाएं। व्यायाम सबसे जरूरी चीज है। केवल पोषण विशेषज्ञ द्वारा आपके शरीर के हिसाब से बताए गए आहार का ही सेवन करें। 

इन अच्छी आदतों को अपनाने से आपके शरीर को हमेशा ऊर्जावान रहने में मदद मिलेगी, ताकि आप उत्साह के साथ अपने काम का आनंद ले सकें। हीलयोरबॉडी एक ऐसा मंच है जो आपको अपने शरीर की मांग को समझने और ऊर्जा प्राप्त करने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्राकृतिक उपचार प्रदान करने में मदद करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि करीब 43 फीसदी कार्यबल सप्ताह के ज्यादातर दिनों में थकान महसूस करते हैं। इन आंकड़ों को देखकर पता लगता है कि लोगों की कितनी बड़ी संख्या है जिन्हें अपनी जीवनशैली का मूल्यांकन करने की जरूरत है। 

कई लोगों के मन में यह धारणा होती है कि रोजाना एक निश्चित व्यवस्था का अनुसरण करने से शरीर डीटॉक्सीफाई होता है और ऊर्जा वापस आती है। लेकिन यह गलत भी हो सकता है। इसलिए आपको समझने की जरूरत है कि आपके शरीर पर कौन सा तरीका सबसे अच्छी तरह कारगर होगा। 

ज्यादातर मामलों में एक स्वस्थ जीवनशैली प्राप्त करने के लिए डीटॉक्सीफिकेशन एक अच्छा विकल्प है। यह शरीर का वजन घटाने में, उपवास के दौरान अंगों को आराम पहुंचाने, रक्त संचार सुधारने में और पसीना व मूत्र के माध्यम से शरीर से दूषित पदार्थो को बाहर करने में मदद करता है तथा शरीर को स्वस्थ पोषण प्रदान करता है। 

ब्रिटिश डायटिक एसोसिएशन लि. की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि डीटॉक्सीफिकेशन हमेशा सफल नहीं होगा। इस अध्ययन के निष्कर्षो से पता चलता है कि ज्यादा डीटोक्स केवल गुर्दे का होता है और उसका केवल अल्पकालिक लाभ होता है। इसमें बताया गया है कि डीटोक्स के दौरान लिए जाने वाले आहार को बाजार में केवल जानवरों पर परीक्षण कर बेचा जा रहा है और उसका किसी प्रकार का रैंडमाइज कंट्रोल्ड परीक्षण नहीं किया जाता। इसलिए किसी भी डीटॉक्स कार्यक्रम को अपनाने से पहले इसकी प्रभावकारिता को जांच लेनी चाहिए। 

हालांकि लोग स्वस्थ जीवनशैली के साथ डीटोक्सीफिकेशन के लिए अगर किसी डाइट को अपनाते हैं तो हमेशा विशेषज्ञ की सिफारिश के बाद ही किसी डाइट को अपनाना चाहिए। किसी प्रकार के ड्रग या अल्कोहल के माध्यम से डीटॉक्सीफिकेशन करना कुछ मामलों में खतरनाक भी हो सकता है। इससे लोगों को खूब पसीना आना, उल्टी आना, दस्त लगना, मतली, कंपकंपी और व्यग्रता जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। 

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