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तो इस वजह से एक दशक में दोगुनी बढ़ी है सिजेरियन डिलीवरी

एक दशक में सिजेरियन डिलीवरी में दोगुना वृद्धि हुई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएचएफएस) की तीसरी रिपोर्ट (2005-06) में यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत था जबकि सर्वे की चौथी रिपोर्ट (2015-16) में सिजेरियन (ऑपरेशन) के जरिये 17.2 फीसदी बच्चों का जन्म हुआ।

Edited by: India TV Lifestyle Desk [Published on:29 Jan 2018, 1:41 PM IST]
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नई दिल्ली: एक दशक में सिजेरियन डिलीवरी में दोगुना वृद्धि हुई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएचएफएस) की तीसरी रिपोर्ट (2005-06) में यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत था जबकि सर्वे की चौथी रिपोर्ट (2015-16) में सिजेरियन (ऑपरेशन) के जरिये 17.2 फीसदी बच्चों का जन्म हुआ। करीब एक दशक में दोगुनी वृद्धि चौंका देने वाली है। 

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यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानक से कहीं ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ ने अप्रैल 2015 में एक बयान जारी कर कहा था कि आबादी के हिसाब से सिजेरियन डिलीवरी की दर अगर 10 फीसदी से ज्यादा है तो यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने से जुड़ा नहीं है।  देश भर के कई अस्पतालों पर मरीजों के साथ धोखाधड़ी, लापरवाही, जरूरत से ज्यादा बिल और रुपये ऐंठने के मामले सामने आते रहे हैं, ऐसे में एक दशक में सिजेरियन डिलीवरी में दोगुनी वृद्धि कई सवाल पैदा करती है। 

देश भर में बढ़ रहे इस तरह के ऑपरेशन के मामलों से चिंतित होकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी राज्यसभा में एनएचएफएस की चौथी रिपोर्ट के बारे में अवगत कराया था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस आंकड़े की गंभीरता को समझते हुए राज्यों को दिशा-निर्देश भी जारी किया था। 

रिपोर्ट के मुताबिक देश भर के राज्यों में ऑपरेशन के जरिए होने वाले बच्चों का प्रतिशत भी चिंताजनक है, सबसे ज्यादा हालात आंध्र प्रदेश में खराब हैं, जहां ऑपरेशन के जरिए 40.1 फीसदी बच्चे पैदा हुए। इसके बाद लक्षद्वीप में 37.1, केरल 35.8, तमिलनाडु 34.1, पुडुचेरी 33.6, जम्मू एवं कश्मीर 33.1 और गोवा में 31.4 फीसदी बच्चे ऑपरेशन के जरिए पैदा हुए हैं। 

वहीं दिल्ली में ऑपरेशन के जरिए पैदा होने वालों बच्चों का प्रतिशत 23.7 है। देश के सबसे बड़े आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत 9.4 है। वहीं सबसे कम प्रतिशत नगालैंड में हैं जहां 5.8 फीसदी बच्चे ऑपरेशन के माध्यम से पैदा होते हैं। 

नेशनल सैंपल सर्वे (2014) के मुताबिक देशभर में 72 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 79 प्रतिशत आबादी निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं और सरकारी अस्पताल के मुकाबले उन्हें इलाज पर चार गुना ज्यादा खर्च करना पड़ता है। 

सिजेरियन डिलीवरी इस कदर तेजी से क्यों बढ़ रही है इस मुद्दे पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात चिकित्सक के.के. अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा, "देश के अलग अलग हिस्सों में सामान्य रूप से और ऑपरेशन के जरिए पैदा होने वाले बच्चों का अंतर अस्पताल में गर्भावस्था में पहुंची मां पर निर्भर करता है। अगर मां अस्पताल में देरी से पहुंचती है तो फिर चिकित्सकों के पास ऑपरेशन करना पहला विकल्प रहता है क्योंकि उन्हें बच्चे को बचाना होता है।"

उन्होंने बताया, "आज के मुकाबले पहले की तुलना में चिकित्सक जोखिम लेने से डरते हैं क्योंकि हालात पहले की तरह अनुकूल नहीं रहे। पहले चिकित्सक मां के देरी से आने के बाद भी जोखिम लेकर सामान्य तरह से बच्चे को बचाने की कोशिश करते थे लेकिन बदलते हालातों में यह संभव नहीं है।"

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Web Title: Long term risks and benefits of Cesarean Delivery revealed: तो इस वजह से एक दशक में दोगुनी बढ़ी है सिजेरियन डिलीवरी
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