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Alert: देश में बच्चों को तेजी से बढ़ रहे है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, ऐसे करें बचाव

एक बयान में बताया गया है कि अध्ययन के मुताबिक, उच्च बीपी वाले 23 प्रतिशत बच्चों में से 13.6 प्रतिशत में सिस्टोलिक हाइपरटेंशन देखने को मिला, वहीं 15.3 प्रतिशत में डायस्टोलिक हाइपरटेंशन और 5.9 प्रतिशत में दोनों ही देखने को मिले।

Written by: India TV Lifestyle Desk [Published on:05 Oct 2018, 4:08 PM IST]
Blood Pressure- India TV
Blood Pressure

हेल्थ डेस्क: भारत के चार राज्यों के ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 23 प्रतिशत बच्चे उच्च रक्तचाप (बीपी) की समस्या से पीड़ित मिले हैं। एक हालिया अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। एक बयान में बताया गया है कि अध्ययन के मुताबिक, उच्च बीपी वाले 23 प्रतिशत बच्चों में से 13.6 प्रतिशत में सिस्टोलिक हाइपरटेंशन देखने को मिला, वहीं 15.3 प्रतिशत में डायस्टोलिक हाइपरटेंशन और 5.9 प्रतिशत में दोनों ही देखने को मिले।

बयान में कहा गया है कि बचपन में हाई बीपी से वयस्क होने पर हृदय रोगों की शुरुआत होने का भय रहता है। मोटापे से ग्रस्त या अधिक वजन वाले बच्चों में, अगर समय पर जांच और उपयार न हो तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। बैठे रहने वाली जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर भोजन इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं, जिनको रोकने के लिए स्कूलों को पहल करनी चाहिए। (सुष्मिता सेन की बैक मसल्स की ये तस्वीर हो रही है काफी वायरल, जानिए इसकी वजह )

जंकफूड भी हो सकता है इसका कारण

बयान में हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "आजकल के बच्चे जीवन के शुरुआती चरण में ही विभिन्न प्रकार के जंक फूड के संपर्क में आ जाते हैं। यह खाद्य पदार्थ दुकानों व घरों में लंबे समय तक रखे रहते हैं, जिसके लिए उनमें अत्यधिक मात्रा में नमक और चीनी मिलाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ब्राउन शुगर, गुड़ और पाम शुगर का उपभोग करना एक अच्छा विचार हो सकता है।" (डायबिटीज से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा, मधुमेह से बचने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय )

उन्होंने कहा, "जिस चावल का हम आज उपभोग करते हैं, वह भी अत्यधिक परिष्कृत या प्रोसेस्ड होता है और केवल 90 मिनट में ही पच जाता है। इससे ग्लूकोज के स्तर में वृद्धि होती है और हमें अक्सर भूख लगती रहती है, जिससे दिन में बार-बार कुछ खाते रहने की इच्छा बनी रहती है।"

उन्होंने कहा कि हाइपरटेंशन को बार-बार ऊंचे होते रक्तचाप के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो 90 मिमीएचजी से ऊपर 140 तक पहुंच जाता है। इससे हृदय रोग और स्ट्रोक हो सकता है, जो भारत में मृत्यु के दो प्रमुख कारण हैं।

डॉ. अग्रवाल ने बताया, "बच्चों में शुरुआत से ही अच्छे पोषण संबंधी आदतें विकसित करना महत्वपूर्ण है। छोटी उम्र से ही पर्याप्त शारीरिक गतिविधि सुनिश्चित करना हर बच्चे के विकास का एक समान रूप से महत्वपूर्ण पहलू है। जीवन शैली की बीमारियों की रोकथाम शुरू होनी चाहिए। स्कूल अपने छात्रों के जीवन को सही दिशा देने में मदद कर सकते हैं और बचपन में मोटापे के खिलाफ लड़ाई में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बचपन की स्वस्थ आदतें आगे के स्वस्थ जीवन की नींव रखती हैं।"

ऐसे रखें अपने बच्चों को हेल्दी
डॉ. अग्रवाल ने सुझाव देते हुए कहा, "बच्चों में शुरू से ही खाने की अच्छी आदतों को प्रोत्साहित करें। उनके पसंदीदा व्यंजनों को सेहत के लिए उचित तरीके से बनाने का प्रयास करें। कुछ बदलावों से स्नैक्स को भी स्वास्थ्यप्रद बनाया जा सकता है। कैलोरी से भरपूर भोजन से बच्चों को दूर ही रखें। उन्हें ट्रीट देने में हर्ज नहीं है, लेकिन संयम के साथ और वसा, चीनी व नमक की मात्रा का ध्यान रखते हुए। बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का महत्व समझाएं।"

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Web Title: High blood pressure symptoms in children in hindi
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