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गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचने के ये हैं 5 आसान तरीके, पढ़िए पूरी खबर

उत्तरी राज्यों में गर्मी की लहर तेज होने के साथ बच्चों, बुजुर्गो और पहले से बीमार लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: June 03, 2019 6:52 IST
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नई दिल्ली: उत्तरी राज्यों में गर्मी की लहर तेज होने के साथ बच्चों, बुजुर्गो और पहले से बीमार लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। गंभीर गर्मी के संपर्क में आने से शरीर में ऐंठन, थकावट और हीट-स्ट्रोक सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए खूब पानी पीएं, ताकि शरीर 'हाइड्रेटेड' रहे।

गर्मी से थकावट, हीट-स्ट्रोक, बुखार, शरीर में पानी की कमी हो सकती है और अन्य लक्षण- जैसे सिरदर्द, प्यास, मतली या उल्टी, नाड़ी तेज चलना आदि प्रकट हो सकते हैं। थकावट और हीट स्ट्रोक के बीच मुख्य अंतर यह है कि हीट स्ट्रोक में पसीना नहीं निकलता है। 

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल का कहना है कि गर्मी की थकावट तब महसूस होती है, जब तापमान 37 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। हीट स्ट्रोक में तापमान बहुत अधिक होता है, और कुछ ही मिनट के अंदर इसे कम करने की जरूरत होती है।

उन्होंने बताया, "नम स्पंज के उपयोग से ठंडे या टैपिड स्नान की मदद से शरीर को ठंडा किया जा सकता है। हालांकि पानी में गहरे जाने या कूलिंग ब्लेंकेट के उपयोग से बचें। कुछ सावधानियां जरूरी हैं, जैसे पसीना आना, शुष्क बगल, 8 घंटे तक मूत्र न आना या गर्मियों में उच्च बुखार होना। यदि ये लक्षण प्रकट होते हैं तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। इस मौसम में खास सावधानी बरतनी चाहिए। जिन लोगों को तरल या नमक लेने पर प्रतिबंध है या जो मूत्रवर्धक दवा ले रहे हैं, उन्हें तुरंत किसी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।"

डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, "ज्येष्ठ (मई) का महीना पानी के संरक्षण, जल स्वच्छता बनाए रखने और लोगों को जलदान करने के लिए जाना जाता है। इसका ध्यान तो रखें ही, शौचालय जाने के बाद हाथ धोना, स्नान करना और नियमित रूप से कपड़े और बर्तन धोना भी महत्वपूर्ण है। स्वच्छता की अनुपस्थिति में कोई व्यक्ति डायरिया, टाइफाइड और पीलिया से पीड़ित हो सकता है। गर्मी के विकारों से बचने के लिए सुनिश्चित करें कि आपका शरीर पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड रहे।"

उन्होंने कहा कि गर्मियों के दौरान हर किसी के लिए एक 'मेडिकल व्रत' का महत्व रेखांकित किया जाना चाहिए। व्रत का सबसे सरल तरीका यह हो सकता है कि हफ्ते में एक बार कार्बोहाइड्रेट नहीं खाया जाए, बल्कि सिर्फ फलों व सब्जियों से पेट भरा जाए।

डॉ. अग्रवाल के कुछ सुझाव :

तापमान अधिक होने पर धूप में लंबे समय तक रहने से बचें। यदि आपको बाहर जाने की जरूरत है तो छतरी का उपयोग करें। गर्मी के अवशोषण से बचने के लिए हल्के सूती कपड़े पहनें। सुनिश्चित करें कि आप गर्मी में बाहर निकलने से पहले ठीक से हाइड्रेटेड हैं। गर्मियों में पानी की जरूरत सर्दियों के मुकाबले 500 मिलीलीटर अधिक है। समर ड्रिंक्स को ताजा और ठंडा होना चाहिए जैसे कि पन्ना, खसखस, गुलाब जल, नींबू पानी, बेल शरबत और सत्तू का शर्बत आदि। 

 किसी भी पेय में 10 प्रतिशत से अधिक चीनी होने पर वो सॉफ्ट ड्रिंक बन जाता है और उससे बचना चाहिए। आदर्श रूप से, चीनी, गुड़ या खांड का प्रतिशत 3 होना चाहिए, जोकि ओरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक में होता है। 8 घंटे में कम से कम एक बार मूत्र आने का मतलब है कि हाइड्रेशन ठीक से हो रहा है। यदि आप गर्मी में ऐंठन महसूस करते हैं, तो चीनी और नमक के साथ नींबू-पानी खूब पीएं।

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