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कर्नाटक के बाद अब एमपी की बारी? शिवराज ने कहा-प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह

बता दें कि मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के लिए वोटिंग हुई, जिसमें कुमारस्वामी सरकार को 99 विधायकों का समर्थन मिला जबकि बीजेपी के पक्ष में 105 वोट पड़े।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: July 24, 2019 8:10 IST
कर्नाटक के बाद अब एमपी की बारी? शिवराज ने कहा-प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह- India TV
कर्नाटक के बाद अब एमपी की बारी? शिवराज ने कहा-प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह

नई दिल्ली: कर्नाटक में कुमारस्वामी की सरकार गिरने के बाद अब खतरा मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर भी मंडराने लगा है। बीजेपी ने दावा किया है कि आंतरिक कलह से कर्नाटक की तरह मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार भी जल्दी ही गिर जाएगी। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि कमलनाथ की सरकार गिराने के लिए बीजेपी नेताओं को सात जन्म लेने पड़ेंगे। प्रदेश की कमलनाथ सरकार को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है जिसे हवा दे रहे हैं खुद एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के दूसरे नेता। इनका साफ-साफ कहना है कि एमपी में भी कांग्रेस आंतरिक विरोध से सत्ता गंवा सकती है।

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पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'हम यहां (मध्य प्रदेश) की सरकार के पतन का कारण नहीं बनेंगे। कांग्रेस के नेता स्वयं अपनी सरकारों के पतन के लिए जिम्मेदार हैं। कांग्रेस में एक आंतरिक संघर्ष है, और बीएसपी-एसपी का समर्थन है, अगर ऐसा कुछ होता है तो हम कुछ नहीं कर सकते।' 

दरअसल, मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार एसपी और बीएसपी विधायकों समेत कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर टिकी है। ऐसे में बीजेपी नेताओं के दावों को हवा भी मिल रही है लेकिन कांग्रेस नेता ऐसे किसी भी खतरे से इनकार कर रहे हैं। कमलनाथ सरकार में मंत्री जीतू पटवारी का कहना है कि कमलनाथ सरकार को गिराने लिए विरोधियों को सात जन्म लेने होंगे।

बताते हैं कि आखिर बीजेपी को क्यों लगता है कि वो कर्नाटक जैसा कुछ उलट-फेर मध्य प्रदेश में भी कर सकती है। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल सीटें 230 हैं और बहुमत के लिए जरूरी है 116 सीट। इनमें से कांग्रेस के पास 114 सीटें हैं जबकि बीजेपी की 109 सीटें हैं। इनके अलावा बीएसपी और एसपी के एक-एक जबकि 4 निदर्लीय विधायक हैं।

जाहिर है कि कमलनाथ सरकार के पास बहुमत से दो सीट कम है और वो निर्दलीय और एसपी-बीएसपी विधायकों के सहारे सत्ता में टिकी हुई है। अगर बीजेपी कांग्रेस के विधायकों को या फिर निर्दलीय और एसपी-बीएसपी विधायकों को तोड़ने में सफल हुई तो फिर कमलनाथ सरकार भी संकट में आ सकती है।

बता दें कि मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के लिए वोटिंग हुई, जिसमें कुमारस्वामी सरकार को 99 विधायकों का समर्थन मिला जबकि बीजेपी के पक्ष में 105 वोट पड़े। इसके बाद से यह आशंका जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश में भी कर्नाटक जैसे हालात बन सकते हैं। 

इन आशंकाओं को उस समय और बल मिला जब प्रदेश के पूर्व सीएम चौहान ने कांग्रेस सरकार के आंतरिक मतभेदों पर टिप्पणी की। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस और बीएसपी-एसपी के विधायकों में काफी आंतरिक मतभेद हैं। ऐसे में अगर कमलनाथ सरकार के साथ कुछ भी होता है तो वह कुछ नहीं कर पाएंगे।

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