1. You Are At:
  2. Hindi News
  3. भारत
  4. राजनीति
  5. BJP से गठबंधन टूटने के बाद पहली बार बोलीं महबूबा, अमित शाह के बयान पर दिया ऐसा जवाब

BJP से गठबंधन टूटने के बाद पहली बार बोलीं महबूबा, अमित शाह के बयान पर दिया ऐसा जवाब

महबूबा मुफ्ती ने रविवार को अपने ऊपर लगे जम्मू और लद्दाख क्षेत्र के साथ भेदभाव के आरोपों को प्रभावी रूप से खारिज कर दिया और आश्चर्य जताया कि अगर यह सत्य है तो अबतक किसी भी भाजपा मंत्री ने इसके बारे में क्यों नहीं कहा...

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: June 24, 2018 19:04 IST
mehbooba mufti and amit shah- India TV
mehbooba mufti and amit shah

श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को अपने ऊपर लगे जम्मू और लद्दाख क्षेत्र के साथ भेदभाव के आरोपों को प्रभावी रूप से खारिज कर दिया और आश्चर्य जताया कि अगर यह सत्य है तो अबतक किसी भी भाजपा मंत्री ने इसके बारे में क्यों नहीं कहा। ट्वीट की एक श्रंखला में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख ने कहा कि राज्य में पीडीपी-भाजपा शासन के दौरान जो कुछ भी हुआ, दोनों पार्टियों के गठबंधन के एजेंडे के तहत हुआ।

उन्होंने एक दिन पहले जम्मू में अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमारे पूर्व गठबंधन सहयोगी द्वारा हमारे खिलाफ कई झूठे आरोप लगाए गए।" उन्होंने कहा, "एजेंडे के प्रति हमारी वचनबद्धता कभी भी अस्थिर नहीं हुई। इस एजेंडे के सह-लेखक भाजपा नेता राम माधव थे और राजनाथ (सिंह) जैसे वरिष्ठ नेताओं ने इस एजेंडे का समर्थन किया था। उनके द्वारा अपनी ही पहल को अस्वीकार करना और इसे एक 'नरम दृष्टिकोण' करार देना दुखद है।"

महबूबा ने कहा, "अनुच्छेद 370 की यथास्थिति बनाए रखना, पाकिस्तान व हुर्रियत के साथ संवाद एजेंडे के हिस्से थे। संवाद को प्रोत्साहन, पत्थरबाजों के खिलाफ मामले वापस लेना और एकतरफा संघर्षविराम जमीन पर विश्वास बहाली के लिए अत्यंत जरूरी कदम थे। इसे भाजपा ने मान्यता और समर्थन दिया था।" उन्होंने कहा, "जम्मू एवं लद्दाख के साथ भेदभाव के आरोपों का वास्तव में कोई आधार नहीं है। हां, (कश्मीर) घाटी में लंबे समय से उथल-पुथल रही है और 2014 की बाढ़ राज्य के लिए एक झटका थी, इसलिए यहां ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता थी। इसका यह मतलब नहीं है कि किसी जगह कम विकास किया गया।"

महबूबा ने कहा, "अगर कुछ है तो उन्हें (भाजपा) अपने मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए, जो व्यापक रूप से जम्मू क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर ऐसी कोई चिंताएं थीं, तो उनमें से किसी ने भी राज्य या केंद्रीय स्तर पर पिछले तीन वर्षों के दौरान इसके बारे में बात क्यों नहीं की।" महबूबा ने कहा कि रसाना दुष्कर्म व हत्या मामले को सीबीआई को नहीं सौंपने, दुष्कर्म समर्थक मंत्रियों को कैबिनेट से हटाने और गुर्जर व बकरवाल समुदाय का उत्पीड़न नहीं करने का आदेश जारी करना मुख्यमंत्री के रूप में उनके कर्तव्य को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, "शुजात (बुखारी) की हत्या के बाद जम्मू एवं कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी के बारे में चिंता जताने के बाद उनके विधायक अभी भी घाटी के पत्रकारों को धमका रहे हैं। तो अब वे उनके बारे में क्या करेंगे?"

India TV Hindi पर देश-विदेश की ताजा Hindi News और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ते हुए अपने आप को रखिए अप-टू-डेट। Politics News in Hindi के लिए क्लिक करें भारत सेक्‍शन
Write a comment
bigg-boss-13