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उल्फा नेता चेतिया को लाया गया गुवाहाटी, अदालत में किया गया पेश

गुवाहाटी: बांग्लादेश से प्रत्यर्पित किये गए उल्फा नेता अनूप चेतिया को सीबीआई आज ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाई और कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। पिछले 18 साल से बांग्लादेश

Bhasha [Published on:18 Nov 2015, 1:03 PM IST]
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उल्फा नेता चेतिया को लाया गया गुवाहाटी

गुवाहाटी: बांग्लादेश से प्रत्यर्पित किये गए उल्फा नेता अनूप चेतिया को सीबीआई आज ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाई और कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। पिछले 18 साल से बांग्लादेश में कैद चेतिया को 11 नवंबर को भारत को सौंप दिया गया था। विशेष विमान से उसे यहां लाया गया और सुरक्षा में चल रहीं दो गाडि़यों की अगुवाई में काफिले के साथ एलजीबी एयरपोर्ट के कार्गो गेट से बाहर लाया गया। साथ में पुलिस के कई वाहन पीछे पीछे चल रहे थे।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 48 वर्षीय चेतिया का चेहरा ढका हुआ था। एयरपोर्ट से उसे सीधे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कामरूप के समक्ष ले जाया गया। इंतजार कर रहे पत्रकारों और उग्रवादी नेता को देखने के लिए जमा भारी भीड़ से बचने के लिए उसकी गाड़ी अदालत परिसर के भीतर ले जायी गयी। चेतिया के वकील बिजन महाजन ने अदालत में इंतजार कर रहे पत्रकारों को बताया कि वे अपने मुवक्किल की जमानत के लिए याचिका दायर करेंगे। सरकार के साथ शांति वार्ता में हिस्सा ले रहे उसके परिवार के सदस्य और सहयोगी एयरपोर्ट पर इंतजार कर रहे थे लेकिन उन्हें चेतिया से मिलने की इजाजत नहीं दी गयी।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह साफ नहीं है कि चेतिया को दिल्ली से सीधे लाया गया, जहां सीबीआई ने उसे बांग्लादेश द्वारा भारत के हवाले किए जाने के बाद गिरफ्तार किया था या फिर कोलकाता से लाया गया। चेतिया की पत्नी मोनिका बरूआ, उल्फा का विदेश सचिव सासा चौधरी, और शांति वार्ता के समर्थक उल्फा नेता अदालत परिसर में मौजूद थे लेकिन उन लोगों को मिलने की अनुमति नहीं दी गयी क्योंकि उसे तुरंत अदालत के भीतर ले जाया गया। अदालत के आसपास भारी पुलिस बंदोबस्त और बैरिकेड लगाए गए थे।

वर्ष 1997 में गिरफ्तारी के बाद से चेतिया बांग्लादेश में था। गत 11 नवंबर को उसे भारत के हवाले कर दिया गया जिसके बाद दिल्ली में उसे सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। अनूप चेतिया का असली नाम गोलप बरूआ है। वह उल्फा का संस्थापक सदस्य और उसका महासचिव है। वह सुनील बरूआ, भाईजान और अहमद के नाम से भी जाना जाता है। असम के तिनसुकिया जिले के जेराई गांव में जन्मा चेतिया राज्य के अति वांछित अपराधियों में से एक था।

भारत में हत्या, अपहरण और फिरौती के मामले में वांछित चेतिया को 1991 में गिरफ्तार किया गया और जेल से रिहा होने के बाद वह फरार हो गया था । दिसंबर 1997 में उसे बांग्लादेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहां उसे सीमा पार घुसपैठ, फर्जी पासपोर्ट और अवैध जाली मुद्रा रखने के जुर्म में सात जेल की सजा सुनायी गयी थी। सात साल बीतने के बाद भी चेतिया को जेल में रहना पड़ा क्योंकि उस समय भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं थी।

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