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आर्मी चीफ बिपिन रावत का बड़ा बयान, कहा- अभी AFSPA हटाने की कोई जरूरत नहीं है

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) पर किसी पुनर्विचार या इसके प्रावधानों को हल्का बनाने का समय नहीं आया है...

Reported by: Bhasha [Published on:28 Jan 2018, 5:35 PM IST]
General Bipin Rawat | PTI Photo- India TV
General Bipin Rawat | PTI Photo

नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) पर किसी पुनर्विचार या इसके प्रावधानों को हल्का बनाने का समय नहीं आया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना गड़बड़ी वाले जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में काम करते समय मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरती रही है। रावत की टिप्पणियां काफी महत्व रखती हैं क्योंकि ये इन खबरों के मद्देनजर आई हैं कि AFSPA के ‘कुछ प्रावधानों को हटाने या हल्का करने’ पर रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के बीच कई दौर की उच्चस्तरीय चर्चा हुई है। यह कानून गड़बड़ी वाले क्षेत्रों में विभिन्न अभियान चलाते समय सुरक्षाबलों को विशेष अधिकार और छूट प्रदान करता है। जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में विभिन्न तबकों की ओर से इस कानून को हटाने की लंबे समय से मांग होती रही है।

जनरल रावत ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इस वक्त AFSPA पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है।’ उनसे इन खबरों के बारे में पूछा गया था कि सरकार इन राज्यों में आफ्सपा के हल्के स्वरूप की मांग को लेकर समीक्षा कर रही है। सेना प्रमुख ने कहा कि AFSPA में कुछ कठोर प्रावधान हैं, लेकिन सेना अधिक नुकसान को लेकर और यह सुनिश्चित करने को लेकर चिंतित रहती है कि कानून के तहत उसके अभियानों से स्थानीय लोगों को असुविधा न हो। उन्होंने कहा, ‘हम (AFSPA के तहत) जितनी कठोर कार्रवाई की जा सकती है, उतनी कठोर कार्रवाई नहीं करते हैं। हम मानवाधिकारों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। हम निश्चित तौर पर अधिक नुकसान को लेकर चिंतित रहते हैं। इसलिए ज्यादा चिंता न करें, क्योंकि हम पर्याप्त कदम और सावधानी बरतते हैं।’

‘सेना का मानवाधिकार रिकॉर्ड काफी अच्छा’

जनरल रावत ने कहा कि सेना के पास यह सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर कार्य नियम होते हैं कि AFSPA के तहत कार्रवाई करते समय लोगों को कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा, ‘AFSPA सक्षम बनाने वाला एक कानून है जो सेना को विशेष तौर पर काफी कठिन क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देता है और मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि सेना का काफी अच्छा मानवाधिकार रिकॉर्ड रहा है।’ यह पूछे जाने पर कि जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए क्या सेना के तीनों अंगों को शामिल कर संयुक्त दृष्टिकोण अपनाने का समय आ गया है, रावत ने कोई सीधा उत्तर नहीं दिया, लेकिन कहा कि सशस्त्र बलों के पास विभिन्न तरह के अभियान चलाने के लिए ‘विकल्प उपलब्ध’ होते हैं। उन्होंने कहा, ‘हां विभिन्न तरह के अभियानों को अंजाम देने के लिए हमारे पास विकल्प होते हैं, लेकिन हमारे द्वारा किए जाने वाले अभियानों की प्रकृति की वजह से इन्हें उजागर नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे केवल दूसरा पक्ष सतर्क होगा।’

सीमा पार आतंकवाद पर भी बोले जनरल
जनरल रावत ने कहा कि आप अभियान की योजना बनाते हैं तो यह सर्वश्रेष्ठ होता है कि सुरक्षाबल जिस ढंग से अभियान चलाना चाहते हैं, वह उन्हीं पर छोड़ दिया जाए। जिस ढंग से अभियान किया जाना हो और जिस तरह से उस पर योजना बनानी हो और जिस तरह से उन्हें अंजाम दिया जाना हो, यह कभी उजागर नहीं किया जाता। यह पूछे जाने पर कि जम्मू कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए क्या बाह्य और आंतरिक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तालमेल की आवश्यकता है, रावत ने कहा कि सशस्त्र बल और अन्य एजेंसियां एक होकर काम करती रही हैं। सेना प्रमुख ने कहा, ‘इस मोड़ पर खुफिया एजेंसियों के बीच हमारा जिस तरह का सहयोग है, वह काफी उच्च दर्जे का है। आज सभी खुफिया एजेंसियां और सुरक्षाबल एक होकर काम कर रहे हैं। हम सभी के बीच शानदर तालमेल है और मुझे नहीं लगता कि इस समय जो हो रहा है, उससे हम इसे अगले उच्च स्तर पर ले जाएं। मुझे लगता है कि यह सर्वश्रेष्ठ और सही तरीका है।’

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Web Title: Time has not come for any rethink on AFSPA, says Army Chief General Bipin Rawat
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