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‘Me Too’: आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी याचिका पर तत्काल सुनवाई से न्यायालय का इंकार

'मीटू' पर उच्‍चतम न्‍यायालय तुरंत सुनवाई नहीं करेगा। इस संबंध में दायर याचिकाओं के लिए कोर्ट सामान्‍य प्रक्रिया का पालन करेगा।

Written by: IndiaTV Hindi Desk [Updated:22 Oct 2018, 12:54 PM IST]
Me too- India TV
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नई दिल्ली। 'मीटू' पर उच्‍चतम न्‍यायालय तुरंत सुनवाई नहीं करेगा। इस संबंध में दायर याचिकाओं के लिए कोर्ट सामान्‍य प्रक्रिया का पालन करेगा। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा लगाए गए यौन शोषण और प्रताड़ना के आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया। 

महिलाओं द्वारा लगाए गए यौन शोषण के इन आरोपों को भारत का ‘मी टू’ अभियान कहा जा रहा है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस. के. कौल की पीठ ने याचिका दायर करने वाले वकील एम. एल. शर्मा को बताया कि इस पर सुनवाई सामान्य तरीके से होगी। 

प्राथमिकियों के अलावा, याचिका में आरोप लगाने वाली महिलाओं को सहायता और सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश राष्ट्रीय महिला आयोग को देने का अनुरोध भी किया गया है। 

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Web Title: Supreme Court refuses urgent hearing on PIL that sought FIRs based on metoo allegations | आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी याचिका पर तत्काल सुनवाई से न्यायालय का इंकार
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